सरसों की RH 1975 और RHH 2101 किस्म के वितरण के लिए MOU साइन, प्रति एकड़ 15 क्विंटल होगा उत्पादन
Mustard Seed : किसानों के लिए सरसों की नई विकसित किस्म RH 1975 और RHH 2101 को किसानों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसको लेकर एचएयू ने निजी कंपनियों से एमओयू किया है। इस किस्म के उत्पादन से संबंधित जानकारी चलिए जानते हैं आगे विस्तार से।
HR Breaking News (Mustard Seed) : सरसों की उन्नत किस्म का बीज किसानों तक पहुंचाने के लिए एचएयू ने निजी कंपनियों के साथ एमओयू साइन किया है। विश्वविद्यालय ने RH 1975 और RHH 2101 के बीच उत्पादन और वितरण के लिए करनाल (karnal news) के घरौंडा स्थित साहिब सीड प्राइवेट लिमिटेड (Sahib Seed Private Limited) के साथ समझौता किया है। इससे इन किस्मों का बीज अधिक किसानों तक पहुंच सकेगा और उन्हें बेहतर उत्पादन लेने का अवसर मिलेगा।
कुलपति की मौजूदगी में हुए साइन (Mustard Seed kism)
विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज की मौजूदगी में हुए समझौते पर कंपनी के निर्देशक सुभाष खुराना और राज्य के अनुसंधान निदेशक डॉ.राजवीर गर्ग ने हस्ताक्षर किए कंपनी इन दोनों किस्म का बीज तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराएगी।
RH 1975 की प्रति एकड़ इतनी पैदावार
एचएयू के अनुसंधान के निदेशक डॉ. राजवीर गर्ग के अनुसार सरसों की RH1975 की औसत पैदावार 11 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है। जबकि इसकी उत्पादन क्षमता 14 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। इसमें तेल की मात्रा करीब 39.5 प्रतिशत है। अच्छी पैदावार और तेल की बेहतर मात्रा की के कारण यह किसानों को बेहद पसंद आ रही है।
RHH 2101 142 दिन में पककर तैयार (sarso ka behatr beej)
RHH 2101 किस्म लगभग 142 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। पौधों में शाखाएं अधिक निकालना और कलियों में दानों की संख्या ज्यादा होने से इसके उत्पादन क्षमता बेहतर रहती है। इसके इस किस्म में करीब 40 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
बिजाई के लिए उपयुक्त समय
विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर का दूसरा पखवाड़ा सरसों की बिजाई के लिए उपयुक्त है। किसान 31 अक्टूबर तक समय पर बिजाई कर सकते हैं। इसके बाद 10 नवंबर तक पर पछेती सरसों की बिजाई की जा सकती है। लेकिन देरी से बुवाई करने पर उत्पादन प्रभावित होने के आशंका रहती है।
समय पर बिजाई जरूरी
एचएयू के कृषि महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ.आरके पान्नू ने बताया कि पछेती फसल में सफेद रतुआ और चेपा जैसी समस्या का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा देर से बिजाई करने पर सरसों की पैदावार में करीब 25 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम और खेत की तैयारी के अनुसार समय पर बिजाई करनी चाहिए।
