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FD से ब्याज भी ज्यादा और टैक्स में भी छूट, इस सरकारी स्कीम में पैसा लगाने का फायदा ही फायदा

Bonds vs Bank- बॉन्ड एफडी की तुलना में ज़रूरी विविधता और बेहतर लिक्विडिटी प्रदान करते हैं. बॉन्ड को ओटीसी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है, जबकि एफडी को जल्दी तोड़ने पर शुल्क लगता है.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.

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HR Breaking News (ब्यूरो)। नया वित्‍तीय वर्ष शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं. इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल (ITR Filing) करने की समयसीमा भी नजदीक आ रही है. ऐसे में बहुत से आयकरदाता कर बचत और बढिया रिटर्न देने वाले निवेश विकल्‍पों की तलाश में हैं. भारत में कई ऐसी बचत योजनाएं हैं, जिनमें अच्‍छा रिटर्न तो मिलता ही है, साथ ही उनमें पैसे डूबने का खतरा भी बहुत कम होता है. बैंक एफडी (Bank FD) भी उनमें से एक है. लेकिन, अगर कोई व्‍यक्ति थोड़ा रिस्‍क उठाकर ज्‍यादा रिटर्न पाना चाहता तो उसके लिए सरकारी बॉन्ड (Bond) एक बेहतर विकल्प हो सकता है. कर और निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक FD लगभग 6 फीसदी रिटर्न देती है, जबकि बॉन्ड की यील्‍ड औसतर 9 फीसदी रही है.

दोनों में लॉक-इन अवधि होती है, लेकिन बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आयकर से मुक्त होता है. टैक्‍स सेवर एफडी को छोड़कर बाकी एफडी से होने वाली आया पर आयकर देना होता है. बॉन्ड एफडी की तुलना में ज़रूरी विविधता और बेहतर लिक्विडिटी प्रदान करते हैं. बॉन्ड को ओटीसी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है, जबकि एफडी को जल्दी तोड़ने पर शुल्क लगता है. लॉन्ग-टर्म बॉन्ड आम तौर पर अच्छी यील्ड और ज़्यादा कुल रिटर्न एफडी की तुलना में देते हैं.


जोखिम थोड़ा ज्‍यादा


लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एमआई कैपिटल सर्विसेज के सह-संस्थापक प्रतीक तोशनीवाल का कहना है कि बॉन्ड आम तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक ब्याज देते हैं. बॉन्ड 9% तक रिटर्न दे सकते हैं, जो फिक्स्ड डिपॉजिट से कहीं ज़्यादा है. हां, बॉन्‍ड में रिस्‍क एफडी के मुकाबले थोड़ा ज्‍यादा होता है.


टैक्‍स बचत


तोशनीवाल का कहना है कि बॉन्ड से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगता है, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज पर ‘अन्य स्रोतों से होने वाली आय’ के रूप में टैक्स लगता है. इसके अलावा, निवेशक अपने बॉन्ड को पूंजी वृद्धि (Capital Appreciation) के लिए बेच सकते हैं, जो कि फिक्स्ड डिपॉजिट खाताधारकों के लिए उपलब्ध नहीं है.

ज्‍यादा लिक्विडिटी


टोरस ओरो पीएमएस के फंड मैनेजर वैभव शाह का कहना है कि बॉन्ड, एफडी की तुलना में ज्‍यादा विविधता और बेहतर लिक्विडिटी प्रदान करते हैं. बॉन्ड को ओटीसी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है, जबकि एफडी को जल्दी तोड़ने पर शुल्क लगता है.

इसलिए एफडी से बेहतर हैं बॉन्‍ड


सनराइज गिल्ट एंड सिक्योरिटीज के मार्केटिंग कंसल्टेंट कमल कलारिया कहते हैं कि पांच ऐसे कारण हैं, जो बॉन्ड को बैंक FD से बेहतर बनाते हैं. कलारिया का कहना है कि बॉन्ड आम तौर पर बैंक FD की निश्चित दरों की तुलना में अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं. इससे निवेशक थोड़ा ज्‍यादा जोखिम उठाकर बेहतर रिटर्न पा सकते हैं.

FD पर अर्जित ब्याज पूरी तरह से कर योग्य है, जबकि कुछ बॉन्ड, जैसे कि म्यूनिसिपल बॉन्ड, कर-मुक्त ब्याज आय प्रदान करते हैं. बॉन्ड FD की तुलना में बेहतर तरलता प्रदान करते हैं. क्योंकि उन्हें द्वितीयक बाज़ारों (Secondary Markets) में कारोबार किया जा सकता है. बॉन्ड समय-समय पर ब्याज भुगतान के माध्यम से नियमित आय प्रदान करते हैं, जो उन्हें सेवानिवृत्त लोगों और स्थिर नकदी प्रवाह चाहने वालों के लिए आकर्षक बनाता है.


कमल कलारिया का कहना है कि बॉन्ड बाजार विभिन्न जोखिम स्तरों और निवेश लक्ष्यों को पूरा करने वाले विभिन्न उपकरण प्रदान करता है. निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों, कॉर्पोरेट बांडों और उच्च-उपज विकल्पों में से चयन कर सकते हैं, तथा ब्याज दरों में गिरावट जैसी अनुकूल बाजार स्थितियों का लाभ उठा सकते हैं, जिससे पूंजीगत लाभ हो सकता है.