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Beer bottle : ज्यादातर हरे और भूरे रंग की बोतल में ही क्यों मिलती है बियर, आप भी जान लीजिए इसके पीछे का कारण

अल्कोहल पीने वालों की सबसे पसन्दीदा बियर के बारे में हम सब जानते हैं और बहुत सारे लोग आये दिन बियर पीते भी है पर क्या अपने एक बात नोटिस की है, बियर का चाहे कोई भी ब्रांड हो, उसकी बोतल हरे या फिर भूरे रंग में ही आएगी, क्या है इसके पीछे का कारण, आइये विस्तार से जानते हैं 
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HR Breaking News, New Delhi : एल्कोहल का सेवन करने के अलग-अलग तरीके हैं. जिनमें से बीयर भी एक है. हालांकि, शराब की बोतल के मुकाबले बीयर में एल्कोहल की मात्रा कम होती है. बहुत से लोग सिर्फ बीयर तक ही सीमा तय करके रखते हैं. अब क्या है कि पीने वालों के लिए तो यह मजेदार चीज हैं, लेकिन नहीं पीने वाले लोगों के लिए बुरी. देश में बीयर की काफी डिमांड रहती है, तभी तो देश में इसका कारोबार काफी अच्छी तरह फल-फूल रहा है. यहां तक कि कुछ लोग तो बीयर पीने के फायदे औरों को गिनाते फिरते हैं. भले ही आप बीयर पीते हों या ना पीते हों पर आपने बीयर की बोतल (Beer Bottle) तो जरूर देखी होगी. मार्केट में भले ही किसी भी ब्रांड की बियर हो पर उसकी कांच की बोतल आपको हरे या फिर भूरे रंग में ही दिखेगी, इसके पीछे का कारण जानते हैं 

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अब बहुत लोग यह सोचेंगे कि अरे भई! रंग से क्या लेना-देना, मतलब तो बस बोतल के अंदर भरी बीयर से है. अब बोतल का रंग काला रहे या पीला या फिर नीला, उससे क्या ही लेना देना है. लेकिन, इन बोतलों का रंग ऐसा होने के पीछे एक बड़ी वजह होती हैं. क्योंकि अगर इनका रंग ऐसा न रखा जाए तो शायद आप इसे पी भी ना पाएं. बताया जाता है कि इंसान बीयर का इस्तेमाल प्राचीन मेसोपोटामिया की सुमेरियन सभ्यता के समय से ही करते आ रहे हैं.

पहले बोतल का होता था ये रंग 
ऐसा माना जाता है कि हजारों साल पहले प्राचीन मिस्र में बीयर की पहली कंपनी खुली थी. चूंकि उस समय बीयर की पैकिंग ट्रांसपेरेंट बोतल में की जाती थी तो पाया गया कि सफेद बोतल में होने की वजह से सूर्य की किरणों से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें (UV Rays) बीयर में मौजूद एसिड को खराब कर रही हैं. जिस वजह से बीयर में बदबू आने लगती थी और लोग उसे पीते नहीं थे. 

इस रंग से खराब नहीं होती बियर 
तब बीयर निर्माताओं ने इस समस्या का हल ढूंढते हुए बीयर के लिए भूरे रंग की परत चढ़ी बोतलें चुनी. इस रंग की बोतलों में बीयर खराब नहीं हुई, क्योंकि भूरे रंग की बोतलों पर सूरज की किरणों का असर नहीं हुआ. यही कारण है कि क्लोरोफॉर्म (बेहोश करने वाला केमिकल) को भी भूरे रंग की शीशी में ही रखा जाता है, क्योंकि यह सूरज की किरणों से रिएक्शन कर लेती हैं. लेकिन, भूरे रंग की शीशी में रखने पर सूरज की किरणों का इसपर असर ही नहीं होता.

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हरा रंग क्यों इस्तेमाल किया गया?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बीयर की बोतल हरे रंग में रंगी. दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भूरे रंग की बोतलों का अकाल पड़ गया था. ऐसे में बीयर निर्माताओं को फिर से एक ऐसा रंग चुनना था, जिस पर सूरज की किरणों का बुरा असर ना पड़े. तब यह काम हरे रंग ने किया और इसके बाद से बीयर हरे रंग की बोतलों में भी भरकर आने लगी.