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Hiteach Railway Station: हरियाणा के रेलवे स्टेशनों को किया जाएगा हाईटेक, एलईडी लगाने पर हो रहा है काम

रेलवे यात्रियों की सुविधाओं को ओर बेहतर बनाने के लिए हरियाणा के रेलवे स्टेशनों को हाईटेक किया जा रहा है। आइए जानते है क्या है लेटेस्ट अपडेट
 
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Hiteach Railway Station: हरियाणा के रेलवे स्टेशनों को किया जाएगा हाईटेक, एलईडी लगाने पर हो रहा है काम

HR Breaking News, डिजिटल डेस्क नई दिल्ली, हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर जल्द ही एलईडी पर यात्रियों को विज्ञापन दिखाई देंगे। इसके लिए रेलवे ने तैयारी की है और इसके लिए एक निजी एजेंसी को ठेका भी सौंपा है। अंबाला, चंडीगढ़ और शिमला स्टेशन पर फिलहाल यह एलईडी लगाई जाएगी। अंबाला कैंट स्टेशन पर यह एलईडी लगाने का काम शुरू हो चुका है।


एलईडी लगाने का काम शुरू
कंपनी प्रतिनिधि की मानें, तो तीन स्टेशनों पर यह लगाने के बाद आगामी प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। अंबाला प्लेटफार्म नंबर एक पर यह एलईडी लगाई जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार रेलवे ने अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए अब स्टेशनों पर एलईडी लगाने की प्रक्रिया को शुरू किया है। अंबाला में जहां 60 एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी, वहीं चंडीगढ़ स्टेशन पर 129 तथा शिमला स्टेशन पर 6 लगाए जाएंगी।

हाईटेक होंगे रेलवे स्टेशन
कंपनी प्रतिनिधि की मानें, तो इन एलईडी स्क्रीन पर पचास प्रतिशत रेलवे का टाइम टेबल आदि दिखाया जाएगा, जबकि इसके अलावा आधे समय में विज्ञापन दिए जाएंगे। बताया जाता है कि इन विज्ञापनों की रेलवे फीस भी लेगा। इससे रेलवे की आमदनी भी बढ़ेगी। माना जा रहा है कि यह यात्रियों के लिए जहां सुविधाजनक रहेगा, वहीं कारोबारियों को भी विज्ञापन प्रसारित करने का मौका मिलेगा और उनको भी इसका फायदा मिलेगा। अभी अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर यह एलईडी स्क्रीन लगाने का काम किया जा रहा है।


हाइड्रोडन रेल परियोजना की दिशा में बड़ा कदम
अंबाला, जागरण संवाददाता। देश में हाइड्रोजन रेल परियोजना की दिशा में रेलवे ने बड़ा कदम उठाते हुए डीजल इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट यानी डीईएमयू ट्रेनों को ग्रीन ट्रेनों से बदलने की तैयारी की है। हरियाणा के जींद में 61 करोड़ की लागत से हाइड्रोजन जनरेशन एंड प्लांट तैयार किया जा रहा है। दिसंबर 2023 तक प्लांट को तैयार कर लिया जाएगा।जनवरी 2024 में जींद से सोनीपत के बीच दौड़ रही डीईएमयू ट्रेन की जगह हाइड्रोजन ट्रेन ले लेगी।


दिल्ली शकूरबस्ती में 25-25 करोड़ की लागत से दो हाइड्रोजन इंजन तैयार किए जा रहे हैं। इस परियोजना से रेलवे का जहां खर्चा बचेगा, वहीं प्रदूषण भी कम होगा। पहली ट्रेन दस डिब्बों वाली होगी, जिसकी खासियत होगी कि यह धुआं नहीं छोड़ेगी। 89 किलोमीटर यह ट्रेन पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दौड़ेगी और डिब्बों को सिर्फ मॉडिफाई किया जाएगा, जबकि नए डिब्बों का निर्माण नहीं होगा। हाइड्रोजन इंजन तैयार करने के बाद डीईएमयू ट्रेनों को हटाकर यह ट्रेनें चलाई जाएंगी।


इस तरह से है प्रस्ताव
डीईएमयू के पीछे जितने डिब्बे लगे हुए हैं, उनको अभी नहीं बदला जाएगा। इन डिब्बों को मॉडिफाई कर दिया जाएगा ताकि हाइड्रोजन इंजन इन डिब्बों को खींच सके। इस ट्रेन में जहां डीजल इंजन को बदला जाएगा। इसी तरह अल्टरनेटर, रेडिएटर, सहायक जनरेटर, फ्यूल टैंक, पाइपिंग, वीसीयू, बैटरी, इनवर्टर सहित पैसेंजर सुविधाओं को बदला जाएगा। प्रारंभिक चरण में 360 किलोमीटर इस ट्रेन को चलाया जाएगा, जो 105 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी, जबकि दिन में तीन चक्कर लगाए जाएंगे। इसी तरह दो इंजन तैयार होंगे, जबकि दो ट्रेनों को दो अलग-अलग इंजन खींच सकें।


कालका-शिमला ट्रैक पर हाइड्रोजन प्लांट की तैयारियां तेज
दिसंबर 2023 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कालका-शिमला ट्रैक पर हाइड्रोजन प्लांट की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इस ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन को इसी साल दिसंबर में चलाने का प्रस्ताव है। इसके लिए इस रूट पर तीन हाइड्रोजन जनरेशन एंड स्टोरेज प्लांट भी लगाए जाने हैं जो इस ट्रेन को हाइड्रोजन उपलब्ध करवाएंगे। यह प्लांट कालका, बडोग व शिमला में लगाए जाएंगे।


 

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