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Success Story : इसे कहते हैं पक्का इरादा, पांच बार में प्रीलिम्स नहीं हुआ, छठे प्रयास में सीधा IAS बनीं

Success Story :  बार-बार असफल होने के बावजूद हार न मानने वाली अंबाला की बेटी आकृति की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। पांच बार प्रीलिम्स में फेल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और छठे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) बनकर साबित कर दिया कि सच्ची मेहनत और धैर्य का फल जरूर मिलता है... आइए नीचे खबर में नजर डाल लेते है इनकी कहानी पर-

 
Success Story : इसे कहते हैं पक्का इरादा, पांच बार में प्रीलिम्स नहीं हुआ, छठे प्रयास में सीधा IAS बनीं

HR Breaking News, Digital Desk- (UPSC Success Story of Aakriti Sethi) सफलता अक्सर हार न मानने की जिद और आगे बढ़ने के जुनून से मिलती है। अंबाला की बेटी आकृति की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पांच बार प्रीलिम्स में असफल होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। यह वही दौर है, जहां कई उम्मीदवार टूट जाते हैं, लेकिन मजबूत इरादों, अनुशासित तैयारी और खुद पर भरोसे के साथ आगे बढ़ा जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।

आकृति अपने सपने को पूरा करने की जिद में धैर्य के साथ लक्ष्य पर केंद्रित रहीं। संघर्ष और असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और छठे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर अपने सपने को साकार कर दिखाया। आइए इस सक्सेस स्टोरी में जानते हैं आकृति का संघर्ष (upsc success story of aakriti sethi) से सफलता तक का सफर, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, ऐसे शुरू हुआ था सफर-

आकृति सेठी (Aakriti Sethi Success Story) अंबाला की रहने वाली हैं। शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उनकी एक प्राइवेट कंपनी (private company) में नौकरी लग गई थी। शुरुआत में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी का नहीं सोचा था, लेकिन एक रिश्तेदार की सलाह पर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।

2017 में पहली बार दी परीक्षा, 5 बार प्रीलिम्स में फेल-

साल 2017 में आकृति ने पहली बार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा दी थी। प्रीलिम्स में असफल होने के बाद उन्हें लगा कि नौकरी छोड़ना कहीं गलत फैसला तो नहीं था। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अगले साल दोबारा परीक्षा दी, लेकिन नतीजा वही रहा। इसके बाद भी वह लगातार तीन बार और असफल हुईं। 2021 तक पांच बार प्रीलिम्स (Prelims five times) पास न होने के बाद निराशा जरूर आई, लेकिन उन्होंने रुकने के बजाय आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

मिला पिता का साथ, शब्दों से बढ़ा आत्मविश्वास-

लगातार मिल रही असफलताओं के बीच भी आगे बढ़ते रहने की हिम्मत आकृति को अपने पिता के सहयोग से मिली। कठिन दौर में उनके पिता के शब्दों ने उन्हें संबल दिया और खोया हुआ आत्मविश्वास लौटाया। उन्होंने कभी दबाव नहीं बनाया, बल्कि हर असफलता से सीख लेकर दोबारा खड़े होने की प्रेरणा देते रहे।

जिद और जुनून से साधा लक्ष्य, 2022 के छठे प्रयास में बनीं IAS-

लगातार असफलताओं के बावजूद कुछ कर दिखाने की जिद और आगे बढ़ने के जुनून के साथ आकृति ने दोबारा पूरी ताकत से तैयारी शुरू की। छठे प्रयास में उन्होंने खुद को पूरी लगन और अनुशासन के साथ पढ़ाई में झोंक दिया। साल 2022 उनके लिए निर्णायक साबित हुआ, जब उन्होंने 249वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन पाकर अपना सपना पूरा कर लिया।

 युवाओं के लिए प्रेरणा है आकृति की कहानी-

आकृति की सफलता (Aakriti's success) ने उनके पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और उन्हें अपनी बेटी पर बेहद नाज है। आज आकृति की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो असफलता के डर से आगे कदम नहीं बढ़ा पाते। यह सफर सिखाता है कि हार अंत नहीं होती, बल्कि सीखने का मौका होती है। जिद, जुनून और निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने वालों की जीत तय होती है।