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Success Story : रद्दी पेपर से खड़ा किया 800 करोड़ का Empire, ऐसी है पूनम गुप्ता की सफलता की कहानी

Success Story : सफलती के पीछे मेहनत और किस्मत दोनों का हाथ होता है, ऐसी ही कहानी आज हम आपको बताने जा रहे है, दिल्ली के कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट करने वाली पूनम गुप्ता आज 800 करोड़ के एंपायर की मालकिन हैं. उन्होंने रद्दी पेपर से इतना बड़ा Empire खड़ा किया है, आइए जानते है इनके बारे में पूरी जानकारी।

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Success Story : रद्दी पेपर से खड़ा किया 800 करोड़ का Empire, ऐसी है पूनम गुप्ता की सफलता की कहानी

HR Breaking News, Digital Desk - मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली पूनम गुप्ता ने अपनी कंपनी, PG पेपर के साथ एक रिकर्ड उपलब्धि हासिल की है, जिसने 800 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया है और उनकी कंपनी की उपस्थिति 60 देशों में है. हालांकि, उनकी सफलता की राह में कांटे भी बहुत थे.

कुछ साल पहले, MBA की डिग्री (MBA degree) लेने के बावजूद रोजगार सुरक्षित करने के लिए संघर्ष करते हुए, पूनम को करियर में रुकावटें भी आईं. ऐसा तब हुआ जब उनके पति का स्कॉटलैंड ट्रांसफर हो गया. जहां कथित रूप से अनुभव में कमी की वजह से उनके नौकरी के आवेदन बार-बार खारिज कर दिए गए थे. कॉर्पोरेट नौकरी की तलाश (looking for a corporate job) से निराश होकर, पूनम ने पूरे मामले को अपने हाथों में लेने का फैसला किया.

बेकार कागज के रीसाइक्लिंग और उसे फिर से इस्तेमाल किए जाने योग्य कागज में बदलने की कैपेसिटी को पहचानते हुए, पूनम ने दो दशक पहले PG पेपर स्थापित करने की यात्रा शुरू की, और इंडस्ट्री में 1 लाख रुपये का निवेश किया. घर के एक कमरे से शुरुआत करके, कंपनी ने भारत, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कई देशों में अपने ऑपरेशन का विस्तार किया.


वर्तमान में PG पेपर के CEO के तौर पर कार्यरत हैं, पूनम गुप्ता का जन्म दिल्ली में हुआ था और उन्होंने लेडी श्री राम कॉलेज से अर्थशास्त्र ऑनर्स की पढ़ाई की. इसके बाद, उन्होंने MBA की उपाधि प्राप्त की. 2002 में, उन्होंने स्कॉटलैंड में काम करने वाले पुनीत गुप्ता से शादी की, जिसके बाद पूनम अपने पति के साथ देश में रहने लगीं.

स्कॉटलैंड में रहते हुए, पूनम ने बड़े निगमों के लिए बेकार कागज की बड़ी चुनौतियों को देखा, जिसकी वजह से सेटिलमेंट खर्च में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस अवलोकन से उन्हें रीन्यूएबल पेपर से एक प्रोडक्ट बनाने का नया विचार आया.

दस महीने के गहन रीसर्च के बाद, उन्होंने पाया कि वेस्ट पेपर से उपयोग करने के लायक कागज बनाना संभव है. 1 लाख रुपये के शुरुआती निवेश के साथ, पूनम ने 2003 में अपने घर से इस्तेमाल किए गए कागज को रीसाइक्लिंग करना शुरू किया. उन्होंने भारत से कागज के दो कंटेनरों के लिए ऑर्डर दिया और कंपनी ने शुरुआत से ही पर्याप्त मुनाफा कमाया. इस शुरुआती सफलता के बाद, पूनम दृढ़ और अटल रहीं. उन्होंने अलग-अलग देशों से प्रयुक्त कागज खरीदना, उसको रीसाइक्लिंग करना, हाई क्वॉलिटी वाला कागज बनाना और ग्लोबल लेवल पर उसकी मार्केटिंग करना शुरू किया.


PG पेपर के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में अब कागज के प्रकारों की एक लंबी सिरीज शामिल है, जिसमें न्यूजप्रिंट, फोल्डिंग बॉक्सबोर्ड, प्रिंटिंग पेपर, पैकेजिंग पेपर, स्पेशल पेपर और पेपर शब्दावली शामिल हैं.
पूनम गुप्ता का अनुमान है कि आगामी वित्तीय वर्ष में PG पेपर का राजस्व 1000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा. उनकी यात्रा व्यापार जगत में आंत्रप्रेन्योरशिप की भावना, इन्नोवेशन और दृढ़ संकल्प की शक्ति का प्रमाण है.