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Success Story : प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाली ये लड़की 35 साल की उम्र में बनी अरबपति

Ghazal Alag success story : मामाअर्थ ब्रांड को लगभग सभी लोग जानते हैं। 2022 में यूनिकॉर्न बने गजल अलघ के इस स्‍टार्टअप का रेवेन्‍यू अब सालाना 1000 करोड़ के करीब हो चुका है। जानिए पूरी कहनी नीचें खबर में...
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Success Story :  प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाली ये लड़की 35 साल की उम्र में बनी अरबपति

HR Breaking News (नई दिल्ली)। मामाअर्थ (MamaEarth) आज भारत में एक जाना-पहचाना ब्रांड है. 6 साल में ही मामाअर्थ की पेरेंट कंपनी होनासा कंज्‍यूमर प्राइवेट लिमिटेड (Honasa Consumer Private Limited) यूनिकॉर्न बन गई. अगर भारत में टॉक्सिन मुक्‍त बेबी प्रोडक्‍ट्स (Toxin Free Baby Products) मिलते तो शायद मामाअर्थ जैसे ब्रांड की नींव ही न रखी जाती. मामाअर्थ की को-फाउंडर गजल अलघ (Ghazal Alagh) को टॉक्सिन फ्री बेबी प्रोडक्‍ट्स बनाने का विचार तब आया, जब उन्‍हें अपने बेटे के लिए देश में टॉक्सिन फ्री प्रोडक्‍ट नहीं मिले. उन्हें विदेशों से टॉक्सिन फ्री प्रोडक्ट मंगाने पड़ते थे. गजल ने अपने पति वरुण के साथ मिलकर साल 2016 में होनासा कंज्‍यूमर प्राइवेट लिमिटेड नाम से अपना स्‍टार्टअप शुरू किया और मामाअर्थ ब्रांड नेम से प्रोडक्‍ट बाजार में उतारे.

मामाअर्थ आज बहुत बड़ा ब्रांड बन चुका है. गजल और वरुण की कंपनी होनासा अब बेबीकेयर, स्किन केयर और ब्‍यूटी सेगमेंट में कई सारे प्रोडक्‍ट बाजार में बेचती है. मामाअर्थ के अलावा डर्मा को (The Derma Co) और बीब्‍लंट (BeBlunt) भी होनासा के ब्रांड हैं. होनासा को आईपीओ लाने के लिए सेबी ने अगस्‍त 2023 में मंजूरी दी थी. आज (बुधवार, 25 अक्टूबर 2023) से केवल 6 दिन बाद 31 अक्टूबर को आईपीओ खुलने वाला है. लोग 2 नवम्बर तक इसमें पैसा लगा पाएंगे. इस आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से करीब 1,700 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है.


बेटे की परेशान से आया आइडिया:

गजल अलघ के बेटे अगस्त्य को जन्‍म से ही स्किन प्रॉब्‍लम थी. टोक्सिन युक्त कोई भी प्रोडक्‍ट उसे लगाते ही उसकी स्किन खराब हो जाती. गजल को भारत में टॉक्सिन फ्री बेबी प्रोडक्‍ट नहीं मिले. भारत में टोक्सिन फ्री प्रोडक्ट्स की कमी के चलते गजल और वरुण को विदेश जाने वाले दोस्तों से टोक्सिन फ्री प्रोडक्ट्स मंगवाने पड़ते थे. गजल ने देखा की इस समस्‍या से कई पैरेंट्स जूझ रहे थे. गजल को यहीं से मामाअर्थ को शुरू करने का विचार आया.


नौकरी छोड़ शुरू किया स्‍टार्टअप:

गजल ने 2010 में पंजाब यूनिवर्सिटी से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से बीसीए की डिग्री ली. उन्‍होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट से इंटेंसिव कोर्स भी किया है. उन्‍होंने आईटी सेक्टर में कॉर्पोरेट ट्रेनर के रूप में भी काम किया. अलघ के पति वरुण भी हिंदुस्तान यूनिलीवर और इंफोसिस जैसी कंपनियों में काम कर चुके थे. साल 2016 में जब अलघ और वरुण ने मामाअर्थ शुरू करने का फैसला किया उस समय वरुण कोका कोला में बतौर सीनियर ब्रांड मैनेजर कार्यरत थे. वरुण नौकरी से इस्‍तीफा दे गजल के साथ हो लिए.


साल 2022 में मिला यूनिकॉर्न का दर्जा:

होनासा कंज्‍यूमर साल 2022 में यूनिकॉर्न बन गया. जिस स्टार्टअप की वैल्युएशन 1 अरब डॉलर यानी आज के लिहाज से करीब 8300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाती है, उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है. सिकोइया कैपिटल के नेतृत्‍व में कंपनी ने 5.2 करोड़ रुपये जुटाकर यह मुकाम हासिल किया.


अब 1000 करोड़ का कारोबार:

होनासा कंज्‍यूमर का रेवेन्‍यू अब 1000 करोड़ रुपये के करीब हो चुका है. कंपनी के पास खुद का रिसर्च लैब है जहां प्रोडक्ट डेवलप और टेस्ट किए जाते है और अमेरिका की Madesafe एजेंसी के पास टेस्ट होते हैं, कंपनी ने Madesafe की गाइडलाइंस के मुताबिक फॉर्मूलेशंस बनाए हैं.