हरियाणा में 7 साल में 62% घटा कपास का रकबा, ये हैं बड़े कारण
Haryana News - कपास की नगदी फसल से किसान अब दूरी बना रहे हैं। दरअसल ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में पिछले 7 साल में कपास का रकबा 62% तक काम हो गया है। इसके पीछे कई अहम कारण बताई जा रहे हैं। कपास की फसलों में कीटों का भारी प्रकोप और ज्यादा लागत के कारण किसान अब अन्य फसल उगा रहे हैं। चलिए खबर में जानते हैं विस्तार से क्यों घटा कपास का रकबा।
HR Breaking News - हरियाणा में कपास का रकबा लगातार काम होता जा रहा है। पिछले 7 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 62% तक कपास की खेती कम हो गई है। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक नुकसान है। कपास में गुलाबी सुंडी के प्रकोप और बारिश से फसल को होने वाले नुकसान की वजह से साल 2019-20 के मुकाबले 2026 में कपास का रकबा (kapas ki kheti) 62% तक कम हुआ है।
4 साल में इतनी कम हुई कपास की बुआई -
साल 2019-20 में प्रदेश भर में 8010.04 लाख हेक्टेयर में कपास (cotton cultivation) की बुवाई की गई थी, जो साल 2026-27 में कम होकर 3030.51 लाख हेक्टेयर रह गई। पिछले 4 साल में कपास की बिजाई का क्षेत्रफल लगभग 45% रह गया है। किसान अब कपास की बजाए बाजरा, धान और अन्य फसल को उगा रहे हैं।
साल 2024-25 के मुकाबले कपास की ज्यादा बुआई का ये रहा कारण -
साल 2024-25 के मुकाबले इस साल कपास की बिजाई ज्यादा हुई है। कृषि विभाग इसका कारण फतेहाबाद, सिरसा, हिसार (Hisar News), भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी में चलाए जा रहे प्रमोशन फॉर कॉटन कल्टीवेशन इन हरियाणा (Promotion for Cotton Cultivation in Haryana) अभियान को मानता है। इसके तहत किसानों को सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए 2,000 और देसी कपास की खेती के लिए 4,000 प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है।
कपास उत्पादन के मामले में देशभर में हरियाणा 7वें नबंर पर -
देशभर में साल 2024-25 में कपास (kapas ki kheti) उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है। दूसरे नंबर पर गुजरात। इसके बाद तेलंगना, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश छठे नंबर पर है। हरियाणा सातवें नंबर पर रहा है। हरियाणा (Haryana News) में 11.8 लाख गांठ उत्पादन हुआ है। वहीं विधायक क्षेत्रफल के हिसाब से भी हरियाणा देश में साथ में स्थान पर रहा है। हरियाणा में 2024-25 कपास की बिजाई का क्षेत्रफल 39 80.46 लाख हेक्टेयर रहा है। देश में कपास उत्पादन में हरियाणा का हिस्सा लगभग 3.96% है।
पिछले 7 साल में साल दर साल ऐसे कम हुआ कपास का रकबा -
पिछले 7 साल में साल 10 साल किस तरह से कपास के रकबे (kapas rakba) में गिरावट आई है। चलिए जानते हैं। साल 2019-20 में कपास का रकबा 8010.04 हेक्टेयर रहा। इसके बाद साल 2020-21 में 7390.60 हेक्टेयर कपास की बुवाई हुई। वही साल 2022-23 में कपास का रकबा 5740.61 हेक्टेयर रहा। साल 2023-24 में 5770.68 हेक्टेयर कपास की बुवाई हुई। साल 2024-25 में 3980.46 हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई। इसके बाद साल 2025-26 में कपास की बुवाई केवल 2840.00 हेक्टेयर में हुई। वहीं 2026-27 तक कपास का रकबा कम होकर 3030.51 हेक्टेयर रह गया। अलंकी पिछले साल के मुकाबले इस बार कपास की बुवाई ज्यादा हुई है।
