Supreme Court : बिना कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाए कैसे हटा सकते हैं जमीन से अवैध कब्जा, सुप्रीम कोर्ट ने दी जानकारी
HR Breaking News - (Supreme Court latest update)। आए दिन हमारे सामने कई ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जिसमें प्रॉपर्टी के अवैध कब्जे की बात होती है। पिछले कुछ सालों से प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जे (illegal possession rules in india) के मामले काफी ज्यादा बढ़ गए है। इस वजह से मामले की सुनवाई करते-करते कोर्ट को सालों लग जाते हैं लेकिन इसके बाद भी इंसाफ नहीं हो पाता। ऐसे में कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाए बिना भी आप प्रॉपर्टी (Property Knowledge) के ऊपर अवैध कब्जा को रोक सकते हैं। ये तरीका खुद सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाल ही के फैसले में बताया है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में।
सुप्रीम कोर्ट सुनाया बड़ा फैसला-
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाल ही में प्रॉपर्टी (how to protect your property) पर अवैध कब्जे के संबंध में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसले में बताया कि आप अपनी प्रॉपर्टी से कब्जाधारी को बिना अदालत की मदद से कब्जे को हटा सकते हैं। मामले में पूनाराम बनाम मोती राम मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (how to protect your land from illegal possession) ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति किसी अन्य की संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करके ऊसपर अपना दावा नहीं कर सकता है।
न्यायिक हस्तक्षेप के बिना भी हटा सकते हैं कब्जा-
अगर आपकी प्रॉपर्टी पर कोई व्यक्ति कब्जा (illegal possession rules) कर लेता है तो इस परिस्थिति में पीड़ित पक्ष स्वयं कानूनी प्रावधान के मुताबिक या फिर शासकीय सहयोग से या न्यायिक हस्तक्षेप को करके उस कब्जे को हटा सकता है. हालांकि, यह जरूरी है कि आप उस प्रॉपर्टी (property rules in india) के वैध मालिक हों और उसकी टाइटल को अपने नाम पर कर लें।
12 साल के बाद भी हटाया जा सकता है कब्जा-
सुप्रीम कोर्ट ने पूना राम बनाम मोती राम (Poona Ram vs Moti Ram land dispute) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्पष्ट किया है कि अगर आपके पास प्रॉपर्टी का टाइटल (Title of the property) है, तो आप 12 साल बाद भी शासकीय सहयोग से अपनी प्रॉपर्टी से कब्जा (possession from your property) को हटवा सकते है। इसके लिए आपके अदालत में भी मुकदमें को दायर करने की कोई जरूरत नहीं होती है।
इस सेक्शन के तहत होगी कार्रवाई-
वहीं दूसरी ओर अगर आपके पास प्रॉपर्टी की टाइटल नहीं हैं और कब्जा भी 12 साल से ज्यादा समय से हैं तो आपको अदालत में केस करना होता है। इस तरह के मामलों के लिए स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट 1963 (Specific Relief Act 1963) बनाया गया है। प्रॉपर्टी से अवैध कब्जे को हटाने के लिए स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट (illegal occupation from property) की धारा 5 में प्रावधान किया गया है। हालांकि, प्रॉपर्टी विवाद (Property Disputes) के मामले में पहले स्टे प्राप्त करना चाहिए, ताकि कब्जा करने वाला व्यक्ति उस प्रॉपर्टी पर कोई निर्माण न कर सके या उसे बेच न सके।
जानिये क्या है धारा 5-
स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट की धारा 5 (act 5 kya h) के मुताबिक अगर आपके पास प्रॉपर्टी का टाइटल नहीं हैं और किसी ने उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, तो आप उसे खाली कराने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC kya hota h) के तहत अदालत में मुकदमे को दायर कर सकते हैं।
जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर ये हैं नियम-
जानकारी के लिए बता दें कि ये मामला राजस्थान के बाड़मेर जिले के पूना राम से जुड़ा हुआ है, मामले के दौरान 1966 में एक जागीरदार से कई अलग-अलग जगहों पर जमीन (property dispute) को खरीदा गया था। ऐसे में जब पूना राम ने जमीन पर मालिकाना हक का दावा किया, तो उसे पता चला कि उस जमीन पर मोती राम नामक व्यक्ति का कब्जा हुआ है। हालांकि मोती राम के पास जमीन (protect your land) के कोई कानूनी दस्तावेज मौजूद नहीं था।
राजस्थान हाई कोर्ट का मामला-
इस मामले पर पूना राम ने कब्जा छुड़ाने (property se kabja kaise chudae) के लिए कोर्ट में याचिका को दायर कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने पूना राम के पक्ष में फैसले को सुनाते हुए मोती राम को जमीन खाली करने के लिए आदेश दिया था। हालांकि मोती राम ने इस फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) में अपील को दायर किया था। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए मोती राम के कब्जे को वैध ठहराया। इसके बाद पूना राम ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील को दायर कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात-
सुप्रीम कोर्ट ने पूना राम के पक्ष में फैसले को सुनाते हुए बताया कि जिस व्यक्ति के पास जमीन (how to take possessed property back) का टाइटल होता है वह शासकीय सहयोग से कब्जे (property rules) को छुड़वा सकता है। भले ही कब्जा 12 साल पुराना ही क्यों न हो। मोती राम ने मामले के दौरान तर्क देते हुए कहा था कि उसका 12 साल से ज्यादा समय से जमीन पर कब्जा है और लिमिटेशन एक्ट की धारा 64 (Section 64 of the Limitation Act) के मुताबिक ऐसे मामलों में कब्जे को हटाया नहीं जा सकता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए बताया कि यह कानून सिर्फ उन जमीनों पर लागू होता है जिनका कोई मालिक नहीं होता।