home page

Delhi NCR वाले जान लें 1 अक्टूबर से क्या क्या होने जा रहे हैं बदलाव

Delhi NCR News : दिल्ली वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है कि इस बार प्रशासन 1 अक्टूबर से ग्रैप सिस्टम लागू कर रहा है। डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। इससे सोसायटी और इंडस्ट्री में खलबली मची हुई है। आइए जानते है पूरी जानकारी।

 | 
Delhi NCR वाले जान लें 1 अक्टूबर से क्या क्या होने जा रहे हैं बदलाव

HR Breaking News (ब्यूरो)। राजधानी दिल्ली समेत पूरे NCR में जैसे-जैसे ठंडक का एहसास बढ़ रहा है, लोगों को पलूशन की चिंता सताने लगी है। वो धुंध और दमघोंटू हवा के दिन लौटने वाले हैं। आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल(Delhi CM Arvind Kejriwal) ने विंटर एक्शन प्लान का ऐलान भी कर दिया, जिसे 1 अक्टूबर से दिसंबर तक लागू किया जाएगा। इधर, दिल्ली-एनसीआर में एक अक्टूबर से डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर रोक लगने जा रही है। जी हां, रविवार को ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू हो जाएगा। वायु प्रदूषण रोकने के मकसद से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने यह फैसला लिया है। दिल्ली-NCR में डीजल से चलने वाले करीब 2 लाख डीजी सेट लगे हुए हैं। ऐसे में हड़कंप मचना लाजिमी है। दिल्ली में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक पहले से लगाई जा चुकी है। अब डीजल सेट पर प्रतिबंध के लिए सोसायटियां और इंडस्ट्री तैयार नहीं हैं। वैसे, दिल्लीवालों को डीजल डीजी बैन का ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि वहां उपयोग कम है।

 


जनरेटर में रेट्रो फिटिंग करवाने में 15 से 25 लाख रुपये का खर्च आता है। बाद में भी कई दिक्कतें सामने आती हैं। रेट्रो फिटिंग की क्वॉलिटी की अलग दिक्कत है। अगर रेट्रो फिटिंग दूसरी कंपनी से करा दी तो जनरेटर की वॉरंटी खत्म हो जाती है। रेट्रो फिटिंग से 15 से 20 फीसदी क्षमता भी घट जाती है। सोसायटी वाले कह रहे हैं कि NGT ने 15 साल पुराने डीजी सेट के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। 15 से 25 लाख रुपये खर्च करके डीजी में रेट्रो फिटिंग कौन करवाएगा? दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम में इस बैन का असर दिखेगा।

 

 


इस बार ज्यादा चिंता क्यों है?


दरअसल, अल नीनो के कारण इस बार सर्दियों में दिल्ली-NCR में प्रदूषण (Pollution in Delhi-NCR) ज्यादा रह सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि अल नीनो के दौरान हवाएं काफी मंद होती हैं। सर्दियों में इनकी रफ्तार 3 से 5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भी कम रहती है। ऐसे में प्रदूषण से बचने के लिए इस बार व्यापक कदम उठाने की जरूरत होगी। पिछले दो-तीन साल से राजधानी में सर्दियों के दौरान ला नीना की स्थिति बनी हुई थी। इसकी वजह से सर्दियों में हवाएं और मौसम राजधानी का साथ दे रहा था। इस बार अल नीनो के कारण ऐसा नहीं होगा। दिवाली के समय ज्यादा सर्दी पड़ रही होगी। त्योहार नवंबर के मध्य में है, ऐसे में प्रदूषण ज्यादा समय तक रह सकता है।

 

 

 

 


GRAP क्या है

 

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, इसे ही संक्षिप्त रूप में ग्रैप कहते हैं। यह एनसीआर के जिलों में प्रदूषण कम करने के लिए विभिन्न चरणों में लगाया जाता है।
वायु की गुणवत्ता के आधार पर ग्रैप को चार अलग-अलग स्टेज में बांटा गया है। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 200 से लेकर 450 यानी अति गंभीर स्थिति होने पर ये टॉप चरण लागू होता है।


डीजल जनरेटर पर बैन लगता है। हालांकि इमर्जेंसी कार्यों और सेना के कार्यों पर रोक नहीं लगती है। कोयला से चलने वाले उद्योग बंद हो जाते हैं। इस तरह से देखिए तो ग्रैप हवा की गुणवत्ता को रोकने के लिए इमर्जेंसी उपायों का एक सेट है।
यह भी ध्यान रखिए कि अगर प्रदूषण बढ़ता रहा तो पाबंदियां भी सख्त होती जाएंगी।

 

 

 

 

 

​​नोएडा की समस्या​

 

इस पाबंदी का सीधा असर नोएडा में चल रही इंडस्ट्रियों और हाईराइज सोसायटियों पर पड़ेगा। यहां करीब 350 हाइराइज सोसायटियां हैं। इनमें सिर्फ 50 ने डीजी सेट को ग्रैप नियमों के तहत कन्वर्ट कराया है। करीब 300 से ज्यादा सोसायटियों में अब भी पहले की तरह डीजी सेट चल रहा है। ग्रैप की पाबंदियां लागू होने पर इन सोसायटियों में पावर बैकअप की समस्या शुरू हो जाएगी। कुछ सोसायटियों में तो किराये के डीजी चल रहे हैं। डीजी सेट पर पाबंदियां लगने से सोसायटियों में बैकअप की समस्याएं बढ़ेंगी। ड्यूल फ्यूल जेनरेटर नहीं होने पर 10 सोसायटियों को नोएडा अथॉरिटी ने नोटिस भी दिया है।


अधिकारियों ने बताया है कि ग्रैप चार चरणों में लागू किया जाएगा। निगरानी के लिए चार टीमें बना दी गई हैं। अधिकारी अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कर रहे हैं लेकिन सीएक्यूएम के अधिकारी 24 घंटे के भीतर बैठक करने वाले हैं। संभावना जताई जा रही है कि डीजी सेट पर लगने वाली पाबंदियां 31 दिसंबर तक रोकी जा सकती हैं।

 

 

 

फरीदाबाद का हाल


यहां के लोग कह रहे हैं कि जनरेटर बंद हुआ तो सोसायटी की लिफ्ट बंद हो जाएगी। पानी की किल्लत हो सकती है। यहां एक भी सोसायटी में डीजल जनरेटर को सीएनजी जनरेटर में नहीं बदला गया है। ग्रेटर फरीदाबाद में 80 से ज्यादा हाइराइज सोसायटियां हैं। 5 हाइराइज सोसायटियां ऐसी हैं, जिनमें 24 घंटे डीजी सेट से बिजली सप्लाई की जाती है। अधिकतर सोसायटियों में बिल्डर ने बिजली का सिंगल कनेक्शन लिया है, जो आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। जहां आरडब्ल्यूए है वहां उनके पास इतना पैसा नहीं कि वे दूसरे जनरेटर खरीद सकें।
 

डीजी सेट कन्वर्ट कराने का खर्च


20 केवीए (करीब पांच लाख रुपये)
25 केवीए (करीब छह लाख)
80 केवीए (करीब 10 लाख)
100 केवीए (करीब 12 लाख)​