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सरकार ने किया सर्वे जारी, गांवों के मुकाबले शहरों में दफ्तर जाने के लिए खर्च हो रहे डबल रुपये

Employees News : देश में सरकार की तरफ से एक सर्वे किया गया है, जिसके अनुसार पता लगाया गया है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में कर्मचारियों का किस चीज पर कितना खर्च होता है। ऑफिस आने जाने के खर्चे में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि गांव की अपेक्षा शहर में लोग ऑफिस आने-जाने में ज्यादा रुपए खर्च कर रहे हैं। चलिए जानते हैं सर्वे के बारे में डिटेल से -
 
सरकार ने किया सर्वे जारी, गांवों के मुकाबले शहरों में दफ्तर जाने के लिए खर्च हो रहे डबल रुपये

HR Breaking News (Employees Survey) भारत के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कर्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation, Government of India) की तरफ से राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के माध्यम से पहली बार राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण के प्रमुख आंकड़े जारी किए गए हैं। सर्वे जुलाई 2025 से जून 2026 तक किया गया है, जिसमें पता चला है कि भारत में कार्यालय तक जाने के लिए हर महीने औसत खर्च में शहरी लोग ग्रामीण लोगों से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। 

औसत रूप से 785 रुपये होते हैं खर्च 


भारत में औसत निकाला गया है, जिसके अनुसार महीने में ऑफिस आने-जाने के लिए औसत रूप से 785 रुपए खर्च होते हैं। इसमें शहरी क्षेत्र के कर्मचारी आने-जाने पर खर्च ज्यादा करते हैं, शहरी क्षेत्र के कर्मचारी हर महीने 1044 खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह खर्च 612 रुपए रिकॉर्ड किया गया है।


स्कूल कॉलेज जाने के लिए खर्च का आंकड़ा 


इस सर्वे के दौरान यह भी नोट किया गया कि ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले बच्चे और शहरी क्षेत्र के विद्यार्थी किस प्रकार से खर्च करते हैं। इसमें सामने आया है कि शहर वाले अपने शिक्षण संस्थान तक जाने के लिए हर महीने औसत रूप से 617 रुपए खर्च करते हैं, जबकि ग्रामीण छात्रों का यह खर्च 361 रुपए है। इसमें पता चला है कि 57.6% विद्यार्थी 1 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं, वहीं 15 साल या उससे ज्यादा उम्र के ज्यादातर विद्यार्थी एक दिन के भीतर आने-जाने की यात्राएं रोजाना करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 54.5% है तो शहरी क्षेत्र में 64.1% है। 

महिला और पुरुषों के खर्च में भी मिला फर्क 


कार्यालय जाने के लिए खर्च के हिसाब से महिला और पुरुष कर्मचारियों में भी अंतर मिला है। महिला कर्मचारी औसत रूप से 533 रुपये प्रति महीना खर्च करती हैं तो वहीं पुरुष कर्मचारियों का औसतन खर्च 835 रुपये निकलकर सामने आया है। 

बाइक या स्कूटी को ज्यादा मिलती है प्राथमिकता 


इसमें औसत समय भी निकाला गया है कि ऑफिस जाने तक का कितना समय लगता है। इसमें उत्तर भारत के व पश्चिम भारत के राज्यों में यह समय 20 से 23 मिनट का निकला, जबकि दक्षिण के हिस्सों में ज्यादा अधिक समय मिला। देश में करीब 61.9% पुरुष कर्मचारी रोजाना काम के लिए 1 किलोमीटर से ज्यादा चलते हैं। वहीं महिलाएं 41.9% है जो 1 किलोमीटर से ज्यादा का सफर करती हैं। कर्मचारियों में दो पहिया वाहन से आने जाने का सबसे ज्यादा प्रचलन है। ग्रामीण क्षेत्र में 37.1% तो शहरी क्षेत्र में 52.3% अपना दो पहिया वाहन का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कर्मचारियों के शहरी क्षेत्र में मेट्रो रेल या फिर ट्राम जैसी सुविधाओं का 5% प्रयोग करते हैं। महाराष्ट्र में यह सबसे ज्यादा 20% तो पश्चिम बंगाल में 16% व दिल्ली में 14% दर्ज किया गया है। 

83% कर्मचारियों का ऑफिस 30 मिनट से कम दूरी पर 


सर्वे में सामने आया है कि 83.4% कर्मचारी ऐसे हैं जिनका ऑफिस का समय 30 मिनट से कम दूरी पर है। कर्मचारियों को ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ता। ग्रामीण क्षेत्रों में 86.1% और शहरी क्षेत्र में 79.3% ऐसे हैं, जिनका समय कार्यालय तक का 30 मिनट का है। वहीं 13.7% कर्मचारी ऐसे हैं जो आधे से 1 घंटे में अपने कार्यालय तक का सफर पूरा करते हैं। वहीं, कार्यालय तक जाने की औसत यात्रा अवधि 25 मिनट निकाली गई है जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में 23 व शहरी क्षेत्र में 27 मिनट है। विद्यार्थियों के लिए भी शिक्षण संस्थान तक जाने के लिए औसत समय 23 मिनट का निकला है, इसमें शहरी क्षेत्र में 22 मिनट दर्ज किया गया है व ग्रामीण क्षेत्र में 23 मिनट नोट किया गया है। 

पढ़ने के लिए 1 किलोमीटर से दूर जा रहे हैं 66% विद्यार्थी 


सर्वे में सामने आया कि 66.4% विद्यार्थी रोजाना पढ़ने के लिए 1 किलोमीटर से दूर का सफर तय कर रहे हैं। वहीं 6 साल से या उससे ज्यादा उम्र के दो तिहाई छात्र बुनियादी शिक्षा संस्थान तक पहुंचने के लिए कम से कम 1 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 65.6% तो शहरों में 68.1% है। वहीं एक रिपोर्ट यह भी सामने आई है कि स्कूली छात्रों में 37% विद्यार्थी पैदल स्कूल जाते हैं। इसमें 29.5% छात्र बस और 15.8% विद्यार्थी साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। कुल छात्रों में 10.5% आने-जाने के लिए ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें शहरी क्षेत्र में ज्यादातर लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।