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Gold Silver : इन 5 कारणों ने निकाली सोने चांदी की हेकड़ी, एक्सपर्ट ने बताया- अब खरीदें या बेचें

Gold Silver -पिछले कुछ महीनों की रिकॉर्ड तेजी के बाद सोना और चांदी अचानक तेज बिकवाली के दबाव में आ गए हैं। कीमतों में आई बड़ी गिरावट से निवेशकों में हलचल है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह गिरावट सिर्फ अस्थायी है या ट्रेंड बदल रहा है... इस बीच एक्सपर्ट्स ने मौजूदा हालात में खरीद और बिक्री को लेकर अहम राय दी है। जिससे जान लेना जरूरी हैं-

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Gold Silver : इन 5 कारणों ने निकाली सोने चांदी की हेकड़ी, एक्सपर्ट ने बताया- अब खरीदें या बेचें

HR Breaking News, Digital Desk- (Gold-Silver Crash) पिछले कुछ महीनों में गोल्ड और सिल्वर में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। जनवरी के अंत में सोना 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई थी। लेकिन अब दोनों कीमती धातुओं में ऐतिहासिक स्तर की बिकवाली हो रही है।

ग्लोबल मार्केट में शुक्रवार, 30 जनवरी को स्पॉट गोल्ड करीब 10% टूट गया, जो 1980 के दशक की शुरुआत के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी जा रही है। वहीं चांदी 27% से ज्यादा फिसली और इंट्रा-डे ट्रेडिंग में इसमें 36% तक की गिरावट दर्ज की गई। (10 gram gold price)

भारत में MCX पर 1 फरवरी को ओवरसीज बाजार में गिरावट के असर से सोना और चांदी लगभग 9% नीचे खुले। घरेलू बाजार में सोना करीब ₹1.4 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग ₹2.74 लाख प्रति किलो पर ट्रेड होती नजर आई।

सोने-चांदी में बिकवाली के 5 प्रमुख कारण-

- रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। जब बड़े खिलाड़ियों ने एक साथ बिकवाली की, तो सोने-चांदी की कीमतों पर तुरंत दबाव (Immediate pressure on gold and silver prices) बन गया।

 - डॉलर मजबूत होते ही सोना और चांदी महंगे (gold and silver expensive) लगने लगते हैं। चूंकि इन पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए मजबूत डॉलर के दौर में इनकी मांग कमजोर हो जाती है।

- नए संभावित फेड चेयर के तौर पर केविन वार्श के नाम की चर्चा में आया। वो पहले सख्त मौद्रिक नीति (monetary policy) के समर्थक माने जाते थे। इससे बाजार को लगा कि अब ब्याज दरों में बहुत ज्यादा कटौती नहीं होगी।

- सोना और चांदी बहुत कम समय में बहुत ज्यादा चढ़ गए थे। एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसे में टेक्निकल (technical) तौर पर करेक्शन यानी गिरावट आना स्वाभाविक था।

- हाल के महीनों में सोना-चांदी में सट्टा (Speculation in gold and silver) काफी बढ़ गया था। जब बाजार स्पेकुलेटिव हो जाता है, तो छोटी खबर भी बड़ी गिरावट की वजह बन जाती है।

क्या यह खरीदारी का सही समय है?

इस सवाल पर बाजार के जानकारों की राय बंटी हुई है और सोना-चांदी को लेकर उनका नजरिया अलग-अलग है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने के लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स (Long Term Fundamentals of Gold) मजबूत हैं। उनके अनुसार, अगले दो सालों में सोने में फिर तेजी लौट सकती है, जबकि मीडियम टर्म में यह ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है।

चांदी को लेकर एक्सपर्ट्स का रुख ज्यादा सतर्क बना हुआ है। उनका कहना है कि हाल के दिनों में चांदी काफी ओवरबॉट हो चुकी थी, जिसके चलते इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्लोबल स्तर (global level) पर चांदी के लिए और निचले सपोर्ट लेवल की भी बात कही जा रही है।

अब निवेश की क्या रणनीति होनी चाहिए?

चांदी की ऐतिहासिक वोलैटिलिटी को देखते हुए कई जानकार एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दे रहे हैं। इससे गलत समय पर एंट्री का जोखिम कम किया जा सकता है, जबकि सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग (manufacturing) जैसे सेक्टर्स से जुड़ी इसकी स्ट्रक्चरल डिमांड में भागीदारी भी बनी रहती है।

कुछ एक्सपर्ट्स इस गिरावट को ट्रेंड रिवर्सल नहीं, बल्कि एक हेल्दी कंसोलिडेशन मान रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि ऊंची कीमतों के कारण भारत में फिजिकल डिमांड (physical demand) पर असर पड़ा है। इसी वजह से निकट अवधि में सोना और चांदी दोनों में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

hiteOak Capital की सख्त चेतावनी-

WhiteOak Capital Mutual Fund ने अपनी रिपोर्ट ‘Gold is Talking, Silver is Screaming’ में ज्यादा रक्षात्मक रुख अपनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, जब चांदी सोने की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी दिखाती है, तो यह अक्सर सट्टेबाजी के चरम पर पहुंचने का संकेत होता है, न कि किसी टिकाऊ ट्रेंड का।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो घटकर करीब 46:1 रह गया है, जो पिछले 10 साल के औसत लगभग 80:1 से काफी नीचे है। इतिहास में ऐसे स्तरों को चांदी के लिए चेतावनी संकेत माना जाता रहा है।

ऐसे स्तरों पर चांदी आमतौर पर सोने की तुलना में ज्यादा तेजी से और गहराई तक गिरती है। रिपोर्ट में निवेशकों को चांदी में पहले मुनाफा बुक करने और पोर्टफोलियो रीबैलेंस (portfolio rebalance) करने की सलाह दी गई है। साथ ही, रिकॉर्ड कीमतों पर मेटल्स का पीछा करने के बजाय मुनाफे की रकम को डाइवर्सिफाइड इक्विटीज में लगाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि इक्विटीज में कैश फ्लो (Cash Flow in Equities), डिविडेंड और सालाना ₹1.25 लाख तक के LTCG एग्जेम्प्शन जैसे फायदे मिलते हैं, जो फिजिकल गोल्ड और सिल्वर में नहीं होते।

निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं-

कुल मिलाकर, सोना लॉन्ग टर्म निवेशकों (gold long term investors) के लिए अवसर पेश कर सकता है, जबकि चांदी में फिलहाल जोखिम ज्यादा नजर आ रहा है। मौजूदा हालात में जल्दबाजी के बजाय चरणबद्ध खरीद, समय पर मुनाफावसूली और सही एसेट एलोकेशन पर फोकस (Focus on the right asset allocation) करना ज्यादा समझदारी भरा माना जा रहा है।