{"vars":{"id": "93802:4123"}}

Indian Railway Fact : क्यों लगे होते हैं ट्रेनों की छत पर ढक्कन, जानिए इसका जवाब

अकसर आपने देखा होगा कि ट्रेन की छत पर गोल ढक्कन लगे होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये किस काम के होते हैं? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ये ढक्कन किस काम आते हैं। 

 

HR Breaking News (ब्यूरो)। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारतीय रेलवे (Indian Railway) को देश की लाइफ लाइन माना जाता है. रोजाना लाखों लोग ट्रेन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह सफर करते हैं. सफर के दौरान आपने गौर किया हो तो आपने देखा होगा कि ट्रेन के हर एक कोच में उसकी छत पर गोल-गोल डिब्बे जैसा कुछ बना होता है. क्या आप जानते हैं कि ट्रेन की छत पर बने उस बॉक्स का क्या काम होता है? आखिर रेलवे द्वारा क्यों यह बॉक्स बनाए जाते हैं? अगर नहीं, तो आइये आज हम आपको बताते हैं कि रेलवे आखिर इन बॉक्स को क्यों बनाता है.

ये भी पढ़ें : दो राज्यों के यात्रियों को रेलवे का तोहफा, आज से शुरू हुई ये नई स्पेशल ट्रेन

इस कारण से रेलवे द्वारा लगाए जाते हैं ये गोल ढक्कन


रेलवे द्वारा ट्रेन की छतों पर इन खास तरह की प्लेटों या गोल-गोल ढक्कनों को इसलिए लगाया जाता है ताकि ये रूफ वेंटिलेशन (Roof Ventilation) काम कर सके. दरअसल, ट्रेन के कोच में जब यात्रियों की संख्या ज्यादा हो जाती है, तो उस समय ट्रेन में गर्मी ज्यादा बढ़ जाती है. इस गर्मी और सफोकेशन के कारण बनने वाली भाप को ट्रेन से बाहर निकालने के लिए ट्रेन के कोच में यह खास व्यवस्था की जाती है. बता दें कि अगर ऐसा नहीं किया जाएगा, तो ट्रेन में यात्रियों के लिए सफर करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

जानें, कोच के अंदर क्यों लगी होती हैं जालियां


एक ओर जहां ट्रेनों की छतों पर ये गोल ढक्कन लगे होते हैं, तो वहीं कोच के भीतर छत पर एक जाली लगी होती है. कुछ ट्रेनों की कोच के भीतर जाली होती है तो वहीं कुछ के अंदर छेद होते हैं. इनकी मदद से कोच के भीतर की गर्म हवा और भाप बाहर निकलती है. आपको पता होगा कि गर्म हवाएं हमेशा ऊपर की ओर उठती हैं, इसलिए कोच के अंदर छतों पर छेद वाली प्लेटें लगाई जाती हैं.

ये भी पढ़ें : सरकार ने DRM का ये अधिकार लिया वापिस, प्लेटफॉर्म में नहीं कर सकेंगे ये काम

एक वजह ये भी है


ट्रेन में इन प्लेटों और जाली को लगाने की एक और वजह भी है. इन प्लेट के जरिए कोच के भीतर की गर्म हवा तो बाहर होती ही है, लेकिन साथ ही बारिश का पानी भी कोच के अंदर नहीं आता है.