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हरियाणा की 40% पंचायते संभालेंगी पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी

Haryana Gram Panchayats: हरियाणा में अब गांव की पेयजल व्यवस्था के प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका अहम रहने वाली है और पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी को पंचायतें (Haryana Gram Panchayats) को सौंपने की प्रक्रिया तेज हो गई है। लगभग 40 प्रतिशत पंचायतें पेयजल व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली है। इसके लिए व्यवस्था की जा रही है। खबर में जानिए किन गांव की पंचायते पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली है। 
 
हरियाणा की 40% पंचायते संभालेंगी पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी

HR Breaking News (Haryana News) हरियाणा के कई गांवों में गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था (Drinking water supply system in Haryana) को ग्राम पंचायतों को सौंपने की तैयारी तेज हो गई है। अब 40% पंचायते प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली है। इससे पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार आएगा। खबर में जानिए इस बारे में विस्तार से-

सहमति देने के मामले में कुरुक्षेत्र टॉप पर 


जल अर्पण मॉड्यूल के तहत जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग (Public Health and Engineering Department) की ओर से अगले दो महीने में इस कार्य को पूरा किया जाएगा। हरियाणा की 6600 ग्राम पंचायतों में से 2658 ने नई व्यवस्था अपनाने पर सहमति जताई है। यानी लगभग 40 प्रतिशत पंचायतें पेयजल व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली है। सहमति देने के मामले में सीएम नायब सिंह सैनी का गृह जिला (Home district of CM Nayab Singh Saini) कुरुक्षेत्र सबसे आगे है।

 

गुरुग्राम में 19 पंचायतें हुई तैयार 


वहीं, गुरुग्राम सबसे पीछे है। कुरुक्षेत्र की 420 में से 295 पंचायतों ने जिम्मा संभालने को लेकर सहमति दी है। गुरुग्राम की 173 में से सिर्फ 19 पंचायतें ही तैयार हुई हैं। हांसी-हिसार के साथ ही प्रदेश के 22 जिलों में से 12 ऐसे हैं, जहां सहमति देने वाली पंचायतों की संख्या 100 तक नहीं पहुंची है और बाकी के जिलों में 100 से ज्यादा पंचायतों की ओर से नई व्यवस्था (New arrangements by Panchayats) अपनाने पर सहमति जताई गई है।

 

पेयजल योजनाओं का परीक्षण 


रेडी फॉर जल अर्पण मॉड्यूल (Ready for Jal Arpan Module) में वो गांव शामिल है, जहां सभी पेयजल योजनाओं का भौतिक काम पूरा होने के साथ ही उन्हें चालू भी किया गया है और गांव जल अर्पण के लिए भी तैयार है। जल अर्पण एंट्री फेज में उन गांवों को शामिल किया है, जहां मॉडयूल में जानकारी भरने का प्रोसेस शुरू हो गया है। ट्रायल रन पूरा करने में वो गांव हैं, जहां जल अर्पण एंट्री शुरू होते ही पेयजल योजनाओं का परीक्षण (drinking water schemes) पूरा किया गया है।

बता दें कि गांव की पेयजल व्यवस्था के प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका अब अहम रहने वाली है और पानी की टंकी, पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं के रखरखाव की स्थानीय स्तर पर जिम्मा तय होगा। योजना के ट्रांस्फर के प्रोसेस का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा और ग्रामीणों की भागीदारी से गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

ग्रामीण पेयजल योजनाओं की जांच 


बता दें कि जल अर्पण मॉड्यूल जल जीवन मिशन (Jal Arpan Module Jal Jeevan Mission) के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल योजनाओं की जांच, डिजिटल वैरिफिकेशन और उन्हें ग्राम पंचायतों को सौंपने का प्रोसेस ऑनलाइन दर्ज करने वाली व्यवस्था है। इसके पीछे प्रशासन का मकसद गांवों में नल से जलापूर्ति की योजनाएं को चालू करना है। 

जिला सलाहकार ने कही ये बात 


जल स्वच्छता एवं सहयोग संगठन के जिला सलाहकार का कहना है कि पेयजल व्यवस्था का जिम्मा (responsible for drinking water supply) पंचायतों को सौंपने का प्रोसेस अभी जारी है और हिसार व हांसी में 40 ग्राम पंचायतों के साथ जनस्वास्थ्य विभाग का MOU हो गया है और पेयजल व्यवस्था से जुड़े कामकाज के लिए पंचायतों को ग्रांट दिए जाने की तैयारी की जा रही है।

जिले में जिम्मा संभालने वाले कुल गावं

रेवाड़ी 97
यमुनानगर 275
फतेहाबाद 228
महेंद्रगढ़ 96
करनाल 91
सिरसा 209
अंबाला 84 
हिसार 178
फरीदाबाद   59
पानीपत 154
भिवानी 58
नूंह 151
कैथल 149
पंचकूला 49
झज्जर 55
जींद 143
रोहतक 35
कुरुक्षेत्र 295
चरखी दादरी 31
सोनीपत 99

गुरुग्राम

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