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Bihar Success Story : गांव वाले जिसे मारते थे बेरोजगारी का ताना, फिर एक साथ मिली तीन सरकारी नौकरी

Success Story :किस्मत कब बदल जाए ये कोई नहीं जानता। ऐसा ही कुछ इस युवक के साथ हुआ। जिसने पढ़ाई तो बीएड तक की मगर, कई कोशिशों के बावजूद फाइनली नौकरी नहीं लग रही थी। जिसकी वजह से लोगों ने ताना मारना शुरू कर दिया। लेकिन जब घर पर तीन तीन सरकारी नौकरियों की चिट्‌ठी आई तो सभी के होश उठ गए। 
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Bihar Success Story : गांव वालो जिसे मारते थे बेरोजगारी का ताना, फिर एक साथ मिली तीन सरकारी नौकरी

HR BREAKING NEWS (ब्यूरो)। बिहार-यूपी के गांवों में ये ट्रेंड रहा है कि कोई लड़का अगर पढ़ाई में ठीक-ठाक हो और नौकरी न लगे तो लोग ताने मारने लगते हैं। बाद में ये भी कहने लगते हैं, उसने पिता के पैसे पर मौज-मस्ती की है। सही में पढ़ता तो नौकरी जरूर लग जाती।

ऐसी ही कहानी औरंगाबाद के एक नौजवान की है, जिसने पढ़ाई तो बीएड तक की मगर, कई कोशिशों के बावजूद फाइनली नौकरी नहीं लग रही थी। इसी वजह से गांव के लोग उसे ताने दे रहे थे। बीएड की पढ़ाई की मजाक भी उड़ाते थे। आईटीआई और इंजीनिरिंग करने की मुफ्त की सलाह भी देते थे। अब उसके घर एक साथ तीन-तीन सरकारी नौकरियों चिट्ठी आ गई।

 

 

औरंगाबाद के रहने वाले हैं ओमप्रकाश

ये सब कर दिखाया है, औरंगाबाद के शमशेरनगर के रहने वाले ओमप्रकाश शर्मा ने। ओमप्रकाश के पिता सहजानंद शर्मा की नौकरी एयरफोर्स में थी, लिहाजा अलग-अलग शहरों में शुरुआती पढ़ाई हुई। बच्चे जब बड़े होने लगे तो फैमिली को दिल्ली में सेटल कर दिए ताकि पढ़ाई डिस्टर्ब न हो। तीन भाइयों में सबसे छोटे ओमप्रकाश ने स्‍कूली शिक्षा के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से पोस्‍ट ग्रेजुएशन किया।

ओमप्रकाश ने हरियाणा की एक निजी यूनिवर्सिटी से बीएड की डिग्री ली। यहीं से एकेडेमिक में जाने का फैसला लिया। एक समय ऐसा भी आया जब लोगों ने बीएड को लेकर ओमप्रकाश को तरह-तरह से ताने भी सुनाए। कई लोगों ने यहां तक कह डाला कि दिल्‍ली में रहकर बीएड कर रहे हो, बीएड करके तमाम बेरोजगार गांवों में घूम रहे हैं। आईटीआई या इंजीनियरिंग किए रहते तो प्राइवेट कंपनी में भी नौकरी लग जाती। हालांकि, इन तानों से ओमप्रकाश विचलित नहीं हुए और टीचिंग प्रोफेशन को ही करियर बनाने की ठान ली।

बीपीएससी टीचर के तीनों कैटेगरी में सेलेक्शन

यूजीसी की नेट परीक्षा भी दिए और उसमें सफल हो गए। इन दो परीक्षाओं में सफलता के बाद ओमप्रकाश का हौसला बढ़ गया। इसके बाद वो अपनी तैयारी में जुटे रहे। इसी दौरान उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय की टीजीटी और पीजीटी की लिखित परीक्षा भी पास कर ली, लेकिन इंटरव्‍यू में सफल नहीं हुए। इससे उसे थोड़ी निराशा हुई मगर मेरिट को कोई कहां रोक पाया है।

बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की शिक्षक भर्ती निकली तो ओमप्रकाश ने जमकर तैयारी की। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में उसका चयन हिन्‍दी विषय के लिए मिडिल स्‍कूल, हाईस्‍कूल और लेक्‍चरर तीनों पदों पर एक साथ हो गया। ओमप्रकाश का कहना हैं कि वो रोजाना नौ से दस घंटे तक पढाई करते थे क्‍योंकि उन्हें ये साबित करना था कि बीएड करके भी सरकारी नौकरी पाई जा सकती है। उनका कहना है कि परिवार ने उन पर भरोसा किया और उनका साथ दिया। जिसकी वजह से ही वो ये मुकाम हासिल कर सके।