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कर्ज न चुकाने वालों को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ( Punjab and Haryana High Court) ने याचिका पर फैसला(Decision) सुनाते हुए कहा कि ओटीएस के तहत तय समय में याची ने 80 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया। यह दिखाता है कि याची की मंशा भुगतान करने की है।

 
Big decision of Punjab and Haryana High Court regarding loan defaulters
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा: कर्जदार की नीयत सही है तो दी जानी चाहिए भुगतान के समय में रियायत

HR BREAKING NEWS कर्ज भुगतान में विफल रहने पर वन टाइम सेटलमेंट (one time settlement) के तहत भुगतान के लिए अवधि को बढ़ाने का न्यायालय को अधिकार है।

यदि कर्जदार की नीयत सही है और वह केवल भुगतान को कुछ समय मांग रहा हो तो उसे यह रियायत मिलनी चाहिए। चंडीगढ़ (Chandigarh) की एक कंपनी की याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश जारी किया है।

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याचिका में राजिंदरा इलेक्ट्रॉनिक कंपनी ने बताया कि बैंक ने उन्हें 2012 में 15 करोड़ की कैश लिमिट (cash limit) दी थी। इसकी एवज में कुछ संपत्तियों को गारंटी के तौर पर रखा गया था। याची ने इस राशि में से 13 करोड़ रुपये निकाले थे।

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विश्व भर में मंदी की वजह से याची इस राशि का भुगतान (Payment) नहीं कर पा रहा था। इस वजह से बैंक ने अखबार में नोटिस निकाल कर संकेतिक कब्जा ले लिया था। इसके बाद बैंक और याची कंपनी के बीच वन टाइम सेटलमेंट राशि 10 करोड़ रुपये तय की गई। इस राशि का याची को 21 मई, 2018 तक भुगतान (Payment) करना था।

याची तय समय पर पूरी राशि का भुगतान नहीं कर सका और बैंक से इसके लिए कुछ मोहलत मांगी जिसे बैंक ने नामंजूर कर दिया। बैंक (Bank) ने उसकी संपत्ति की नीलामी का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट की शरण ली। 


हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ओटीएस के तहत तय समय में याची ने 80 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया। यह दिखाता है कि याची की मंशा भुगतान करने की है। यह सही है कि ओटीएस में तय अवधि में भुगतान करने पर यह समझौता खत्म हो जाता है लेकिन कोर्ट को यह अधिकार है कि यदि याची की मंशा सही है और वह भुगतान करने को तैयार है तो उसे मोहलत देने का आदेश दे।