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भारतीयों पर कर्ज तीन गुना तेजी से बढ़ा, 4% घटी जेब

inflation : भारत में परिवारों पर कर्ज तेजी से बढ़ता जा रहा है। कर्ज के बढ़ने से परिवारों की बचत में भी 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। आरबीआई के जारी आंकड़े क्या बता रहे हैं। चलिए जानते हैं आगे खबर में विस्तार से।         

 
भारतीयों पर कर्ज तीन गुना तेजी से बढ़ा, 4% घटी जेब

HR Breaking News : देश में परिवारों का पैसा बैंक जमा, छोटी बचत योजनाओं और दूसरी वित्तीय संपत्तियों में पहले से ज्यादा लगा है। इसके बावजूद उनकी शुद्ध वित्तीय बचत में गिरावट दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह परिवारों पर बढ़ता कर्ज है। वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत घटकर 21.69 लाख करोड़ रुपए रह गई, जबकि 2024-25 में यह 22.57 लाख करोड़ (Indian debt has increased three times faster) रुपए थी। इस तरह एक साल में बचत में 88 हजार करोड़ रुपए की कमी आई है।

परिवारों पर नए वित्तीय कर्ज का बोझ बढ़ा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के दौरान परिवारों की वित्तीय संपत्तियों में 43.20 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। यह पिछले वित्त वर्ष के 38.31 लाख करोड़ रुपए से 12.8 प्रतिशत अधिक है। वहीं, इसी अवधि में परिवारों पर नए वित्तीय कर्ज का बोझ 21.51 लाख करोड़ रुपए बढ़ा, जबकि एक साल पहले यह बढ़ोतरी 15.74 लाख करोड़ रुपए थी। यानी संपत्तियों में इजाफे की तुलना में कर्ज बढ़ने की रफ्तार करीब तीन गुना रही।

हर 100 रुपए की संपत्ति पर 50 रुपए का नया कर्ज

परिवारों की वित्तीय (rising inflation in india) स्थिति में बदलाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2024-25 में वित्तीय संपत्तियों में हर 100 रुपए की बढ़ोतरी के मुकाबले करीब 41 रुपए का नया कर्ज जुड़ा था। 2025-26 में यह रकम बढ़कर 50 रुपए हो गई। कर्ज का हिस्सा बढ़ने से परिवारों के पास बचने वाली शुद्ध रकम कम हो गई। इसका असर जीडीपी में शुद्ध वित्तीय बचत की हिस्सेदारी पर भी पड़ा। यह अनुपात 7.1 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत रह गया। दूसरी ओर, जीडीपी के मुकाबले नए वित्तीय कर्ज का अनुपात 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 6.2 प्रतिशत हो गया।

बैंक जमा और छोटी बचत योजनाओं में बढ़ा निवेश

परिवारों ने बैंक और गैर-बैंक जमा में निवेश बढ़ाया। इन माध्यमों में 2025-26 के दौरान 15.32 लाख करोड़ रुपए जमा हुए, जो पिछले साल के मुकाबले 22.1 प्रतिशत अधिक हैं। पीपीएफ को छोड़कर अन्य छोटी बचत योजनाओं में निवेश भी 48 प्रतिशत बढ़कर 3.45 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। हालांकि, सीधे शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय परिवारों ने वहां से पैसा निकालना ज्यादा पसंद किया। पिछले वित्त वर्ष में शुद्ध निवेश के रूप में 40,353 करोड़ रुपए लगाने के मुकाबले 2025-26 में 79,890 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई।

कर्ज बढ़ने के पीछे कई वजहें संभव

विशेषज्ञों के अनुसार, परिवारों पर कर्ज बढ़ने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। घर या गाड़ी खरीदने, कारोबार बढ़ाने और कर्ज आसानी से उपलब्ध होने के कारण भी उधारी बढ़ सकती है। वहीं, रोजमर्रा के खर्च बढ़ने या मकान-जमीन में अधिक पैसा लगाने से वित्तीय बचत पर दबाव पड़ सकता है। परिवारों की आय, ब्याज दरों, किस्तों और कर्ज चुकाने की अवधि से जुड़े आंकड़ों के बिना खर्च और कमाई के बीच का अंतर तय करना मुश्किल है।

गोल्ड लोन (gold loan) की बढ़ी मांग

आरबीआई के आंकड़ों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) से परिवारों के कर्ज में भी तेज बढ़ोतरी सामने आई है। 2025-26 में इसमें 93 प्रतिशत की वृद्धि हुई।