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हरियाणा में छह साल में 96% घटी पराली जलाने की घटनाएं

Haryana News :आज के समय में किसानों के लिए पराली अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गई है। जहां पहले पराली को जला दिया जाता था। वहीं, अब किसान इससे एक्स्ट्रा कमाई कर रहे हैं। प्रदेश में बीते 6 सालों में पराली जलाने की घटनाओं (stubble burning incidents) में 96% की कमी आई है। ऐसे में आइए खबर में जानते हैं कि इस बार पराली जलाने को लेकर कितनी रिपोर्ट जमा की गई है। 
 
हरियाणा में छह साल में 96% घटी पराली जलाने की घटनाएं

HR Breaking News (Haryana News) किसानों अब आमदनी बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के साथ अन्य खेती की ओर रूझान ले रहे हैं। जहां कभी पराली को फालतू समझ कर जला दिया जाता था। वहीं, आज पराली (Haryana News) किसानों की अतिरिक्त कमाई जरिया बन गई है। ऐसे में पराली जलाने की घटनाएं कम हो गई है। प्रदेश में बीते 6 सालों में पराली जलाने की घटनाओं में 96% की कमी आई है।

बाजार में पराली का भाव 


खेतों में धुएं के गुबार उठाने वाला यह कृषि अवशेष अब बिजली घरों, बायोगैस प्लांट (biogas plant), बायो सीएनजी, एथेनॉल, उद्योगों और पेपर मिलों के लिए बेशकीमती कच्चा माल बनकर उभर रहा है। किसान पराली की गांठे (straw bales) तैयार कर उद्योगों तक पहुंचा रहे हैं और 2500 से 8500 प्रति एकड़ तक कमाई कर रहे हैं। बाजार में इसका भाव 250 से 300 प्रति क्विंटल तक पहुंचा है।

 

पशुओं के लिए उपयोगी चारा बना पराली


प्रदेश में इस खरीफ सीजन तकरीबन 43.15 लाख एकड़ में धान की खेती (Paddy cultivation in Kharif season) की गई है। 6 साल पहले नवंबर के पहले पखवाड़े तक पराली जलाने के 1508 मामले दर्ज किए थे, जो अब कम होकर सिर्फ 42 रह गए हैं। 6 सालों में पराली जलाने की घटनाओं में 96.47 प्रतिशत की गिरावट आई है। व्यवसाय की साथ ही यह पशुओं के लिए उपयोगी चारा भी है।

पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) के वीएस के मुताबिक पराली में मौजूद फाइबर पशुओं कापाचन तंत्र बेहतर रखता है। हालांकि सिर्फ पराली खिलाने से दूध उत्पादन और सेहत पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इसे हरे चारे, भूसे और खनिज मिश्रण के साथ देना चाहिए।

 

6 सालों में पराली जलाने के मामले


पराली जलाने के 2021 में 1508 मामले (stubble burning cases) सामने आए थे। 2022 में 893, 2023 में 714, 2024 में 665, 2025 में 58, 2026 में 42 और 2021 की तुलना में देखे तो अब तक 96.47 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश में इस बार अब तक 42 स्थानों पर पराली जलाने को लेकर कृषि विभाग में रिपोर्ट दर्ज की गई है। खेतों में पराली को जलाने में पलवल 7 मामलों के साथ पहले नंबर पर रहा है और कैथल 5 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है।

किसान पर लगा इतना जुर्माना 


कैथल के नागल गांव में पराली जलाने की घटना (Stubble burning incident in Nagal village) के बाद किसान पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (Agriculture and Farmers Welfare Department) के डिप्टी डायरेक्टर का कहना है कि किसानों को फसल अवशेष खेत में मिलाने, गांठे बनाकर बेचने और मशीनों में खेत खाली करने के लिए ऑप्शन भी दिए गए हैं, जिसके लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, मल्चर, बेलर और रेक मशीनां का यूज बढ़ रहा है।