बेमौसम बारिश से हरियाणा में धान की फसल को 10% तक नुकसान
HR Breaking News (Paddy crop in Haryana) बेमौसम बारिश की वजह से हरियाणा में धान की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बारिश के चलते धान की फसल (Dhan Ki Fasal) को खेतों से लेकर मंडियों तक नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार इस बार हरियाणा में धान की फसल को 10% तक नुकसान हुआ है। ऐसे में आइए खबर में जानते हैं कि बारिश की वजह से किन फसलों को नुकसान हुआ है।
जानकारों ने कही ये बात
जानकारों का आकलन है कि बे-मौसम बारिश की वजह से खेतों में खड़ी धान (Dhan rate) की फसल गिरने और मंडियों में फसल भीगने से कुल उत्पादन का 8 से 10% का नुकसान हुआ है, जिससे लगभग 2264.6 करोड़ रुपए के नुकसान की संभावना है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से सेवानिवृत प्रधान वैज्ञानिक का कहना है कि प्रदेश में तकरीबन 25 लाख मीट्रिक टन बासमती और 61 लाख मीट्रिक टन गैर बासमती धान उत्पादन (Non-Basmati Rice Production) की संभावना है।
फसलों को तीन तरह का हुआ नुकसान
कुल 86 LMT धान में 8 से 10 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जो इलाके के मुताबिक कम या ज्यादा हो सकता है। उनका कहना है कि यह नुकसान तीन तरह का है। पहला खेत में फसल गिरने से, दूसरा जो फसल गिरी नहीं, लेकिन दाना झड़ गया और तीसरा मंडी में धान भीगने से हुआ है। मंडियों में धान भीगने से नमी की मात्रा बढ़ी है। कुछ जगह धान अंकुरित और काला पड़ गया है। ऐसे में लगभग 2 LMT बासमती और 6 LMT गैर बासमती धान (Non-Basmati Rice) पूरी तरह खराब हो गई है।
खेतों में नुकसान से कम हुआ उत्पादन
बासमती धान (basmati rice ke rate) प्रति क्विंटल 4000 रुपये के अनुसार लगभग 800 करोड़ रुपए और गैर बासमती धान में 2441 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से लगभग 1464.60 करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान है। डॉक्टर लाठर के मुताबिक खेतों में नुकसान से उत्पादन बहुत कम हुआ है। सरकार को बदले मौसम को लेकर दूरगामी फैसला लेना चाहिए। मंडियों में भीगी धान में नमी की तय सीमा 20 प्रतिशत करनी चाहिए।
मंडियों में अब तक चार बार भीगा धान
किसानों का कहना है कि अत्यधिक भीगे धान के लिए प्रोत्साहन राशि (Incentive amount for soaked paddy) तय होनी चाहिए। खेत में नुकसान होता तो कम या ज्यादा के मुताबिक राजस्व विभाग से जांच कर नुकसान की भरपाई होनी चाहिए। अब तक बे-मौसम बारिश से मंडियों में चार बार धान भीग गया है। 11 अक्टूबर को 4.31 LMT, 13 अक्टूबर को लगभग 8.72 LMT, 29 अक्टूबर को 2 LMT, 30 अक्टूबर को 42 क्विंटल धान भीगा है।
किसानों का धान बोरियों में पड़ा काला
भले ही खेतों में खड़ी फसल को नुकसान हुआ, लेकिन खेत से लेकर मंडियों तक धान को हुए नुकसान का सरकारी आकलन नहीं किया गया। मंडियों में सिर्फ फसल सुखाकर खरीद प्रोसेस की शुरुआत की गई। वहीं, कई किसानों का काफी मात्रा में धान बारिश के पानी के साथ बह गया, तो कुछ किसानों का धान बोरियों में काला पड़ गया।
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (Haryana State Agricultural Marketing Board) के अध्यक्ष का कहना है की बरसात से धान की फसल भीगने से अभी कोई ऐसा आकलन नहीं हुआ है कि कहीं ज्यादा नुकसान हुआ हो। जहां भी फसलें भीगी है, उन्हें सुखाकर खरीद कर उठान किया गया है।
