Gold Buying : आम आदमी के लिए खुशखबरी, अब 9 कैरेट सोना खरीदने में बचेंगे पैसे
9 carat gold : बीते कुछ वर्षो में सोने की कीमतों में ताबड़तोड़ तेजी देखी गई है। सोने की कीमतों में इस ताबड़तोड़ तेजी के बाद आम लोगों के लिए सोना खरीदना बजट के बाहर हो गया था, लेकिन अब इन बढ़ते रेटों के बीच आम आदमी के लिए अच्छी खबर आई है। अगर आप भी सेाना खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो 9 कैरेट गोल्ड आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है।
HR Breaking News (Gold Buying) सोने के बढ़ते दामों के चलते अब गोल्ड आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। अब इन बढ़ते रेटों के बीच आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने 9 कैरेट गोल्ड के हॉलमार्किंग की मंजूरी दे दी है। आप सर्राफा बाजार से 9 कैरेट सोना (9 carat gold jewellery ) खरीदकर काफी बचत कर सकते हैं और ये आपके बजट में आपको मिल जाएगा। ऐसे में आइए खबर में जानते हैं कि आखिर 9 कैरेट गोल्ड कैसा होता है।
कितना प्योर है 9 कैरेट गोल्ड
सोने के इन बढ़ते दामों के चलते 24 कैरेट और 22 कैरेट सोना आम लोगों के लिए खरीदना मुश्किल हो गया हैं। ऐसे में इन बढ़ते रेटों के बीच 9 कैरेट गोल्ड यानी 37.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना बेहतर साबित हो रहा है। अब हाल ही में सरकार की ओर से 9 कैरेट गोल्ड की हॉलमार्किंग (Hallmarking of Gold) को मंजूरी दे दी गई है, जिस वजह से अब ये औपचारिक रूप से भारतीय मानक ब्यूरो (Indian Standards Bureau) की हॉलमार्किंग सिस्टम का ही एक पार्ट बन गया
डेली के फैशन स्टाइल में कर सकते हैं यूज
बता दें कि 9 कैरेट सोने (9 carat gold rates) में केवल 37.5 प्रतिशत सोना होता है और बाकी का 62.5 प्रतिशत हिस्से में धातु, जैसे चांदी और तांबा, मिलाया जाता है, जो इसे टिकाऊ बनाया है। यह सबसे हल्का गहना माना जा रहा हे और यह हल्का है, इस वजह से ये रोज पहनने के लिए सही है। भले ही ये देखनें में महंगे लगते हैं, लेकिन इनकी कीमत कम होती हैं। युवा पीढ़ी और ट्रेंडी ज्वैलरी पसंद करने वाले, इन्हें अपने डेली के फैशन स्टाइल में यूज कर सकते हैं।
गोल्ड पर क्यों जरूरी है हॉलमार्किंग
जब भी आप सोना खरीदें तो सबसे पहले हॉलमार्किंग (purity hallmarking ) पर गौर करें तो हॉलमार्किंग से ही सोने की शुद्धता और क्वालिटी का पता चलता है। हॉलमार्किंग का निर्धारत BIS कंपनी के तहत किया जाता है और इस कंपनी के तहत संचालित हॉलमार्किंग सिस्टम (hallmarking system) उपभोक्ताओं को उनके गहनों में मानक अनुसार सोना है, इस बात का विश्वास दिलाता है।
हॉलमार्किंग के माध्यमय से हर गहने पर BIS का लोगो, सोने की शुद्धता का ग्रेड मिलता है और 6 अंकों का यूनिक HUID कोड मिलता है। हालमार्किंग होने का फायदा यह है कि इससे ग्राहकों को मिलावट से बचाव का मिलता है।
भारतीय ज्वैलरी को कॉम्पिटिशन बनाएगा 9 कैरेट गोल्ड
सरकार की ओर से जैसे ही हॉलमार्किंग (9 carat gold hallmarking) की मंजूरी मिली है तो उसके बाद से लोगों का भरोसा 9 कैरेट गोल्ड की ओर बढ़ा है। 9 कैरेट गोल्ड से जो लोग हल्की ज्वैलरी बनाना चाहते हैं, वो ज्वैलरी उद्योग में नए ग्राहक स्थापित हो सकेंगे। वहीं, निर्यात बाजार में भी 9 कैरेट गोल्ड भारतीय ज्वैलरी को कॉम्पिटिशन बनाएगा।
जिस हिसाब से सोने के दाम (Sone Ke Damm) बढ़ रहे हैं, उससे युवा वर्ग हल्के और मॉडर्न गहनों को बनवाने में ज्यादा रूचित ले रहे हैं। अब सोने के बढ़ते दामों के चलते छोटे और हल्के हार, पेंडेंट, ब्रेसलेट और इयररिंग्स में 9 कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ गया है। फिर भले ही यह मंहगे लगते हैं, लेकिन फिर भी ये बजट फ्रेंडली होते हैं।
