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Success Story : मजदूरी करने वाले के बेटे ने इडली-डोसे का घोल बेचकर खड़ी 2000 करोड़ की कंपनी, ऐसे हासिल हुई सफलता

ये कहानी है आईडी फ्रेश फूड -इंडिया- प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ मुस्तफा पीसी की। जिन्होंने मुश्किलों के सामने हार नहीं मानी और दिहाड़ी मजदूर के बेटे होकर भी करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी। आज उनकी कंपनी 2,000 करोड़ रुपये की हो चुकी है। उन्होंने इडली-डोसा का घोल बेचकर अपनी कंपनी खड़ी कर दी।आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से.

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Success Story : मजदूरी करने वाले के बेटे ने इडली-डोसे का घोल बेचकर खड़ी 2000 करोड़ की कंपनी, ऐसे हासिल हुई सफलता

HR Breaking News (नई दिल्ली)। मुश्किल हर किसी की जिंदगी में आती है। कोई उसके सामने घुटने टेक देता है तो कोई उससे डटकर मुकाबला करता है। मुस्तफा पीसी उन लोगों में से हैं, जिन्होंने परेशानियों के सामने हार नहीं मानी और आज 2,000 करोड़ की कंपनी के मालिक हैं। ये कहानी है आईडी फ्रेश फूड -इंडिया- प्राइवेट लिमिटेड (iD Fresh Food -India- Pvt Ltd.) के सीईओ मुस्तफा पीसी की। किसी से सोचा नहीं था कि एक दिहाड़ी मजदूर का बेटा एक दिन करोड़पति बन जाएगा। अपनी खुद की कंपनी खड़ी कर लेगा। मुस्तफा ने सबकी सोच बदल दी।

पिता की कमाई 10 रुपये


मुस्तफा पीसी का जन्म केरल के एक सुदूर गांव में हुआ। परिवार की आर्थिक हालात अच्छी नहीं थी। पिता दिहाड़ी मजदूर थे। कुछ वक्त कुली के तौर पर भी काम किया। कमाई इतनी भी नहीं थी कि घर के छत की मरम्मत करवा सकें। आमदनी न होने के चलते बच्चों की पढ़ाई ठीक से नहीं हो सकी। भाई-बहनों में सबसे बड़े मुस्तफा जब 10 साल के थे, तभी उन्होंने काम करना शुरू कर दिया। पिता की मदद करने के लिए वो उनके साथ अदरक के खेतों में मजदूरी करते थे। बदले में पिता को 10 रुपये की दिहाड़ी मिलती थी। पढ़ाई का वक्त नहीं मिल पाता इसलिए वो कक्षा 6 में फेल हो गए।

बदल गई सोच


मुस्तफा फेल होने के बाद समझ चुके थे कि अगर जिंदगी को बदलना है तो पढ़ाई ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने मेहनत करना शुरू किया। पढ़ाई में मन लगाना शुरू किया। पिता की मदद के लिए खेतों में उनके साथ काम भी करते थे। उन्हें मजदूरी मिली तो उससे घर के बरामदे पर चॉकलेट बेचना शुरू किया। मां भी वहीं पर नींबू शिकंजी बेचने लगी। थोड़ा-थोड़ा जोड़कर उन्होंने बकरी खरीदी। किसी तरह से दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो गया। पढ़ाई के दम पर उन्हें अच्छे कॉलेज में दाखिला मिल गया। उन्हें एक कंपनी में नौकरी मिल गई। पहली सैलरी 14,000 रुपये थी। बाद में अमेरिका की एक स्टार्टअप कंपनी में उन्हें नौकरी मिल गई। वहां कुछ साल काम करने के बाद वो वापस देश लौट आए। पिता के सिर पर जो कर्ज था, उसे चुकाया।

ऐसे मिला इटली-डोसा बैटर बेचने का आइडिया


मुस्तफा ने एक दिन अपने चचेरे भाई को सादे पाउच में इडली-डोसा बैटर खरीदकर लाते देखा। उन्हें वहीं से आईडी फ्रेश फूड शुरू करने का आइडिया मिला। साल 2005 में बचत के 50 हजार रुपये निवेश किए। खुद स्कूटर से जाकर इडली-डोसा का बैटर बेचते थे। शुरुआत में 100 पैकेट बेचना भी मुश्किल था। कारोबार में नुकसान होने लगा, लेकिन मुस्तफा ने धैर्य नहीं खोया।

2000 करोड़ की कंपनी


कुछ ही सालों में मेहनत का फल मिलने लगा। मुस्तफा ने इडली और डोसा का स्टार्टअप धीरे-धीरे बढ़ने लगा। बैंगलोर में 50 वर्ग फीट की दुकान से शुरू हुई कंपनी देशभर में फैलने लगी। बैटर के क्वालिटी और टेक्स्चर पर मुस्तफा खुद नजर रख रहे थे। उन्होंने अपने प्रोडक्ट को बढ़ाना शुरू किया। इडली-डोसा के अलावा मालाबार परांठा और रोटी, कॉफी सब ऐड कर लिया। उनका कारोबार अब देशभर में फैलने लगा। उनका कारोबार इतना पॉपुलर हो गया था कि अज़ीम प्रेमजी भी उनके ग्राहक बन गए। साल 2017 में प्रेमजी ने उनकी कंपनी में 170 करोड़ रुपये का निवेश किया। साल 2023 में उनकी कंपनी आईडी फ्रेश फूड्स ने 500 करोड़ का टर्नओवर पूरा किया, कंपनी की वैल्यूएशन 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आज उनकी कंपनी रोज 2,50,000 किलो इडली-डोसा बैटर और 52,000 परांठे प्रोसेस करती है।