ento ka rate : घर बनाना होगा महंगा, कोयले की कीमत बढ़ी, ईंटों के दामों में तेजी की आशंका
bricks ka kya rate hai :घर बनाना अब लगातार मुश्किल होता जा रहा है। कोयले की कीमतें बढ़ने के कारण अब ईंटों के दामों में तेजी देखने को मिल सकती है। पिछले सालों में भी ईंटो (ento ka rate) के दाम लगातार बढ़े हैं। जिसके कारण ब्रिक्स एसोसिएसन (BRICS Association news)भी बढ़ते दामों को लेकर बैठक कर रही है। चलिए जानते हैं ईंटों के दामों में बढ़ोतरी के कारण आदि पूरी जानकारी विस्तार से।
HR Breaking News (ento ka rate) : देश में लगातार बढ़ रही महंगाई का असर ईट भट्ठा उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले 4 सालों में बाजार में कोयले के रेट 15000 से बढ़कर 26000 तक पहुंच गए हैं। बढ़ते कोयलों के दामों के चलते ईट भट्ठा एसोसिएशन ईंटो के रेट बढ़ाने पर विचार कर रही है। संगठनों की माने तो आने वाले समय में 1000 ईंटों की कीमत 9500 से बढ़ाकर 10000 तक पहुंच सकती है। ईंटों के रेटों (ento ke rate) की बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ेगा। पहले ही महंगाई के दौर में आम नागरिक के लिए घर बनाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अगर ईंटों के रेट बढ़ते हैं तो घर बनाना पहुंच से बाहर हो जाएगा।
जून माह से लगातार बढ़ रहे कोयले के दाम (bricks ke rate)
भट्ठा संचालकों की माने तो जून माह से लगातार कोयले के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। कोयला गुजरात और गांधी नगर से आता है। एक टन कोयला लाने में करीब 3000 रुपये किराया देना पड़ता है। संचालकों का यह भी कहना है कि कोयले के रेट बढ़ने के बावजूद भी आसानी से कोयला नहीं मिल रहा है।
कम बारिश का असर (latest bricks rate)
इस सीजन हिसार, सिरसा (sirsa news), भिवानी (bhiwani news), महेंद्रगढ़ और चरखी दादरी जिलों में बारिश कम होने के कारण मूंग और गवार की पैदावार कम हुई है। जिसके चलते उत्पादन भी कम हुआ है। इन फसलों से निकलने वाला कृषि अपशिष्ट भी कम मिलने की संभावना है। वहीं सरकार की और से ईंट धान प्रराली के पैलेट के इस्तेमाल का प्रतिशत भी बब्ढ़ा दिया है। 2025 में 20 प्रतिशत के नियम को अब 30 प्रतिशत कर दिया है।
मिट्टी के दामों में भी हुई बढ़ोतरी (soil rates)
कोयले पर जीएसटी (GST on coal) कि दर पहले 5 प्रतिशत थी जिसे बाद में 12 और 18 प्रतिशत किया गया। संचालन के अनुसार जीएसटी के साथ परिवहन खर्च बढ़ने से कोयले की वास्तविक लागत लगातार ऊपर जा रही है। दूसरी और मिट्टी के रेट में भी पिछले साल की तुलना में करीब 30000 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। मजदूरी महंगी होने से खर्च और बढ़ गया है ।
लागत निकालना मुश्किल हो रहा (hisar int-bhattha association)
हिसार ईंट-भट्ठा एसोसिएसन के चेयरमैन राजबीर सिंह बूरा (hisar int-bhattha association ke Chairman Rajbir Singh Bura) ने बताया कि पिछले कुछ महीनो में कोयले के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिससे मिट्टी, मजदूरी और कोयले तीनों की लागत बढ़ने से 1 हजार ईंटों को तैयार करने का खर्च 8500 रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में इससे कम कीमत पर ईंट बेचने पर भट्ठा संचालकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।
| ईंटो की कीमत | |
|---|---|
| ईंटो की कैटेगरी | कीमत |
| 1 नंबर की ईंट | 7500-9000 |
| डेढ़ से 2 नंबर की ईंट | 5500-7000 |
| 3 नंबर की ईंट | 4000-4200 |
| चटका ईंट | 2000 पर ट्रक |
| ईंट के टुकड़े | 4000 पर ट्राली |
