Haryana में बनेगा एक और एयरपोर्ट, 600 एकड़ में होगा विकसित

Haryana News : हरियाणा में प्रगति कार्य लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। यहां पर अब सरकार ने एक और एयरपोर्ट को बनाने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है। इसकी वजह से राज्य में प्रगति कार्य (new airport) को रफ्तार मिल रही है। साथ ही में 600 एकड़ भूमि को विकसित किया जाने वाला है। आज हम आपको इस खबर के माध्यम से इस बारे में पूरी जानकरी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस बारे में।

 

HR Breaking News (new airport in Haryana) हरियाणा राज्य के विकास को अब पंख लगने वाले हैं। सरकार कई बड़े डेवलपमेंट के काम कर रही है। यहां पर अब हवाई यातायात (Haryana news) की व्यवस्था को और भी ज्यादा सुगम करने के लिए सरकार ने एक नए एयरपोर्ट को बनाने की तैयारी कर ली है। ये नया एयरपोर्ट 600 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। चलिये खबर के माध्यम से जानते हैं कि ये एयरपोर्ट कहां पर बनाया जाएगा।

 

 


नेवल हवाई पट्टी का होगा विस्तार 

लगभग दो दशक से ज्यादा समय से करनाल की नेवल हवाई पट्टी के विस्तार और इसे ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट में विकसित करने की मांग उठ रही है। औद्योगिक संगठनों, निर्यातकों, व्यापार मंडलों और जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर सरकार (Government latest Update) के समक्ष यह मुद्दा रखा जा रहा है। अब प्रदेश सरकार के बजट में 600 एकड़ भूमि पर ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की घोषणा ने इस लंबे इंतजार को उम्मीद में बदल रहे हैं।


सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा 

इसको जिले के लिए अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा माना जा रही है। इसके साथ ही हसनपुर में 100 एकड़ भूमि पर 50 करोड़ रुपये की लागत से डियर पार्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। प्राकृतिक या जैविक खेती (organic farming) करने वाले किसानों को अपनी उपज सीधे बेचने के लिए मंडियों में अलग से स्थान निर्धारित किया जाएगा। एग्रो माल में आठ करोड़ रुपये की लागत से एनएबीएल प्रमाणित दूध एवं खाद्य पदार्थ परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की घोषणा से करनाल के विकास को गति मिलेगी। करनाल की पहचान देश-विदेश में बासमती चावल (basmati rice) के उत्पादन और निर्यात के लिए है। इसके साथ ही में यहां पर औद्योगिक क्षेत्र, डेयरी, मत्स्य पालन और शैक्षणिक संस्थानों का लगातार विस्तार किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते कारोबारी परिवेश को देखते हुए एयर कनेक्टिविटी समय की मांग बनकर सामने आ रही थी।

ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण होने से होगा ये लाभ 

- बासमती और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को गति मिलेगी।
- साथ ही में औद्योगिक निवेशकों के लिए करनाल आकर्षक गंतव्य (Karnal attractive destination) बनकर सामने आएगा।
- मेडिकल और शैक्षणिक आपात स्थितियों में त्वरित हवाई सुविधा उपलब्ध होने वाली है।
- पर्यटन और सेवा क्षेत्र को नई दिशा मिलने वाली है।

स्थानीय स्तर पर एयरपोर्ट की मांग 

स्थानीय स्तर पर एयरपोर्ट की मांग 2000 के दशक की शुरुआत में तेजी दर्ज की जा रही है। साथ ही में जब करनाल का औद्योगिक और कृषि उत्पादन राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा था। नेवल हवाई पट्टी (naval airstrip) के सीमित उपयोग को देखते हुए इसे विस्तारित कर नागरिक उड्डयन के लिए विकसित करने का प्रस्ताव बार-बार उठाया जा रहा है। विभिन्न मंचों पर ज्ञापन सौंपे गए और सर्वे की चर्चाएं भी की जा रही है। हालांकि ठोस घोषणा अब जाकर बजट में सामने आई है।


इन चुनौतियों का करना पड़ा सामना 

घोषणा के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और तकनीकी सर्वेक्षण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की होने वाली है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पारदर्शी (New Airport in Haryana) और तेज कार्यप्रणाली अपनाया जा रहा है। तो ये परियोजना करनाल की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। एयरपोर्ट परियोजना को जिले के विकास की रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है। ये सिर्फ परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि औद्योगिक, कृषि और सेवा क्षेत्र की संभावनाओं को पंख देने वाली पहल भी होगी।


