Haryana के किसानों को केंद्र सरकार की बड़ी सौगात, 600000 एकड़ सेम की खारी भूमि को बनाया जाएगा कृषि योग्य
HR Breaking News : (Union Budget 2026) आज, 1 फरवरी 2026 रविवार के दिन देश में नया बजट पास हुआ है। इतिहास पहली बार रविवार के दिन बजट पेश किया गया है। यह बजट कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा लाभकारी साबित हुआ है। पिछले काफी समय से हरियाणा में हजारों किसानों के बीच खारी जमीन तथा जल भराव से लेकर एक बड़ी समस्या बनी हुई थी, केंद्र की तरफ से इसको लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है तथा इस बजट में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विशेष प्रावधानों के साथ किसानों को सहयोग देने के रास्ते को खोल दिया है। अब हरियाणा की तकरीबन 6 लाख एकड़ सेम की भूमि को कृषि ओके बनाने के लिए कदम उठाया गया है।
इन इलाकों में फसलें होती जा रही कमजोर
राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तथा भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बजट 2026 में राज्य की उस समस्या को पहल दी है, जो पिछलें काफी समय से फसल उत्पादन और आय दोनों पर असर डाल रही थी। सोनीपत, रोहतक, फतेहाबाद, हिसार, जींद, सिरसा और झज्जर जैसे जिलों में जलस्तर और लवणता बढ़ने से फसलें लगातार कमजोर होती गईं। इस बार बजट में वर्टिकल ड्रेनेज और सब-सरफेस ड्रेनेज जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
पानी और नमक को बाहर निकालने का रास्ता
आज Budget 2026 में हरियाणा में जलभराव की वजह से प्रभावित जमीन के सुधार के लिए आने वाले 5 सालों का टारगेट रखा गया है। फैसला लिया गया है कि सुधार के लिए अगले नीचे पाइपों का जाल बिछाकर ज्यादातर पानी और नमक को बाहर निकाला जाएगा। इस तकनीक से पहले जिन खेतों में फसल उगाना कठिन था, वहां दोबारा खेती संभव हो सकेगी। केंद्र और राज्य की साझा रणनीति के तहत लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी।
हरियाणा में लगभग 12 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र में भूजल स्तर खतरनाक रूप से बढ़ चुका है, जिसमें से करीब 6 लाख एकड़ जमीन गंभीर जलभराव और लवणता से प्रभावित है। झज्जर, रोहतक, सोनीपत, हिसार, फतेहाबाद, जींद और सिरसा जैसे जिले इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन इलाकों में फसल उत्पादन 30 से 70 प्रतिशत तक कम हो चुका है।
बजट के बाद, इस समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम, माइक्रो-इरिगेशन और जल संग्रहण योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा। इससे जलभराव और लवणता की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और किसानों को राहत मिलेगी। इसके अलावा, यह तकनीकें राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में मदद करेंगी।
केंद्र सरकार के सामनें रखा प्रस्ताव
हरियाणा सरकार (Haryana Government) की तरफ से पिछलें काफी समय से प्रदेश के कई इलाकों में जलभराव और खारी जमीन की समस्या को प्रदेश के लिए गंभीर कृषि संकट बताते हुए केंद्र के सामनें रखा था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद यह मांग केंद्र सरकार से की थी कि सेम से प्रभावित क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति मानकर विशेष सहायता दी जाए। बजट 2026 (Budget 2026 ) में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (National Agricultural Development Scheme) के तहत किए गए प्रावधानों को इसी मांग की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे राज्य की रणनीति को केंद्र का समर्थन मिला है।
