8th Pay Commission : फिक्स मेडिकल अलाउंस को 20 गुणा बढ़ाने की मांग, जानें कर्मचारियों के लिए मुख्य अपडेट

8th Pay Commission : सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कर्मचारी संगठन की ओर से आठवें वेतन आयोग के तहत सामने रखी मांगो में फिक्स मेडिकल अलाउंस को बढ़ाने की मांग भी रखी गई है। उनका कहना है कि कर्मियों का फिक्स मेडिकल अलाउंस 20 गुणा बढ़ा दिया जाना चाहिए। खबर में जानिए इस बारे में विस्तार से-
 

HR Breaking News (8th Pay Commission) जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग का काम आगे बढ़ रहा है। वैसे -वैसे कर्मचारियों के बीच उम्मीदें भी लगातार बढ़ रही हैं। अब इस प्रोसेस के बीच कर्मियों (8th Pay Commission News)  के लिए बड़ा अपडेट सामने आया है। दरअसल, हाल ही में कर्मचारियों के संगठन ने सरकार के सामने अपनी मांगो में फिक्स मेडिकल अलाउंस में 20 गुणा इजाफे की मांग रखी है। 

 

 

कितना हो जाना चाहिए FMA


 सरकार के समक्ष एक प्रपोजल यह भी आया है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (fixed medical allowance) को प्रति महीना 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीने कर दिया जाना चाहिए और खासतौर पर उन कर्मियों ओर पेंशनर्स के लिए जो CGHS नेटवर्क के तहत कवर इलाको में नहीं रहते हैं। 


कर्मचारी संगठन ने बीते साल जनवरी में सरकार के सामने अपनी मांगे रखी थी, जब सरकार ने 8वें वेतन के गठन का ऐलान  (Announcement of 8th cpc) किया था। वित्त मंत्रालय ने भी नेशनल काउंसिल -जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी के स्टाफ साइड से टर्म्स ऑफ रेफरेंस (Terms of Reference) पर सुझाव की मांग की थी।

कब शुरू हुई थी ड्राफ्टिंग कमेटी 


स्टाफ साइड के अनुसार उनकी कई ऐसी जरूरी मांगे हैं, जिनको फाइनल ToR में नहीं जोड़ा गया था। फिटमेंट फैक्टर, OPS की बहाली और मेडिकल सुविधाओं (medical facilities) जैसे कई मामलों पर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी थी। 
बता दें कि जनसत्ता के सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक इन मांगों के एक चार्टर को फाइनल करने की प्रक्रिया राजधानी में NC-JCM ड्राफ्टिंग कमेटी (NC-JCM Drafting Committee) की एक सप्ताह तक चली मीटिंग में इसकी शुरुआत हुई, और ये मीटिंग 25 फरवरी को शुरू हुई थी। इस ड्राफ्ट में तकरीबन 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी कई मांगे शामिल है।


FMA बढ़ाने पर यूनियंस ने कही ये बात 


बता दें कि इन मांगो में सबसे बड़ी चर्चा मांग नॉन-CGHS एरिया (Non-CGHS Area) में फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (fixed medical allowance) को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति महीना करने की हो रही है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार मौजूदा मेडिकल महंगाई के हिसाब से देखे तो 1,000 रुपये की मौजूदा रकम बेहद कम है। यूनियंस का कहना है कि हेल्थ खर्च में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है। इस वजह से मेडिकल अलाउंस को भी उसी हिसाब से तय किया जाना चाहिए।


फिटमेंट फैक्टर को लेकर हुई अधिक चर्चा


अब कर्मचारियों की निगाहें आठवें वेतन आयोग (8th cpc) पर टिकी है। अगर सरकार द्वारा FMA को बढ़ाकर 20,000 रुपये करने की मांग स्वीकार कर ली जाती हैं, तो यह कर्मियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर सबसे अधिक बातचीत  होती है, लेकिन पिछले पैटर्न पर गौर करें तो अगर इस नंबर को देखा जाए इससे कर्मियो में भ्रम पैदा हो सकता है। कई सरकारी कर्मचारियों का मानना है कि अगर फिटमेंट फैक्टर (fitment factor) 2.5 या 2.8 हो जाता है तो कर्मियों की सैलरी 150 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाएगी। किंतु ये सही नहीं है।