100 एकड़ भूमि पर 50 करोड़ रुपये की लागत 

घरौंडा क्षेत्र के हसनपुर में 100 एकड़ भूमि पर 50 करोड़ रुपये की लागत से डियर पार्क विकसित किया जाने वाला है। इसकी वजह से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वन्य प्राणी विभाग की देखरेख में इस प्रोजेक्ट (Airport Project) को सिरे चढ़ाया जाएगा। सरकार का मानना है कि जीटी रोड बेल्ट पर ये आधुनिक डियर पार्क आकर्षण का केंद्र बनकर सामने आएगा। जोकि पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करेगा।


जैविक और प्राकृतिक फसलों को मिलेगा बढ़ावा 

मंडियों में जैविक और प्राकृतिक फसलों के लिए अलग स्थान निर्धारित करने का निर्णय किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए सकारात्मक कदम बनकर सामने आएगा। इससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों (Update for farmers) को पारंपरिक फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा में दबने के बजाय अपनी उपज की अलग पहचान और बेहतर मूल्य मिल सकेंगे। अलग प्लेटफार्म होने से खरीदारों को प्रमाणित जैविक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इसकी वजह से विश्वास बढ़ेगा। साथ ही में बिचौलियों की भूमिका कम होकर किसान सीधे उपभोक्ताओं या थोक खरीदारों से जुड़ सकते हैं।


आठ करोड़ रुपये की आएगी लागत 

करनाल एग्रो माल में आठ करोड़ रुपये की लागत से एनएबीएल प्रमाणित दूध एवं खाद्य पदार्थ परीक्षण लैब की स्थापना गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आएगा। इससे स्थानीय डेयरी और खाद्य उत्पादों की वैज्ञानिक जांच संभव होगी, मिलावट और मानक उल्लंघन पर अंकुश लगेगा। एनएबीएल प्रमाणन से रिपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे निर्यात और बड़े रिटेल नेटवर्क में प्रवेश आसान हो जाएगा। ये पहल उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उत्पादकों की साख दोनों को मजबूत करेगी।


त्वरित निर्णय क्षमता होगी मजबूत 

नगर निगम में पार्षद आपातकालीन फंड का गठन स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाला है। अक्सर छोटी लेकिन जरूरी समस्याएं जैसे टूटी सड़क, जल निकासी बाधा या स्ट्रीट लाइट खराब होना, बजटीय स्वीकृति (budgetary approval) के इंतजार में लंबित रहती हैं। इस फंड से पार्षद सीमित दायरे में तुरंत कार्य करा सकेंगे। हालांकि पारदर्शिता, स्पष्ट दिशा-निर्देश और आडिट व्यवस्था जरूरी हो जाएगी। तभी ये पहल वास्तव में जनहित में प्रभावी साबित होने वाली है।

किसानों के लिए जारी अपडेट 

प्रदेश सरकार ने करनाल में आधुनिक मत्स्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की भी घोषणा की जा रही है। जिले में रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रजातियों का उत्पादन बढ़ रहा है, हालांकि प्रोसेसिंग और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी की वजह से किसानों को कच्ची मछली ही बेचनी पड़ जाती थी। नई इकाई में सफाई, ग्रेडिंग, फ्रीजिंग और पैकेजिंग की आधुनिक व्यवस्था होगी, इसकी वजह से वैल्यू एडिशन के साथ निर्यात के अवसर बढ़ेंगे और मत्स्य पालकों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।


अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला होगी स्थापित 

घरौंडा में कीटनाशक अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने की बजट घोषणा से कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलने वाली है। धान और बासमती उत्पादन के लिए पहचान रखने वाला करनाल अब गुणवत्ता जांच के मामले में भी अब मजबूत हो जाएंगे। फिलहाल किसानों (Update for farmers) को फसलों में कीटनाशक अवशेष की जांच के लिए नमूने दूर स्थित लैब में भेजने पड़ते थे, इसकी वजह से समय और खर्च दोनों बढ़ जाता था। घरौंडा में प्रयोगशाला बनने से ये प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर तेज और सुलभ हो सकेगी।