CIBIL Score : नौकरी चाहिए तो सिबिल स्कोर का रखें ख्याल, क्रेडिट हिस्ट्री खराब हुई तो ऑफर लेटर भी हो जाएगा रद्द
CIBIL Score : अगर आप नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो यह अपडेट आपके लिए बेहद जरूरी है। दरअसल आपको बता दें कि अब सिर्फ परीक्षा पास करना काफी नहीं होगा। अब CIBIL स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री भी अहम भूमिका निभाएगी। खराब रिकॉर्ड होने पर ऑफर लेटर तक रद्द हो सकता है....पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
HR Breaking News, Digital Desk- (CIBIL Score) अगर आप सरकारी बैंक में नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। अब अधिकारी या क्लर्क बनने के लिए सिर्फ लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करना ही काफी नहीं होगा। केंद्र सरकार (central government) ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति से पहले उम्मीदवारों का CIBIL स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर भी जांचा जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी का वित्तीय रिकॉर्ड खराब पाया गया, तो परीक्षा पास करने के बावजूद उसे नौकरी से वंचित किया जा सकता है।
संसद में दी सरकार ने बड़ी जानकारी-
हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Minister of State for Finance Pankaj Chaudhary) ने इस विषय पर अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में करीब 20 उम्मीदवारों की नियुक्ति केवल इसलिए रद्द की गई या उनके ऑफर लेटर वापस ले लिए गए, क्योंकि उनकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब थी। यानी परीक्षा पास करने के बावजूद बैंक रिकॉर्ड जांच (bank records check) में वे मानकों पर खरे नहीं उतरे। हालांकि यह संख्या कुल भर्तियों का सिर्फ 0.02 प्रतिशत है, लेकिन यह नियम भविष्य के लिए एक स्पष्ट संकेत जरूर देता है।
क्या है नियम और कितना क्रेडिट स्कोर जरूरी-
बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) के जरिए होने वाली सभी भर्तियों में अब यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। उम्मीदवारों को जॉइनिंग के समय अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री दिखानी होगी।
सरकार के अनुसार, हर बैंक अपनी नीति के तहत न्यूनतम कट-ऑफ क्रेडिट स्कोर (Minimum cut-off credit score) तय करता है। आम तौर पर बैंकिंग सेक्टर में 650 या उससे ज्यादा का स्कोर अच्छा माना जाता है। इससे कम स्कोर होने पर बैंक जॉइनिंग रोक सकते हैं। यह नियम कर्मचारियों में जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
इस नियम से किसे मिलेगी छूट-
हालांकि, इस नियम को लेकर उन युवाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने कभी कोई लोन नहीं लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शर्त उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं होगी, जिनकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री ही मौजूद नहीं है। अगर आपने कभी क्रेडिट कार्ड (credit card) इस्तेमाल नहीं किया या कोई लोन नहीं लिया, तो आपके लिए यह नियम बाध्यकारी नहीं होगा। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन लोगों पर लागू है, जिन्होंने कर्ज लिया लेकिन समय पर चुकाया नहीं, जिससे उनकी वित्तीय साख खराब हो गई।
क्यों जरूरी हुआ क्रेडिट स्कोर-
बैंकों का तर्क सीधा और स्पष्ट है। बैंक कर्मचारियों (Bank Employees) को जनता के पैसे और जमा पूंजी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अपने निजी जीवन में पैसों को लेकर लापरवाह है और समय पर लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड बिल नहीं चुकाता, तो उसे जनता का पैसा सौंपना जोखिम भरा माना जा सकता है।
बैंकों का मानना है कि आर्थिक रूप से अनुशासित व्यक्ति ही एक जिम्मेदार कर्मचारी बन सकता है। चर्चा यह भी है कि भविष्य में केवल लोन ही नहीं, बल्कि बिजली और पानी जैसे बिलों के भुगतान को भी क्रेडिट स्कोर (credit score) से जोड़ा जा सकता है, ताकि व्यक्ति की समग्र वित्तीय जिम्मेदारी (overall financial responsibility) का आकलन किया जा सके।
