home page

FD में क्यों नहीं करना चाहिए 5 लाख से ज्यादा का निवेश, पैसे लगाने से पहले जान लें नियम

FD investment tips :आजकल शानदार रिटर्न के लिए एफडी को निवेश का एक सुरक्षित और इन्वेस्टमेंट ऑप्शन माना जाता है। हालांकि इसमें लोग लाखों की रकम जमा करके भी लाभ लेने की सोचते हैं, लेकिन बता दें कि एफडी (FD rules) में 5 लाख से अधिक का निवेश करना जोखिम भरा भी हो सकता है। आइये खबर के जरिये जानते हैं आखिर क्यों है ऐसा।

 | 
FD में क्यों नहीं करना चाहिए 5 लाख से ज्यादा का निवेश, पैसे लगाने से पहले जान लें नियम

HR Breaking News - (Fixed Deposit)। एफडी में निवेश करना वैसे तो बेहतर विकल्प माना जाता है, लेकिन इसमें एक लिमिट तक पैसे इनवेस्ट (Bank FD new rules) करना ही सही रहता है। 5 लाख से ज्यादा की एफडी करवाने पर आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। ऐसे में अधिक रिटर्न के चक्कर में आपको आर्थिक रूप से नुकसान भी हो सकता है। अगर आप भी एफडी (FD investment terms) में निवेश करने की सोच रहे हैं तो इन बातों को जरूर जान लें। 

 

 

1. इसलिए करवाएं 5 लाख तक की एफडी-

 

एफडी इसलिए 5 साल (FD time limits) तक करवानी चाहिए क्योंकि किसी बैंक के दिवालिया हो जाने या बैंक के डूब जाने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो जमाकर्ताओं को उनके जमा धन पर 5 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाएगा। यह इंश्योरेंस कवर "डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC)" एक्ट के तहत आता है। पहले, यह कवर केवल 1 लाख रुपए तक सीमित था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि यदि आपकी जमा राशि 5 लाख रुपए से अधिक है और बैंक दिवालिया (bank bankrupt) हो जाता है, तो भी आपको केवल 5 लाख रुपए मिलेंगे, जबकि शेष राशि को खो दिया जाएगा।

 

2. 10 लाख की एफडी पर हो सकता है आधा नुकसान-

यदि आपने बैंक में 10 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (safe tenure FD) कर रखी है और बैंक दिवालिया हो जाता है, तो आपको इससे आधा नुकसान हो सकता है। क्योंकि ऐसी स्थिति आने पर केवल 5 लाख रुपए की इंश्योरेंस कवर (insurance coverage on FD) के तहत राशि प्राप्त होगी। बाकी 5 लाख रुपए की राशि आप खो देंगे। यह नीति बैंक जमाकर्ताओं को आंशिक सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे बड़ी जमा राशियों का पूरा सुरक्षा कवर प्राप्त नहीं हो पाता है।

एफडी को लेकर जान लें ये बातें-

1. एफडी को गारंटिड रिटर्न (guaranteed return on FD) का निवेश इसलिए माना जाता है, क्योंकि अलग अलग डयुरेशन की एफडी करवाते समय भी आपको पता होता है कि आपकी एफडी कितने समय में मैच्‍योर होगी और आपको मैच्‍योरिटी के समय कितनी राशि मिलेगी।

2. जब आप बैंक में एफडी (FD me nivesh kaise kre)कराते हैं, तो आप अपनी सुविधा के अनुसार समय यानी अवधि चुन सकते हैं। बैंकों में आपको 7 दिनों से लेकर 10 सालों तक के विकल्प मिलते हैं। इस समय के आधार पर आपको अलग-अलग ब्याज दरें मिलती हैं। इसके अलावा, एफडी का लाभ यह होता है कि इसमें ब्याज (Interest rates on FD) भी बढ़ता रहता है। यानी आपके निवेश पर ब्याज मिलने के साथ ही उस ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। इस प्रकार, आपका पैसा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।

3. अगर आपको फौरन पैसों की ज़रूरत पड़ जाए तो अपनी एफडी तुड़वाने की भी जरूरत नहीं है। आप बिना एफडी तुड़वाए बिना से लोन ले सकते हैं। बैंक आपकी एफडी (FD me kitna nivesh kren) की पूरी राशि का 90 से 95 प्रतिशत तक कर्ज़ दे सकते हैं। इसके कर्ज़ पर ब्याज दर आमतौर पर एफडी के ब्याज दर से एक प्रतिशत अधिक होती है। इससे आप अपनी एफडी बचाए रखते हुए भी अपनी जरुरत पूरी कर सकते हैं।

4. कुछ एफडी ऐसी भी हैं, जिस पर आपको 80सी के तहत टैक्स छूट में राहत मिलती है। इन एफडी की अवधि 5 साल या 5 साल से ज्यादा होती है। ऐसी एफडी (5lakh FD benefits) पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होता।

5. वरिष्ठ नागरिकों के लिए, कई बैंक आम ग्राहकों की तुलना में 0.25 से लेकर 0.50 प्रतिशत तक अधिक ब्याज देते हैं। कुछ बैंक 80 साल से ऊपर के लोगों को और भी ज्यादा ब्याज देते हैं। इससे सीनियर सिटिजंस (FD for senior citizens)को अधिक लाभ मिलता है। इस अतिरिक्त ब्याज दर से उनकी बचत पर अधिक अच्छा रिटर्न मिलता है और वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं। यह उनकी वित्तीय योजना को बेहतर बनाने में मदद करता है।