Property Rights : क्या केवल एक ही बेटे के नाम की जा सकती है सारी संपत्ति? जानें कानूनी नियम
Property Rights : आमतौर पर प्रोपर्टी से जुड़े नियमों और कानूनों को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव है। इसी कड़ी में आज हम आपको अपनी इस खबर में ये बता दें कि आखिर क्या एक ही बेटे के नाम की सारी संपत्ति की जा सकती है या नहीं... ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में जान लेते है इससे जुड़ा कानूनी नियम-
HR Breaking News, Digital Desk- (Father Property Inheritance Law In India)। अक्सर फिल्मों और टीवी सीरियलों में देखा जाता है कि गुस्से या पारिवारिक विवाद (family dispute) के दौरान पिता अपनी पूरी संपत्ति सिर्फ एक बेटे को दे देते हैं और बाकी बच्चों को पूरी तरह से अलग कर देते हैं। यह देखने में मनोरंजक लगता है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है: क्या भारतीय कानून (Indian Law) के तहत ऐसा वास्तव में संभव है? क्या एक पिता बिना किसी कानूनी वजह केवल एक ही बच्चे को संपत्ति देकर बाकी को बाहर कर सकता है?
इस खबर में हम कानूनी दृष्टि से समझेंगे कि वास्तविक जीवन में पिता की संपत्ति के बंटवारे पर कौन-कौन से नियम लागू होते हैं। उत्तराधिकार कानून, पैतृक संपत्ति (ancestral property) और स्वयं अर्जित संपत्ति-सभी पहलुओं को देखते हुए हम जानेंगे कि पिता को कितनी स्वतंत्रता मिलती है और किन परिस्थितियों में वह अपनी संपत्ति केवल एक वारिस को दे सकता है।
संपत्ति के प्रकार: पहले जान लें कौन-कौन सी होती है-
भारतीय कानून के अनुसार संपत्ति दो प्रकार की होती है: पैतृक संपत्ति और स्वयं अर्जित संपत्ति (self acquired property)। पैतृक संपत्ति वह होती है जो परिवार में पीढ़ियों से बिना बंटवारे के आई हो। जबकि स्वयं अर्जित संपत्ति वह होती है जिसे पिता ने अपनी मेहनत या कमाई से प्राप्त किया हो, जैसे घर, जमीन या अन्य संपत्ति।
यदि संपत्ति स्वयं अर्जित की गई हो तो क्या नियम हैं-
भारतीय कानून, खासकर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act), 1956, वारिसों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से तय करता है। अगर पिता बिना वसीयत के मृत्यु हो जाता है, तो उसकी संपत्ति क्लास I उत्तराधिकारियों के बीच समान हिस्सों में बांटी जाती है, जिसमें पत्नी, पुत्र और पुत्री सभी शामिल होते हैं। सभी को बराबर हिस्सा मिलता है।
अगर संपत्ति पैतृक है तो-
अगर पिता के पास ऐसी संपत्ति है जो पीढ़ियों से परिवार में आई है, तो वह इसे किसी एक बच्चे को पूरी तरह देने में स्वतंत्र नहीं होता। ऐसी पैतृक संपत्ति को सभी बच्चों में बराबर हिस्सों में बांटना अनिवार्य होता है। यदि पिता इसे केवल एक बच्चे को देने की कोशिश करता है, तो बाकी बच्चे इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
एक बच्चे को संपत्ति देने के लिए क्या कदम उठाएं-
यदि पिता अपनी स्वयं अर्जित संपत्ति किसी एक बेटे को देना चाहते हैं, तो सबसे सुरक्षित तरीका वसीयत (safe way will) बनाना है। वसीयत एक कानूनी दस्तावेज़ होता है जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा जाता है कि संपत्ति किसे और कितने हिस्से में मिलेगी, और इसे नोटरी या रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड किया जाता है। इस तरह की वसीयत अदालत में भी मान्य होती है।
वसीयत बनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि पैतृक संपत्ति से किसी एक बच्चे को पूरी तरह बाहर नहीं किया जा सकता, क्योंकि कानून के अनुसार सभी वारिसों को उनका वैधानिक हिस्सा मिलना अनिवार्य है।
डिसक्लेमर-
यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारियाँ विभिन्न कानूनी प्रावधानों और सामान्य नियमों पर आधारित हैं, लेकिन इसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक कानूनी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
