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ITR Refund Status : अब तक नहीं आया है इनकम टैक्स रिफंड तो आपने भी की है ये गलती, इनकम टैक्स विभाग ने दी अहम जानकारी

ITR Refund Status : टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी खबर। अगर आपने भी इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर दिया है और अब तक आपका रिफंड नहीं आया है, तो इस खबर को एक बार जरूर पढ़ लें। दरअसल आज हम आपको अपनी इस खबर में ऐसी ही 5 गलतियों के बारे में  बताने जा रहे हैं, जिनका ध्यान ITR Filing के दौरान रखना बेहद जरूरी है. ..  
 
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HR Breaking News, Digital Desk- अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर चुके हैं और अब तक आपका रिफंड नहीं आया है, तो फिर ये खबर आपके लिए है. दरअसल, आईटीआर भरते समय टैक्सपेयर्स कुछ गलतियां कर देते हैं, जिसके चलते मिलने वाला रिफंड लेट आता है या फिर अटक जाता है. ऐसी ही 5 गलतियों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जिनका ध्यान ITR Filing के दौरान रखना बेहद जरूरी है.   

आयकर विभाग करता है आगाह-
ITR भरने की डेडलाइन से पहले ही Income Tax Department की ओर से सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए ये सलाह अक्सर दी जाती है कि आईटीआर में दर्ज की गई जानकारियों को अच्छी-तरह जांचने के बाद ही सब्मिट करें. क्योंकि इन जानकारियों के मिसमैच होने की स्थिति में आपको मिलने वाला आयकर रिफंड फंस सकता है. इसके अलावा आपके द्वारा भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन न होने की स्थिति में भी ये बाधा सामने आ सकती है.  

बैंक डिटेल मिसमैच-
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद टैक्सपेयर्स (Taxpayers) के खाते में रिफंड आमतौर पर 30 दिनों के भीतर सीधे क्रेडिट किया जाता है या फिर चेक या डिमांड ड्राफ्ट उसके पते पर भेज दिया जाता है. ऐसे में ये सबसे जरूरी है कि रिटर्न भरते समय बैंक का ब्योरा पूरी तरह सही दिया जाए, क्योंकि रिफंड का पैसा भी इसी खाते में आता है. अगर बैंक अकाउंट डीटेल्स मिसमैच (Bank Account Details Mismatch) होती हैं तो रिफंड आने में देर हो सकती है या फिर ये अटक सकता है. 

26 एएस का मिलान न होना-
आईटीआर फाइलिंग के दौरान डिटेल्स मिसमैच के कारण रिफंड में देरी का सामना करना पड़ सकता है. जब भी आप इनकम टैक्‍स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करते हैं तो फॉर्म 26AS की जरूरत पड़ती है. इस फॉर्म की मदद से ही आपको पता चलता है कि पूरे वित्‍तीय वर्ष में आपने किस तरह की कमाई पर कितना इनकम टैक्‍स दिया है. साधारण शब्‍दों में समझें तो फॉर्म 26AS एक तरह का टैक्‍स स्‍टेटमेंट डॉक्‍यूमेंट है. रिटर्न दाखिल फाइल करने से पहले इस फॉर्म को चेक करना जरूरी है. 

एआईएस मिसमैच-
रिटर्न भरते समय सिर्फ 26 एएस ही नहीं बल्कि AIS की भी जरूरत पड़ती है. इस डॉक्युमेंट की भी आईटीआर भरने में उतनी ही अहमियत है, जितनी कि 26AS की होती है. दरअसल, दोनों में मौजूद आंकड़ों के मिसमैच होने की स्थिति में आपके द्वारा दाखिल किया गया आईटीआर खारिज किया जा सकता है. ऐसे करदाता को दोबारा से संशोधित रिटर्न भरनी पड़ेगी. विभाग ने पहले ही स्‍पष्‍ट किया हुआ है कि रिटर्न भरते में दोनों ही फॉर्म की जरूरत होती है.

बता दें कि 26एएस में जहां किसी वित्‍तीय वर्ष के दौरान चुकाए टैक्‍स और ट्रांजैक्शंस की डिटेल होती है, तो वहीं AIS में आपके द्वारा भरे गए टैक्‍स के अलावा पूरे साल अलग-अलग माध्‍यम से होने वाली आमदनी, ब्‍याज, लाभांश, लांग टर्म प्रॉफिट और रिफंड समेत अन्य जानकारियां होती हैं. 

ITR का ई-वेरिफिकेशन-
आईटीआर फाइल करने के 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन जरूरी होता है. ऐसा न होने पर आपका इनकम टैक्स रिटर्न भरा हुआ नहीं माना जाएगा. इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. बता दें कि ई वेरिफिकेशन करने के बाद ही आपका ITR सब्मिशन कम्प्लीट माना जाता है और इसके बाद विभाग की ओर से रिफंड भी जारी किया जाता है. इसके साथ ही आपको बता दें कि ई-वेरिफिकेशन की डेट को ही आपके द्वारा भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न की फाइलिंग डेट भी माना जाता है. ये काम न करने पर आपका रिफंट अटक सकता है.

अगर ई-वेरिफिकेशन में देरी होती है, तो फिर टैक्सपेयर्स पर जुर्माना भी लग सकता है. 5 लाख से कम सालाना इनकम पर 1000 रुपये और 5 लाख से ज्यादा आय वालों को 5,000 तक जुर्माना देने का प्रावधान है. 

पिछले वित्त वर्ष का बकाया-
आईटीआर भरने वाले करदाता को यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि उसके ऊपर पिछले वित्तीय वर्ष की कोई देनदारी तो नहीं है. यदि आपके पास पिछले वित्तीय वर्ष से कुछ बकाया है, तो आपको मिलने वाले आईटीआर रिफंड में देरी हो सकती है. ऐसी स्थिति में जरूरी है कि आपके रिफंड का उपयोग उन बकाया राशि का निपटान करने के लिए किया जाएगा. हालांकि, विभाग की ओर से आपको एक नोटिस के माध्यम से इस संबंध में जानकारी भी दी जाती है.