8th Pay Commission में पेंशन से लेकर वेतन तक किस राज्य में होगा कितना बदलाव, जानें सबकुछ
HR Breaking News, Digital Desk- (8th Pay Commission) देशभर में आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा जोरों पर है। देश के 50 लाख से ज्यादा कर्मचारी और 69 लाख पेंशनभोगी बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, राज्यों के कर्मचारियों (8th Pay Commission state employees) की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य कर्मचारी भी केंद्र की तरह लाभ पाएंगे या उन्हें लंबा इंतजार करना होगा।
दरअसल, नया वेतन आयोग लागू होने पर सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लाभ मिलता है। लेकिन राज्य सरकारों के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्थिति अलग होती है। आठवें वेतन आयोग (8th CPC) के संदर्भ में यही सवाल फिर से चर्चा में है कि राज्य कितने समय में सिफारिशें लागू करेंगे, क्या वेतन-पेंशन समान होगी और एरियर कब से मिलेगा।
राज्य सरकारें अलग वेतन आयोग क्यों बनाती हैं-
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि राज्य सरकारें अपना अलग वेतन आयोग क्यों बनाती हैं। हर राज्य की आर्थिक स्थिति, राजस्व और बजट क्षमता अलग होती है। इसलिए राज्य सीधे केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बजाय अपना स्टेट पे कमीशन बनाते हैं, ताकि वेतन, पेंशन और भत्तों को राज्य की आर्थिक स्थिति के अनुरूप तय किया जा सके। हाल ही में असम सरकार ने भी अपना वेतन आयोग (Assam 8th State Pay Commission) बनाया है।
केरल में 11वां वेतन आयोग, पंजाब में 6वां-
यह जरूरी नहीं कि हर राज्य में हर 10 साल में नया वेतन आयोग बने। केरल में फिलहाल 11वां वेतन आयोग (Kerala 11th Pay Commission) चल रहा है, कर्नाटक में 7वां और पंजाब में 6वां (Punjab 6th Pay Commission) लागू है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Manjeet Singh Patel) का कहना है कि अलग-अलग आयोग होने के बावजूद केंद्र और राज्यों का पे स्ट्रक्चर लगभग समान रहता है।
राज्यों में वेतन आयोग की प्रक्रिया कैसी होती है?
राज्य वेतन आयोग की प्रक्रिया भी लगभग केंद्रीय वेतन आयोग (central pay commission) जैसी ही होती है। एक चेयरमैन और सदस्य नियुक्त किए जाते हैं, रिपोर्ट तैयार होती है, मंत्रियों का समूह उस पर विचार करता है और फिर राज्य सरकार अंतिम फैसला लेती है।
क्या राज्यों के कर्मचारियों की सैलरी भी केंद्र जैसी बढ़ती है-
अब सवाल यह उठता है कि क्या राज्य कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन (pension) भी केंद्र के समान बढ़ती है। अधिकांश मामलों में फिटमेंट फैक्टर (fitment factor) केंद्र जैसा ही होता है, हालांकि कुछ राज्यों में यह थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, 7वें केंद्रीय वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर 2.57 (State fitment factor) था, जबकि पंजाब के 6वें वेतन आयोग (6th pay commission) में 2.59 और उत्तर प्रदेश में 2.57 रखा गया।
कब से मिलेगा आठवें वेतन आयोग का एरियर-
आम तौर पर, पिछला वेतन आयोग खत्म होने के अगले दिन से एरियर मिलना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई, इसलिए आदर्श रूप से 1 जनवरी 2026 से एरियर (8th Pay Commission arrears January 2026) बनना चाहिए। हालांकि, इस बार 8वें CPC में इम्प्लीमेंटेशन डेट (Implementation Date) तय नहीं की गई है, इसलिए केंद्र या राज्य के आधिकारिक ऐलान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
कितना समय लगेगा 8th CPC लागू करने में राज्यों को-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य सरकारें 8वें CPC को लागू करने में कितना समय लेंगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि केंद्र के बाद राज्यों पर कोई कानूनी समय-सीमा नहीं होती। जो राज्य जल्दी निर्णय लेते हैं, वे इसे 6 महीने से 1 साल में लागू कर देते हैं, जबकि अधिकांश राज्य इसे लागू करने में 1 से 3 साल का समय लेते हैं।
सातवें वेतन आयोग (7th pay commission) के दौरान भी कुछ राज्यों ने इसे एक साल में लागू कर दिया, जबकि कुछ ने 2020 या उसके बाद लागू किया। यानी साफ शब्दों में कहा जाए तो आठवें वेतन आयोग (8th pay commission latest updates) का लाभ राज्यों के कर्मचारियों तक जरूर पहुंचेगा, लेकिन समय, एरियर और फिटमेंट फैक्टर सभी राज्य सरकारों के निर्णय पर निर्भर करेंगे।
