Income Tax : प्रोपर्टी खरीदने और बेचने से पहले देनी होगी जानकारी, नहीं तो 100 प्रतिशत मिलेगा इनकम टैक्स का नोटिस
Income Tax Notice : प्रोपर्टी खरीदने में मोटी रकम इनवेस्ट करनी पड़ती है, इसी तरह प्रोपर्टी बेचने पर भी बड़ी रकम आपके हाथों में आती है। इसे गुपचुप तरीके से आप न तो जेब में डाल सकते हैं और न ही खाते में। ऐसा करना आपके लिए भारी पड़ेगा। अगर आपने इसकी सही समय पर संबंधित विभाग को जानकारी नहीं दी तो आपके घर इनकम टैक्स (Income Tax rules)का नोटिस आ जाएगा और आपकी परेशानियां बढ़ जाएंगी।

HR Breaking News : (property Tips)। आज के डिजिटल युग में कोई भी ट्रांजेक्शन इनकम टैक्स विभाग से छिपी नहीं है। खासकर बड़ी ट्रांजेक्शंस को लेकर इनकम टैक्स विभाग (Income Tax department) पैनी नजर रखता है। अगर आप भी बड़ी रकम का लेन देन कर रहे हैं तो विभाग तक इसकी जानकारी पहुंचानी जरूरी होती है, नहीं तो तुंरत आपको विभाग नोटिस (IT notice) थमा देगा। प्रोपर्टी की खरीद फरोख्त करते समय काफी पैसे का आदान प्रदान होता है, इसलिए आपको कोई भी प्रोपर्टी खरीदने या बेचने से पहले इसकी जानकारी देनी होगी। ऐसा न करने भी भारी अंजाम भुगतना होगा।
बड़ी ट्रांजेक्शंस का रखें ध्यान -
आजकल बड़ी ट्रांजैक्शन (online transactions) को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। इस तरह की ट्रांजेक्शन करने पर इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय भी विभाग को जानकारी जरूर देनी चाहिए, नहीं तो नोटिस का जवाब देना आपको भारी पड़ेगा। सही से संतुष्टिपरक जवाब नहीं दे पाए तो आप पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। वैसे भी अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग (ITR Filing) का कार्य जोरों पर है। आयकर रिटर्न (income tax return) में आप आय, खर्च का सही से ब्योरा दें।
कमाई को छिपाना या गलत जानकारी भरना भी आपको भारी पड़ सकता है। टैक्स छूट (tax exemption) के लिए निवेश की जानकारी देना जरूरी है। कई बार फर्जी तरीके से लोग टैक्स छूट पाते हैं तो बाद में उनको यह भारी पड़ता है। प्रोपर्टी खरीदने के अलावा और भी कई ऐसे काम हैं, जिन्हें करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है और आईटीआर (ITR rules) के जरिये इनकम टैक्स विभाग को जानकारी देना जरूरी है।
1-प्रोपर्टी खरीद-बेच में यह रखें ध्यान-
अगर आप 30 लाख से ज्यादा कीमत की अचल संपत्ति खरीद रहे हैं या बेच रहे हैं तो अपने क्षेत्र के प्रॉपर्टी रजिस्ट्रार और सब रजिस्ट्रार में इसकी जानकारी जरूर दें। यानी आपको किसी भी अचल संपत्ति (property investment tips) को खरीदने या बेचने पर इनकम टैक्स के नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।
2- फॉरेन करंसी बेचने पर-
बहुत से लोग हर साल विदेशी मुद्रा (foreign currency) भी बेचते हैं। एक साल में विदेशी मुद्रा बेचने की भी लिमिट है। एक वित्तीय वर्ष में विदेशी मुद्रा बेचने से 10 लाख रुपये का लाभ होता है तो इनकम टैक्स विभाग को आपको जानकारी देनी ही होगी। इस नियम (IT rules for cash transactions) का उल्लंघन करने पर आप पर कार्रवाई भी हो सकती है।
3- बैंक खाते से ट्रांजेक्शन -
कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष (FY) में बचत खाते से 10 लाख रुपये से अधिक निकालता है या जमा करता है तो आयकर विभाग को इसके बारे में सूचित करना होगा। करंट अकाउंट के लिए यह लिमिट 50 लाख रुपये तक है। इससे अधिक ट्रांजैक्शन (bank account transaction limit) पर आयकर विभाग को बताना होगा। नहीं तो आप पर किसी भी समय कार्रवाई हो सकती है और नोटिस आ सकता है।
4-बैंक FD को लेकर नियम -
फिक्स्ड डिपॉजिट (fixed deposit) पर भी यही नियम लागू है। ये नियम इसलिए लागू किए गए हैं कि इतना सारा पैसा जा कहां रहा है, इसकी सूचना विभाग को होनी जरूरी है ताकि करंसी का दुरुपयोग न हो सके और टैक्स (tax exemption rules) व्यवस्था सही से बनी रहे। 10 लाख रुपये से अधिक अगर एफडी में नकद जमा करते हैं, तो आईटी विभाग को इस बारे में जानकारी देनी होगी। बेशह एक एफडी खाता हो या अनेक, 10 लाख रुपये से अधिक कैश जमा करने पर बैंक (bank news) को आयकर विभाग को यह जानकारी देने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके लिए फॉर्म 61ए भरकर विभाग को जानकारी दी जाती है।
5- कैश में क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने पर-
कैश में लेनदेन पर तो विभाग पैनी नजर रखता है, नियम का उल्लंघन होन पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है। अगर आपने क्रेडिट कार्ड (credit card rules) का बिल कैश में 1 लाख से ज्यादा चुकाया तो आयकर विभाग को इस बारे में बताना होगा। जानकारी न देने पर इनकम टैक्स विभाग का नोटिस (it notice) मिल सकता है। एक वित्त वर्ष में क्रेडिट कार्ड के बिल पर कोई ग्राहक 10 लाख रुपये से अधिक का सेटलमेंट करता है तो भी इसे विभाग को बताना होगा।
6- शेयर बाजार में निवेश के लिए नियम-
अगर आप शेयर बाजार (share market) में निवेश करते हैं तो आप म्यूचुअल फंड, स्टॉक या बॉन्ड में एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक का निवेश नकद नहीं कर सकते। अगर ऐसा करते हैं तो तुरंत विभाग को जानकारी देनी होती है, हालांकि इनकम टैक्स विभाग (income tax department) को ये जानकारी देने के लिए विभागीय व्यवस्थाएं हैं, संबंधित विभागों की इस बारे में जिम्मेदारी बनती है। आइटीआर में खुद ये ब्योरा देना होता है।
7. ऐसे पकड़ में आती है गलती-
बैंक स्टेटमेंट (bank statement) यानी एनुअल इनफॉर्मेशन रिटर्न स्टेटमेंट में हर ट्रांजैक्शन का पता चलता है और आप इनकम टैक्स की रडार पर आ सकते हैं। फॉर्म 26AS के पार्ट ई में सभी हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन (cash transaction rules) की डिटेल दर्ज कर सकते हैं। आय व बड़े नकद लेन देन को छिपाना आपको भारी पड़ सकता है।