matar ki kheti : मटर की खेती से तगड़ी कमाई, 55 से 60 दिन में हो जाएगी तैयार
matar ki kheti : आज आधुनिक युग में खेती करने के तौर तरीके भी बदल रहे हैं। अब किसान पारंपरिक खेती करने की बजाय कई अन्य फसलों की खेती कर अच्छा-खासा मुनाफा कमा रहे हैं। सब्जियों की बहुत सी ऐसी फैसले हैं, जो कम लागत और कम समय में तैयार हो जाती हैं। इनमें से मटर की खेती भी एक है। मटर की खेती से किसान तगड़ा मुनाफा ले रहे हैं। चलिए खबर में जानते हैं डिटेल से -
HR Breaking News - हरियाणा में किसान अब नरमा, कपास, धान, बाजरा और गेहूं की फसल तक सीमित नहीं है। किसान अब सब्जियों की खेती से भी अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। दरअसल पारंपरिक खेती की तुलना में कोई ऐसी फैसले हैं, जो कम लागत और कम समय में तैयार हो जाती हैं। हरियाणा के कई ऐसे किसान हैं, जो सब्जियों की फसल से तगड़ी कमाई कर रहे हैं। हरियाणा में धीरे-धीरे मटर की खेती का रकबा भी बढ़ रहा है।
हरियाणा में 18 से 20 हजार हेक्टेयर में होती है मटर की खेती -
किसानों के लिए मटर की खेती (matar ki kheti kaise karen) अब बेहद लाभकारी विकल्प बन रही है। अगेती मटर उगाने वाले किसानों को मंडी में इसके अच्छे खासे दाम मिलते हैं। हरियाणा में करीब 18,000 से 20,000 हेक्टेयर में मटर की खेती की जाती है। मुख्य रूप से कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला, पानीपत, यमुनानगर और सोनीपत जैसे जिलों में मटर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
मटर की अर्किल किस्म -
मटर की खेती (matar ki kheti) के लिए कई ऐसी लोकप्रिय किस्म है, जो बहुत जल्दी तैयार होती हैं। अर्किल मटर की सबसे लोकप्रिय किस्म है, जो बुवाई के 60 से 65 दिन में तैयार हो जाती है। इसकी फलियां लंबी, हरी और दोनों में मीठा से भरपूर होती हैं। इसके चलते बाजार में इसका अच्छा खासा भाव मिलता है।
काशी नंदिनी मटर किस्म
काशी नंदिनी मटर की किस्म (kashi nandini matar kism) भी काफी प्रमुख है। यह 60 से 65 दिन में तैयार होने वाली किस्म है। इसके प्रति एकड़ 40 से 45 किलोमीटर तक पैदावार मिल जाती है।
टर अगेती -6 किस्म -
मटर अगेती -6 यह किस्म (matar ageti -6 kism) उकठा रोग के प्रति प्रतिरोधी है और 55 से 60 दिन में पहली फली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। अन्य किस्म के मुकाबले इस किस्म में सबसे जल्दी फलियां आती हैं।
PB- 89 और आजाद P- 1 मटर किस्म -
PB- 89 और आजाद P- 1 प्रमुख सीजन की खेती (matar ki kism) के लिए यह किसी अच्छी है। यह 85 से 90 दिन में तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ इसकी 50 से 60 क्विंटल पैदावार होती है।
मटर की अगेती खेती का सही समय -
मटर की अगेती खेती (matar ki kheti) के लिए 20 अक्टूबर तक बुवाई का सही समय होता है। इस समय को सबसे उत्तम माना जाता है। मटर की बुवाई 20 अक्टूबर से 15 नवंबर तक की जा सकती है।
मटर की बुवाई के समय बरतें ये सावधानियां -
मटर की बुवाई करते समय (matar bijai ka samay) सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी गलती की वजह से पूरी फसल खराब हो सकती है। बिजाई के समय बीजों को फफूंदनाशक से उपचारित जरूर करें। इसके लिए थिरम या कैप्टान 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज में डालें।
इसके अलावा मटर के पौधे (matar ki kheti karne ka tarika) को ज्यादा पानी वाली जगह पर ने लगाई। क्योंकि पौधे के पास अधिक पानी या नामी रहने से वह खराब हो जाता है। खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था रखें।
अगर मटर की आगे की खेती कर रहे हैं तो प्रति एकड़ 35 से 40 किलोग्राम बीज डालें। वहीं अगर नवंबर में मटर की बुवाई कर रहे हैं तो 30 से 35 किलो बीज का प्रयोग करें।
