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Whiskey में क्यों नहीं मिलाना चाहिए ठंडा पानी, जानिये एक्सपर्ट का जवाब

sharab peene ka sahi tarika - आज के समय में शराब का लोगों में तेजी से क्रेज बढ़ रहा है। एक तरह से शराब लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है। शादी हो या फिर छोटी पार्टी शराब का सेवन जरूर किया जाता है। इस बात से सभी वाकिफ हैं कि शराब पीने से सेहत को नुकसान होता है। लेकिन फिर भी लोग इसका सेवन करते हैं। अपने अक्सर देखा होगा। जब शराब पीते हैं तो ठंडा पानी जरूर डालते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्हिस्की में ठंडा पानी नहीं डाला जाता। आइए नीचे खबर में जानते हैं क्या है इसके पीछे का कारण - 

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Whiskey में क्यों नहीं मिलाना चाहिए ठंडा पानी, जानिये एक्सपर्ट का जवाब 

HR BREAKING NEWS (ब्यूरो)। व्हिस्की (Whiskey) या किसी अन्य एल्कॉहल में पानी मिलाएं या नहीं, यह बहुत बड़ी बहस का विषय है. दरअसल, अधिकांश Wine एक्सपर्ट तो यही मानते हैं कि हार्ड ड्रिंक को उसके मूल स्वरूप में ही एंजॉय करना चाहिए।


हालांकि, भारत और एशियाई देशों के लोगों के टेस्ट पैलेट, यहां मौजूद ड्रिंक्स की क्वॉलिटी और मौसम की वजह से ड्रिंक्स में पानी मिलाना आम बात है. पानी ही नहीं, लोग तो जूस, सोडा, एनर्जी ड्रिंक और न जाने क्या-क्या मिलाकर शराब पीते हैं. शराब (Liquor) के कड़वे स्वाद को बैलेंस करने के अलावा यह शरीर को भी हाइड्रेट रखता है।

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बहुत सारे लोग व्हिस्की में ठंडा पानी (Chilled Water) मिलाकर पीना पसंद होता है. खान-पान विशेषज्ञ मानते हैं कि शराब में मिलाए जाने वाले पानी के तापमान की बहुत बड़ी अहमियत होती है. यह शराब के स्वाद, फ्लेवर पर बहुत बड़ा असर डालता है. पानी के तापमान की अहमियत को समझने वाले ही हार्ड ड्रिंक के फ्लेवर को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं. दरअसल, इंसान की स्वाद ग्रंथियां (taste buds) तरल पदार्थ के अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग ढंग से प्रतिक्रिया देती हैं,


इसलिए इंसान को स्वाद भी अलग-अलग महसूस होता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खाने-पीने की चीज हो या ड्रिंक्स, ठंडी होने पर हमारी स्वाद ग्रंथियां उनके फ्लेवर को ढंग से समझ नहीं पातीं. बेहतर स्वाद या फ्लेवर तभी पता चलता है जब खाना या ड्रिंक पहले के मुकाबले गर्म हो. यही वजह है कि गर्म बीयर का स्वाद कड़वा महसूस होता है, जबकि ठंडी या चिल्ड बीयर पीने में मुश्किल नहीं होती.  

कितना हो मिलाए गए पानी का टेंप्रेचर 

वाइन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इंसानी स्वाद ग्रंथियां 15 से 35 डिग्री सेंटिग्रेट तापमान के बीच सबसे बेहतर ढंग से काम करती हैं. 35 डिग्री तापमान पर स्वाद ग्रंथियां पूरी तरह खुली होती हैं और चीजों को चखने के बाद हमारे दिमाग को स्वाद और जायके के बारे में स्पष्ट संदेश भेजती हैं. वहीं, जब ड्रिंक्स या खाने की चीज का तापमान 15 डिग्री के नीचे हो तो स्वाद ग्रंथियां दिमाग को स्पष्ट संदेश नहीं भेज पातीं जिसकी वजह से स्वाद या जायके के बारे में ढंग से बिलकुल पता नहीं चलता।

यानी ड्रिंक्स को बिलकुल ठंडी करके पीने पर यह हमारे टेस्ट पैलेट को एक तरह से शांत (Mute) कर देंगे और फ्लेवर समझ में ही नहीं आएंगे. ऐसे में कोई शख्स अगर महंगी सिंगल मॉल्ट का लुत्फ उठाना चाहता हो तो उसे ठंडी करके पीना उसके असल फ्लेवर के साथ ज्यादती करना होगा. शायद यही वजह है कि वाइन एक्सपर्ट्स महंगी शराब को बिना कुछ मिलाए पीने की सलाह देते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि व्हिस्की का सही फ्लेवर जानने के लिए पानी का तापमान रूम टेंप्रेचर या उससे थोड़ा ज्यादा होना चाहिए।


इसी वजह से बनते हैं खास गिलास

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अगर आपने ध्यान दिया हो तो व्हिस्की सबसे ज्यादा टंबलर गिलास में सर्व किए जाते हैं. इन गिलास की तली काफी मोटी और भारी होती है. भारी तली का मकसद व्हिस्की की स्वाभाविक गर्माहट को बरकरार रखना है ताकि जिस सतह पर गिलास को रखा जाए, उसका तापमान परोसी गई शराब के तापमान को प्रभावित न करे।

 वहीं, वाइन ग्लासेज के नीचे की तरफ लंबा सा हिस्सा होता है जिसे स्टेम (Stem) कहते हैं. वाइन एक्सपर्ट इसे पकड़कर ही पीने की सलाह देते हैं. वजह यही है कि कहीं गिलास को स्टेम के बजाए पेंदी से हाथों में पकड़ने से उसमें पड़ी वाइन का तापमान न बदल जाए.