खरीदा जा चुका धान ही अधिक भीगा
वहीं, हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के मुख्य सचिव का कहना है कि जो भी धान भीगा है, वह सुखाने के बाद खरीदा गया है। मंडियों में ज्यादातर खरीदा जा चुका धान भीगा है। नुकसान की सूचना नहीं है। खेतों में फसलों को नुकसान नहीं है। कुरुक्षेत्र के किसान का कहना है कि उनका धान अभी कटाई के लिए रह गया है। खेतों में पानी भरने और नमी की वजह से साधारण हार्वेस्टर से कटाई (Harvesting with conventional harvester) संभव नहीं हो पा रही है।
साधारण हार्वेस्टर से आता है इतना खर्चा
साधारण हार्वेस्टर से प्रति एकड़ 1800 से 2000 रुपये की लागत आती है। चैन के जरिए संचालित हार्वेस्टर पर प्रति एकड़ 3500 से 4500 रुपये का खर्चा आ रहा है। वह भी मिल नहीं रहा है। धान की पकी फसल खेत में ही गिरने लगी है, जिससे उत्पादन घटने का डर है। हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन (Haryana Rice Millers Association) के राज्य प्रधान का कहना है कि मंडियों में जो धान भीग गया है, उसकी चमक पर प्रभाव पड़ा है।
FCI नहीं लेता भीगी धान का चावल
बरसात से भीगी धान का चावल (soaked paddy rice) खाने लायक नहीं रहता है। ऐसे में उस चावल को FCI नहीं लेता है। मजबूरी में उस चावल को शराब, एथेनॉल, फीड फैक्ट्री में सस्ते दामों में बिक्री करनी पड़ती है। कई बार तो खरीदार भी नहीं मिलते हैं। दाम की बात करें तो जो सामग्री 40 रुपए में जानी चाहिए, वह 20 या 25 रुपये में बिकती है। दूसरा नुकसान यह है कि टूटा 25 प्रतिशत तक का चावल वापस लौटता है।
टूटे चावल की वापस की मात्रा
लेकिन दाना खराब होने से इसकी मात्रा 40 से 45 प्रतिशत तक होगी। ऐसे में 50 रुपये प्रति क्विंटल मजदूरी और 50 रुपये तक बिजली का खर्चा भी बढ़ जाएगा। ऐसे में हमने सरकार को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि धान की चमक की गुणवत्ता (Paddy luster quality) खराब होने पर 10 प्रतिशत की छूट दी जानी चाहिए, जो कि अभी 3 से 4 प्रतिशत तक है। टूटे चावल की वापस की यही मात्रा 40 से 45 प्रतिशत तक की जानी चाहिए। ऐसे में सरकार 1 क्विंटल में 60 किलोग्राम चावल वापसी का फैसला लें।
सरकार को तय करनी चाहिए प्रोत्साहन राशि
किसान संगठन ने यह दावा किया है कि खेतों से लेकर मंडियों तक किसानों की फसलों में नुकसान है। फिर भी कोई गौर नहीं कर रहा है। भारतीय कृषि यूनियन (Indian Agricultural Union) के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलें हवा से गिरने से नुकसान हुआ है। मंडियों में धान भीगने से चावल की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ा है। हर तरफ किसानों को ही नुकसान होता है। ऐसे में सरकार को इस साल और आगामी सालों के लिए ऐसे नुकसान के लिए प्रोत्साहन राशि को तय करना चाहिए।
जानिए क्या है सरकारी खरीद का मकसद
भारतीय किसान यूनियन के राज्य प्रधान और अखिल भारतीय किसान सभा (All India Kisan Sabha) के मास्टर का कहना है कि किसानों के नुकसान को लेकर सुनवाई नहीं की जा रही है। फसलों में नुकसान ना होता तो सरकारी खरीद का मकसद आसानी से पूरा हो सकता था। हरियाणा भू अभिलेख निदेशालय के निदेशक ने कहा है कि जब भी अत्यधिक बारिश होती है तो फसलों के नुकसान का आकलन कराया जाता है। अभी अधिक नुकसान की सूचना नहीं है, ऐसे में आकलन नहीं कराया गया है।
