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Income Tax : 7.5 लाख से एक रुपया भी ज्यादा कमाई वालों का टैक्स रिजीम में बचना मुश्किल, देना होगा इतना टैक्स

इस साल का इनकम टैक्स भरने की तारीख जल्दी ही बता दी जाएगी और इस बार आम जनता को सरकार से उम्मीद है की सरकार टैक्स में कुछ राहत देगी पर अभी ऐसा कुछ भी होता नज़र नहीं आ रहा है | अगर आपकी सालाना आमदन 7.5 लाख रूपए से ज्यादा है तो आपको इसका टैक्स देना होगा और आप नई टैक्स रेजीम में भी बच नहीं सकेंगे | इतनी अदम पर कितना टैक्स देना होगा, आइये जानते हैं इसका कैलकुलेशन 
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7.5 लाख से एक रुपया भी ज्यादा कमाई वालों को देना होगा इतना टैक्स

HR Breaking News, New Delhi : देश में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए टैक्सपेयर्स (Taxpayers) के पास दो विकल्प मौजूद हैं- ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) और न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime). टैक्सपेयर्स अपनी सुविधा के अनुसार, दोनों में से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि चालू वित्त वर्ष से न्यू टैक्स रिजीम (new tax regime) बाय डिफॉल्ट रहेगा, अगर किसी को ओल्ड टैक्स रिजीम के साथ जाना है तो फिर उन्हें ओल्ड टैक्स रिजीम (old tax regime) के विकल्प को चुनना होगा. 

ऐसे में अगर आप इंवेस्टमेंट डॉक्यूमेंट देकर इनकम टैक्स में छूट का लाभ लेना चाहते हैं तो फिर Proof Submission के दौरान सावधानी से ओल्ड टैक्स रिजीम (old tax regime) को चुनें. क्योंकि न्यू टैक्स रिजीम में इंवेस्टमेंट डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता है.

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बता दें, केंद्र सरकार ने बजट- 2023 के दौरान न्यू टैक्स रिजीम (new tax regime) में बड़ा बदलाव करते हुए 7 लाख रुपये तक की राशि को टैक्स फ्री (tax free income) करने का ऐलान किया था. इसके साथ ही ओल्ड और न्यू दोनों आयकर व्यवस्था में 50 हजार रुपये का स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन लाभ भी मिलता है. इस स्थिति में न्यू टैक्स स्लैब में 7.50 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं बनता है. लेकिन अगर आमदनी सालाना साढ़े 7 लाख रुपये से एक रुपये भी ज्यादा है तो नई दरों के हिसाब से इनकम टैक्स (income tax) का भुगतान करना पड़ेगा.

आइए जानते हैं न्यू टैक्स रिजीम के बारे में

न्यू टैक्स रिजीम (new tax regime) के अनुसार, 0 से तीन लाख की सालाना आय पर 0 फीसदी आयकर, 3 से 6 लाख की आय पर 5 फीसदी, 6 से 9 लाख की इनकम पर 10 फीसदी, 10 से 12 लाख रुपये की आय पर 15 फीसदी, 12 से 15 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी और 15 लाख से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी की दर से टैक्स देना होगा. 

एक रुपया भी अधिक सैलरी होने पर लगेगा टैक्स
मान लीजिए किसी की सैलरी 7.60 लाख रुपये सालाना है. न्यू टैक्स रिजीम में 50 हजार रुपये के स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को मिलाकर साढ़े 7 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है. लेकिन यहां सालाना आमदनी 7.60 लाख रुपये है, यानी साढ़े 7 लाख रुपये से ज्यादा है.

न्यू टैक्स रिजीम (old tax regime) के अनुसान तीन लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स (income tax news) नहीं लगेगा. बाकी के चार लाख 60 हजार रुपये टैक्स से दायरे में आएगा. तीन लाख रुपये से लेकर 6 लाख रुपये की इनकम पर 5 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा, जो 15,000 रुपये बनेगा. इसके बाद बचे 1 लाख 60 हजार रुपये में 50 हजार स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन माइनस करने के बाद एक लाख 10 हजार रुपये टैक्स के दायरे में आता है, जो कि 10 फीसदी टैक्स स्लैब में जोड़ा जाएगा. इस पर आयकर 11,000 रुपये बनता है. इस तरह से 7,60,000 रुपये की आय पर कुल 26000 रुपये आयकर बनता है. लेकिन यहां इनकम टैक्स विभाग का एक अलग नियम लागू होता है. 7 लाख से ज्यादा की आय की राशि और उसपर लगा टैक्स दोनों में से जो कम होगा, वो टैक्स लगेगा. 

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इस नियम के मुताबिक स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को मिलाकर 7.50 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है, अगर आय 7.60 लाख रुपये है, तो टैक्स के दायरे में आय का केवल 10 हजार रुपये आ रहा है. जबकि सिंपल न्यू टैक्स स्लैब से 26000 रुपये टैक्स बनता है. ऐसे आयकर विभाग का नियम कहता है कि इन दोनों में जो न्यूनतम राशि होगी, वही इनकम टैक्स के तौर पर देय होगा. यानी 7.60 लाख रुपये की आय पर टैक्स की राशि 10 हजार रुपये होगी.

ये है calculation
मान लीजिए कि आपकी सालाना इनकम 7.60 लाख रुपये है. स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन के तौर पर 50 हजार रुपये का लाभ मिलता है. (7,60,000-50,000= 7,10,000 रुपये). 

नियम के मुताबिक 3 लाख रुपये की आमदनी पर किसी तरह के टैक्स का प्रावधान नहीं है. इसलिए सात लाख में से तीन लाख टैक्स फ्री हो जाएगी. (7,10,000- 3,00,000= 4,10,000 रुपये).

अब चार लाख 10 हजार रुपये की राशि टैक्सेबल होगी. लेकिन ये राशि पर दो टैक्स स्लैब के दायरे में आएगी. तीन लाख रुपये पर पांच फीसदी का टैक्स लगेगा. (3,00,000%5= 15,000 रुपये).
 
बाकी के एक लाख 10 हजार रुपये की राशि 10 फीसदी टैक्स स्लैब के दायरे में आएगी. 1,10,000%10= 11,000 रुपये. इस तरह से (15,000+11,000= 26,000) कुल 26,000 रुपये आयकर बनता है. लेकिन आयकर दायरे से आय की राशि केवल 10 हजार रुपये ज्यादा है, ऐसे में केवल 10 हजार रुपये इनकम टैक्स देना होगा.