home page

Income Tax Rules 2026 : आयकर नियम 2026 की अधिसूचना जारी, जानें क्या किए सरकार ने बदलाव

Income Tax Rules 2026 : सरकार ने Income Tax Rules 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत टैक्स सिस्टम में बदलाव होंगे और कुछ चीजें अब पहले से ज्यादा पारदर्शी होंगी। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और इसका असर अगले वित्त वर्ष में भरे जाने वाले ITR पर दिखेगा-

 | 
Income Tax Rules 2026 : आयकर नियम 2026 की अधिसूचना जारी, जानें क्या किए सरकार ने बदलाव

HR Breaking News, Digital Desk- सरकार ने Income Tax Rules 2026 अधिसूचित कर दिए हैं, जिसमें HRA से लेकर कैपिटल गेन तक कई बदलाव किए गए हैं। बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को HRA छूट का अधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही अब किरायेदार को मकान मालिक के साथ अपने संबंध की जानकारी भी देनी होगी। ये नियम 1 अप्रैल 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) से लागू होंगे और इसका असर जुलाई 2027 में भरे जाने वाले ITR पर दिखेगा।

जानें क्या-क्या हुआ बदलाव-

सैलरीड लोगों के लिए HRA में छूट-

- नए नियमों के तहत सैलरी कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के नियमों को स्पष्ट किया गया है।

- अब भारत के 8 प्रमुख शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को उनके वेतन के 50% तक की HRA छूट मिलेगी। ये शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु हैं।

- इन 8 शहरों के अलावा अन्य स्थानों पर रहने वालों के लिए एचआरए छूट की सीमा 40% रहेगी।

2. मकान मालिक के साथ संबंध की जानकारी देना अनिवार्य-

- टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार ने अब पारदर्शिता बढ़ा दी है। इनकम टैक्स के नए नियमों के मुताबिक टैक्सपेयर्स को अब फॉर्म 124 में यह खुलासा करना होगा कि उनका मकान मालिक के साथ क्या संबंध है।

- एचआरए छूट की गणना अब भी तीन मानदंडों में से सबसे कम राशि के आधार पर होगी। इनमें शामिल हैं: पहला - कर्मचारी को प्राप्त वास्तविक HRA, दूसरा - चुकाया गया किराया कम सैलरी के 10% से, और तीसरा - सैलरी का 50% या 40% (शहर के अनुसार)।

3. स्टॉक एक्सचेंजों के लिए सख्त नियम-

सरकार ने इनकम टैक्स के नए नियमों (Income tax new rules) में स्टॉक एक्सचेंजों के लिए भी बदलाव किए हैं। अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग (F&O) के लिए किसी एक्सचेंज को मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज माना जाने के लिए कड़े नियम और शर्तें पूरी करनी होंगी-

- एक्सचेंजों को ग्राहकों का PAN और यूनिक क्लाइंट आईडी जैसे डेटा को अनिवार्य रूप से कैप्चर करना होगा।

- सभी कैश और डेरिवेटिव लेनदेन का पूरा ऑडिट ट्रेल 7 साल तक सुरक्षित रखना होगा।

- एक्सचेंजों को हर महीने की 15 तारीख तक आयकर महानिदेशक (सिस्टम) को मासिक विवरण जमा करना होगा।

4. एसेट होल्डिंग पीरियड में नई स्पष्टता-

कैपिटल गेन्स की कैलकुलेशन के लिए होल्डिंग पीरियड (संपत्ति पास रखने की अवधि यानी शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म) को लेकर नियम साफ किए गए हैं:

- आपने बॉन्ड या डिबेंचर को शेयरों में बदला है, तो होल्डिंग पीरियड की गणना (Calculating holding period) मूल इंस्ट्रूमेंट को खरीदने की तारीख से की जाएगी।

- अगर अचल संपत्ति इनकम डिक्लेरेशन स्कीम (IDS) 2016 के तहत घोषित है, तो होल्डिंग पीरियड रजिस्टर्ड डीड (Holding Period Registered Deed) की तारीख से माना जाएगा। अन्य संपत्तियों के मामले में होल्डिंग पीरियड की गिनती 1 जून 2016 से होगी।

क्या है नए नियमों का उद्देश्य?

सरकार का मानना है कि नए Income Tax Rules 2026 से टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी और स्पष्ट बनेगा। हालांकि, इसके चलते टैक्सपेयर्स और कंपनियों के लिए नियमों का पालन करने का दायरा भी बढ़ जाएगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और पूरे सिस्टम को आधुनिक और प्रभावी बनाना है।