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Rajasthan में बनेगा नया लिंक एक्सप्रेसवे, इन 7 जिलों के 200 गांवों से रूट फाइनल, होगा भूमि अधिग्रहण

Rajasthan - राजस्थान में कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आपको बता दें कि नए लिंक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का रूट तय कर लिया गया है, जो राज्य के 7 जिलों के 200 से ज्यादा गांवों से होकर गुजरेगा। इस परियोजना के तहत जल्द ही भूमि अधिग्रहण (Land acquisition) की प्रक्रिया शुरू होने वाली है, जिससे विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है-
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Rajasthan में बनेगा नया लिंक एक्सप्रेसवे, इन 7 जिलों के 200 गांवों से रूट फाइनल, होगा भूमि अधिग्रहण

HR Breaking News, Digital Desk- (Rajasthan) राजस्थान को कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने जा रही है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को बालोतरा के पास से गुजर रहे जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे (Jamnagar-Amritsar Expressway) से जोड़ने के लिए एक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (new greenfield expressway) प्रस्तावित है।

यह कॉरिडोर जयपुर के बेहद करीब से गुजरेगा, जिससे पिंक सिटी के दक्षिणी इलाकों (Southern areas of the Pink City) में विकास को नई गति मिलेगी। इस परियोजना से पचपदरा रिफाइनरी की दूरी करीब 100 किलोमीटर घटेगी और यात्रा का समय 2 से 3 घंटे तक कम हो जाएगा।

नया एक्सप्रेसवे दौसा-लालसोट एक्सप्रेसवे (New Expressway Dausa-Lalsot Expressway) के इंटरचेंज प्वाइंट अरण्य कलां से शुरू होगा। यह ग्रीन कॉरिडोर के रूप में जयपुर के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरेगा। मौजूदा अलाइनमेंट के अनुसार टोंक रोड पर इसकी दूरी जयपुर रिंग रोड से करीब 9-10 किलोमीटर रहेगी। यह एक्सप्रेसवे जयपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा और बाड़मेर समेत 7 जिलों को जोड़ेगा और अंत में बालोतरा के पटाऊ खुर्द के पास जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे (Jamnagar–Amritsar Expressway) से जुड़ेगा। इसकी कुल लंबाई करीब 400 किलोमीटर होगी।

जयपुर जिले में यह एक्सप्रेसवे कोटखावदा, चाकसू, वाटिका, तूंगा, रेनवाल मांझी, फागी, मौजमाबाद, दूदू और साखून सहित 200 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। जिले में इसका दायरा करीब 110 किलोमीटर का होगा, जिससे जयपुर-टोंक और जयपुर-अजमेर हाईवे (Jaipur-Ajmer Highway) सीधे कनेक्ट हो जाएंगे। इसके अलावा यह पुष्कर-मेड़ता मार्ग, एनएच-25 (बाड़मेर-ब्यावर) और एनएच-62 (पिंडवाड़ा) से भी जुड़ेगा। फिलहाल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) से बालोतरा-पचपदरा जाने वाले वाहनों को जयपुर, अजमेर, ब्यावर और जोधपुर होते हुए कई व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों (national highways) से गुजरना पड़ता है, जिसमें 10 घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है।

नया ग्रीन कॉरिडोर (New green corridor) बनने से दूरी करीब 100 किलोमीटर तक घटेगी और यात्रा के समय में बड़ी बचत होगी। यह प्रोजेक्ट खास तौर पर पचपदरा रिफाइनरी और बाड़मेर क्षेत्र के औद्योगिक विकास (industrial development) के लिए अहम माना जा रहा है। फिलहाल एनएचएआई इस परियोजना की डीपीआर (DPR) तैयार कर रहा है। मंजूरी मिलते ही जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी जिलेवार संबंधित कलेक्टरों की होगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह परियोजना राजस्थान के उन प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (greenfiled expressway) में शामिल है, जिन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह नया कॉरिडोर न सिर्फ यातायात को आसान बनाएगा, बल्कि जयपुर के दक्षिणी इलाकों में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। चाकसू, कोटखावदा और फागी जैसे क्षेत्रों में संपत्ति की कीमतों में तेजी (property price hike) आने की उम्मीद है। साथ ही, यह दिल्ली-मुंबई और जामनगर-अमृतसर जैसे बड़े आर्थिक कॉरिडोर (Major economic corridors like Jamnagar-Amritsar) को जोड़कर उत्तर भारत से पश्चिमी बंदरगाहों (North India to Western Ports) तक माल ढुलाई को और तेज करेगा। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर खासा उत्साह है। चाकसू के एक व्यापारी का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने से जयपुर से जोधपुर और बाड़मेर की यात्रा कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगी। कोटखावदा के एक किसान नेता के मुताबिक, इस परियोजना से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राजस्थान सरकार और एनएचएआई इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता पर ले रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) की हालिया समीक्षा बैठक में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। लोगों का मानना है कि यह कॉरिडोर राजस्थान को देश के प्रमुख आर्थिक गलियारों से जोड़कर राज्य की जीडीपी (GDP) को मजबूती देगा।

इस परियोजना से जुड़े गांवों में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तय की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे को ग्रीन कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें वन्यजीव क्रॉसिंग और बड़े पैमाने पर पौधरोपण की योजना (tree planting plan) शामिल है। यह नया एक्सप्रेसवे जयपुर सहित पूरे शेखावाटी और मारवाड़ क्षेत्र (Marwar region) के लिए विकास की नई इबारत लिखेगा। दिल्ली से गुजरात और पंजाब तक कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।