Delhi - दिल्ली के थोक बाजार हरियाणा के इस शहर में लाने की तैयारी, दिल्ली सरकार रोकने के लिए ला रही नई नीति
HR Breaking News, Digital Desk - (Delhi) दिल्ली की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर थोक बाजारों को हरियाणा में शिफ्ट करने की कोशिशों ने दिल्ली सरकार को सतर्क कर दिया है। थोक व्यापार के साथ-साथ राजस्व को बाहर जाने से रोकने के लिए सरकार अब तेज़ी से कदम उठा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही वेयरहाउसिंग नीति, नई व्यापार-उद्योग नीति, व्यापार कल्याण बोर्ड का गठन और एसआरडीसी का पुनर्गठन किया जाएगा।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था में व्यापार-उद्योग का 65% योगदान-
दिल्ली के थोक बाजार सिर्फ व्यापार के केंद्र नहीं, बल्कि शहर की विरासत और अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी हैं। मुगलकाल से चले आ रहे ये बाजार आज भी उत्तर भारत के बड़े व्यापारिक हब बने हुए हैं। राजधानी में 300 से ज्यादा थोक बाजार हैं, जहां ढाई से तीन लाख कारोबारी प्रतिष्ठान और करीब 500 खुदरा बाजारों में लगभग सात लाख कारोबारी सक्रिय हैं। अनुमान है कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था में अकेले व्यापार-उद्योग का योगदान (Contribution of trade and industry) करीब 65 प्रतिशत है।
जल्द शुरू होगी सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया-
हरियाणा सरकार खारी बावली, चावड़ी बाजार, भगीरथ पैलेस और कीर्ति नगर जैसे दिल्ली के बड़े थोक बाजारों के कारोबार को सोनीपत के राई क्षेत्र में स्थानांतरित करने की कोशिश कर रही है, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था को व्यापार से मजबूती मिले। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Chief Minister Nayab Singh Saini) के अनुसार, दिल्ली के व्यापारियों के लिए पर्याप्त जमीन आवंटित करने और जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में व्यापारियों और उद्यमियों के साथ हुई बैठक में बताया कि चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस स्थित इलेक्ट्रिकल मार्केट, खारी बावली के सूखे मेवे व मसालों के थोक बाजार और कीर्ति नगर के मार्बल मार्केट (Marble Market, Kirti Nagar) के लिए सोनीपत के राई क्षेत्र में जमीन आवंटित की जाएगी। इसी तर्ज पर अन्य प्रमुख बाजारों को भी हरियाणा शिफ्ट करने की योजना पर काम चल रहा है।
सरकार देगी बेहतर सुविधाएं-
इससे पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों के साथ-साथ दिल्ली सरकार (Delhi Government) में भी चिंता बढ़ी है। माना जा रहा है कि जल्द ही दिल्ली सरकार के मंत्री व्यापारियों से बातचीत कर एक रोडमैप पेश कर सकते हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कुछ महीने पहले थोक बाजारों को दिल्ली के बाहरी इलाकों में शिफ्ट करने की बात कही थी, लेकिन व्यापारियों में नाराजगी बढ़ने पर उन्होंने स्पष्ट किया था कि पुराने थोक बाजार वहीं रहेंगे और सरकार उन्हें बेहतर सुविधाएं देगी।
थोक बाजारों में समस्याओं की भरमार-
पुरानी दिल्ली में सैकड़ों साल से चल रहे थोक बाजार आज कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। संकरी गलियां और भारी भीड़ के कारण यहां फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस (ambulance) जैसी आपात सेवाओं की पहुंच बेहद मुश्किल हो जाती है। वहीं, पार्किंग की भारी कमी के चलते सड़क किनारे अवैध पार्किंग होती है और माल लोडिंग-अनलोडिंग (loading and unloading of goods) में घंटों का समय बर्बाद हो जाता है।
बाजार क्यों तलाश रहे बाहर का विकल्प-
इन बाजारों में भीषण ट्रैफिक जाम (severe traffic jam) रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। जर्जर और कई जगहों पर अवैध निर्माण के कारण इमारतें लगातार असुरक्षित होती जा रही हैं। लटकते बिजली के तार किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। इसके अलावा सीलिंग का खतरा भी हमेशा बना रहता है। सीवर का ओवर फ्लो होना, रेहड़ी पटरी वालों का अतिक्रमण (encroachment by street vendors), गंदगी, सार्वजनिक शौचालयों की कमी, पीने के पानी का संकट जैसी समस्याओं से थोक बाजारों में कारोबारियों की नई पीढ़ी का मोह भंग होता जा रहा है। सबसे बड़ा संकट गोदामों और कोल्ड स्टोरेज की अनुपलब्धता है, जिसके चलते भी बाजार, अब बाहर का विकल्प देख रहे हैं।
