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Employees Pension : सरकारी ही नहीं, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए भी खुशखबरी, इतनी मिलेगी पेंशन

Employees Pension : सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भी खुशखबरी है। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत इतने साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक पेंशन के हकदार होंगे। इससे बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित होगी... पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-

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Employees Pension : सरकारी ही नहीं, प्राइवेट कर्मचारियों के लिए भी खुशखबरी, इतनी मिलेगी पेंशन

HR Breaking News, Digital Desk- (Employees Pension) प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद की बड़ी सुरक्षा है। अक्सर कर्मचारी पीएफ कटौती को तो समझते हैं, लेकिन पेंशन कॉलम में जमा राशि और उसकी शर्तों को लेकर असमंजस में रहते हैं।

 क्यों खास है कर्मचारियों के लिए EPS -

प्राइवेट सेक्टर में सरकारी नौकरियों की तरह पेंशन की सुविधा नहीं होती, ऐसे में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ईपीएस-95 योजना कर्मचारियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जब कोई कर्मचारी अपनी सेवा अवधि में पीएफ में योगदान देता है, तो उसका एक तय हिस्सा पेंशन फंड में जमा किया जाता है।

रिटायरमेंट के बाद मासिक आय का जरिया-

यह राशि रिटायरमेंट (retirement) के बाद कर्मचारी के लिए मासिक आय का आधार बनती है। हालांकि, कई कर्मचारी इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि यह पेंशन उन्हें कब मिलेगी और इसकी गणना किस तरह की जाती है। कर्मचारी पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

पेंशन पात्रता की दो जरूरी शर्तें-

कर्मचारी पेंशन योजना के तहत मासिक पेंशन का लाभ लेने के लिए कानूनन कुछ शर्तें पूरी करना जरूरी है। इसमें सबसे अहम शर्त यह है कि कर्मचारी की पेंशन योग्य सेवा कम से कम 10 वर्ष की होनी चाहिए।

ऐसा करने पर आजीवन पेंशन का अधिकार नहीं मिलेगा-

यहां खास ध्यान देने वाली बात यह है कि नौकरी बदलने की स्थिति में पीएफ का पैसा निकालने के बजाय उसे ट्रांसफर कराना चाहिए। अगर आप 10 साल की पेंशन योग्य (pensionable) सेवा पूरी होने से पहले राशि निकाल लेते हैं, तो आपकी सर्विस हिस्ट्री (service history) शून्य मानी जाती है और आप कर्मचारी पेंशन योजना के तहत आजीवन पेंशन के हकदार नहीं रह जाते।

दूसरी शर्त- 58 वर्ष की आयु-

कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पूर्ण पेंशन प्राप्त करने की मानक आयु 58 वर्ष तय की गई है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारी 50 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन ले सकते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में पेंशन की राशि कम हो सकती है और अलग शर्तें लागू होती हैं।

पेंशन खाते में फंड का कैलकुलेशन-

कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic salary of the employee) और डीए का 12% हिस्सा पीएफ में जाता है और इतना ही हिस्सा नियोक्ता भी देता है। लेकिन नियोक्ता के 12% हिस्से में से 8.33% हिस्सा सीधे ईपीएस यानी पेंशन खाते में जमा होता है।

पेंशन की राशि एक तय सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ती-

फिलहाल पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये निर्धारित है। यानी चाहे आपकी सैलरी (employees salary) 1 लाख रुपये ही क्यों न हो, पेंशन फंड (pension fund) में योगदान 15,000 रुपये के 8.33% यानी करीब 1,250 रुपये के आधार पर ही जोड़ा जाता है। इसी वजह से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों की कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पेंशन भी एक तय सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ पाती।

पेंशन शुरू करने का उचित समय-

पेंशन कब शुरू की जाती है, इसका सीधा असर आपकी मासिक पेंशन राशि पर पड़ता है। यदि आप 50 वर्ष की आयु के बाद लेकिन 58 वर्ष से पहले कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पेंशन लेना शुरू करते हैं, तो इसे प्री-मैच्योर पेंशन (premature pension) माना जाता है। ऐसे मामलों में हर एक वर्ष के लिए पेंशन राशि में 4% की कटौती की जाती है, जो आजीवन लागू रहती है।

डेफर्ड पेंशन के लाभ-

अगर आप 58 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन नहीं लेते और इसे 60 वर्ष तक टाल देते हैं, तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन नियमों (EPFO Rules) के तहत प्रति वर्ष 4% अतिरिक्त बोनस देता है। यानी 60 साल की उम्र में पेंशन शुरू करने पर आपको कुल मिलाकर लगभग 8% ज्यादा मासिक पेंशन मिल सकती है।

कौन से कर्मचारी मासिक पेंशन के पात्र नहीं होंगे-

अगर कोई कर्मचारी अपनी कुल पेंशन (pension) योग्य सेवा के 10 साल पूरे होने से पहले ही नौकरी छोड़ देता है या पीएफ का पूरा पैसा निकाल लेता है, तो वह मासिक पेंशन का हकदार नहीं रहता। ऐसे मामलों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization) की ओर से विड्रॉल बेनिफिट दिया जाता है। यह राशि एक निर्धारित सर्विस टेबल के आधार पर तय होती है, जिसमें सेवा के वर्षों को वेतन से गुणा करके गणना की जाती है।

ईपीएस पेंशन: आपके भविष्य की मजबूत लाठी-

यह एकमुश्त राशि आजीवन मिलने वाली मासिक पेंशन की तुलना में काफी कम और अस्थायी होती है। कर्मचारी पेंशन योजना आपके भविष्य की मजबूत लाठी है। इसलिए नौकरी बदलते समय पेंशन स्कीम सर्टिफिकेट (pension scheme certificate) जरूर लें या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के यूएएन के जरिए अपनी सर्विस हिस्ट्री जोड़ते रहें। 10 साल की सेवा पूरी करना और 58 वर्ष की आयु तक धैर्य रखना ही आपको सम्मानजनक पेंशन दिला सकता है।