धूल खाती रही योजनाएं फाइलों में -
पिछली सरकारों के दौरान थोक बाजारों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने और इंस्पेक्टरराज (Improvement of infrastructure and inspector raj in wholesale markets) से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। खारी बावली सहित पांच बड़े बाजारों के पुनर्विकास की योजनाएं भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकीं। इसी तरह ई-पोर्टल शुरू करने और बाजारों में व्यापार मेले आयोजित करने जैसी कई घोषणाएं फाइलों में ही सिमटी रह गईं।
दस सालों से चल रही हरियाणा जाने की बात-
पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों (Wholesale markets of Old Delhi) को हरियाणा के सोनीपत स्थित राई क्षेत्र में स्थानांतरित करने की कोशिशें पिछले करीब एक दशक से चल रही हैं। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Former Chief Minister Manohar Lal Khattar) और हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, और नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) सरकार ने भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। अब माना जा रहा है कि यह योजना कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने की दिशा में बढ़ सकती है।
व्यापारी संगठन बता रहे बाजारों का विस्तार-
भगीरथ पैलेस के साथ ही खारी बावली के कारोबारी संगठन अपने बाजारों को हरियाणा ले जाने की कवायद को बाजार का विस्तार बता रहे हैं। उनके अनुसार, समस्याओं से घिरे बाजारों में उनकी अगली पीढ़ी नहीं आना चाहती, इसलिए उन्हें विस्तार का विकल्प दिया जा रहा है। बाकी, यहां भी बाजार रहेंगे। दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन (Delhi Electrical Traders Association) के अध्यक्ष अजय शर्मा कहते हैं कि इसे बाजारों के स्थानांतरण (shifting markets) की जगह विस्तार कहना उचित है। यहां समस्याओं के साथ सुविधाओं की भी कमी है। उतने स्थान नहीं है, जिसमें कुछ नया किया जा सके।
बाजारों के साथ राजस्व रोकने के होंगे प्रयास-
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दिल्ली का राजस्व हरियाणा की ओर जाने से रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उनके मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) सरकार द्वारा बाजारों की अनदेखी किए जाने से ही मौजूदा हालात बने हैं। अब रेखा गुप्ता की सरकार थोक बाजारों के विकास (development of wholesale markets) और बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने पर गंभीरता से काम कर रही है।
चांदनी चौक (chandani chowk) से सांसद व कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल (National General Secretary Praveen Khandelwal) के अनुसार, दिल्ली सरकार लाजिस्टिक नीति के गोदामों को लेकर बढ़िया पालिसी लेकर आने वाली है। दिल्ली में पर्याप्त जमीन है जहां गोदाम बनाए जा सकते हैं। इससे दिल्ली के थोक व्यापारियों की बड़ी समस्या दूर होगी।
इसी दिशा में व्यापारियों से नियमित संवाद और बाजारों की बेहतरी के लिए दिल्ली व्यापार कल्याण बोर्ड (Delhi Trade Welfare Board) का गठन किया गया है, जो जल्द ही पदाधिकारियों की घोषणा के साथ औपचारिक रूप से काम शुरू करेगा। इसके अलावा शाहजहांनाबाद पुनर्विकास निगम (SRDC) का पुनर्गठन कर व्यापारी संगठनों की सहमति से पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों के पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
खंडेलवाल कहते हैं कि दिल्ली के बाजार न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि दिल्ली की पुख्ता पहचान हैं। यह जरूर रहा कि पूर्व की सरकारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन रेखा गुप्ता की सरकार (Rekha Gupta's government) इस दिशा में गंभीर है और उसे लेकर कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की हैं।
आने वाले कुछ महीनों में और बड़े निर्णय लिए जाने की संभावना है। बाजारों को दिल्ली से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। वहीं, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार (BJP government in Delhi) अभी एक वर्ष भी पूरी नहीं हुई है, लेकिन व्यापार हित में लिए गए ऐतिहासिक कदमों का असर अब नजर आने लगा है।
