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हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों का एक गुट दौड़ाएगा बसें, दूसरा करेगा विरोध, बिगड़ सकता है माहौल

Haryana Roadways Employees News : हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों में खीचंतान अब सबके सामने आ गई है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की यूनियन दो फाड़ हो गई है।
 
Haryana Roadways Strike News and date

HR BREAKING NEWS हरियाणा में 28 और 29 मार्च को रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल है। प्रदेश में रोडवेज कर्मचारियों की 12 यूनियन हैं, परंतु दो यूनियन इस हड़ताल में भाग नहीं ले रही हैं। एससी इम्प्लॉइज संघर्ष समिति और हरियाणा वर्कशाप यूनियन। इसका कारण 22 नवंबर 2021 को हुई बैठक में एससी इम्प्लॉइज संघर्ष समिति और रोडवेज डीजी के बीच तीखी गहमागहमी होना। एससी इम्प्लॉइज यूनियन ने डीजी पर जातिसूचक शब्द बोलने का आरोप लगाया।


प्रदेश की बाकी रोडवेज यूनियन ने डीजी के पक्ष में बयान दिए। एससी इम्प्लॉइज यूनियन बाकी यूनियनों से अलग हो गई। ऐसे में 28 और 29 मार्च की हड़ताल के दौरान इन यूनियन के कर्मचारी बसें चलाएंगे, जबकि बाकी यूनियन कर्मचारी बसे रोकने का प्रयास करेंगे, जिससे टकराव होने की आशंका है। हरियाणा में रोडवेज के बेड़े में करीब तीन हजार बसें शामिल हैं। इसमें करीब 16 हजार कर्मचारी काम करते हैं।


रोडवेज यूनियन ने सांझा मोर्चा बनाकर 28 मार्च व 29 मार्च की हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान नेता जयवीर घणघस का कहना है कि सांझा मोर्चा में 10 यूनियन शामिल हैं। 27 मार्च को रात 12 बजे के बाद कर्मचारी डिपो गेट पर तालाबंदी करके बैठ जाएंगे। दो यूनियन यदि उनके संघर्ष में शामिल नहीं है तो इससे कोई फर्क नहीं होगा।


वहीं एससी इम्प्लॉइज संघर्ष समिति ऑफ हरियाणा के राज्य प्रधान मनोज चहल का कहना है कि सांझा मोर्चा ने उनकी यूनियन की मांगें मांग पत्र में शामिल नहीं की। वे सरकार के साथ हैं। वहीं 22 नवंबर की मीटिंग में महानिदेशक द्वारा हमारी यूनियन को जाति सूचक शब्द बोले गए थे। तब भी दूसरी यूनियन वालों ने हमारा साथ नहीं दिया। दूसरी यूनियन वाले अधिकारियों की चापलूसी करते हैं, इसलिए हम उनके साथ नहीं है। हमने कैथल में 22 मार्च को प्रदेश स्तरीय मीटिंग करके हड़ताल में न शामिल होने का फैसला लिया।

 

यूनियन की यह है मांग


निजीकरण की अलग-अलग पॉलिसी लागू का विरोध, अंतर्राज्यीय रूटों पर 20 प्रतिशत, अंतर जिला रूटों पर 50 प्रतिशत एवं लोकल रूटों पर प्राइवेट बसें चलाने की योजना, किलोमीटर स्कीम और 2016-17 पॉलिसी रद्द कर विभाग के निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाने, विभाग में 10 हजार सरकारी बसें शामिल करने, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, सभी खाली पदों पर पक्की भर्ती करने, परिचालक व लिपिक का वेतनमान 35400 करने, 1992 से 2003 के मध्य लगे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने, सभी कर्मचारियों को 5000 रुपए जोखिम भत्ता देने, कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी स्केल देने व कम किए अवकाश पहले की तरह लागू करने, 

सभी कर्मचारियों को एक माह के वेतन के समान बोनस देने, कोरोना महामारी के दौरान बसें खड़ी रहने व डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए विभाग को 2000 करोड़ रूपए का पैकेज देने, आरक्षित श्रेणी कर्मियों का प्रमोशन में रोस्टर प्रणाली लागू कर बैकलॉग पूरा करने, पंजाब, हिमाचल व डीटीसी की तर्ज पर चालकों की प्रमोशन करने, लिपिकों व डी ग्रुप कर्मचारियों सहित सभी श्रेणियों के खाली पड़े पदों पर प्रमोशन करने की मांग है।


हरियाणा निवास में हुआ था हंगामा


22 नवंबर 2021 को रोडवेज कर्मचारी यूनियन की मांगों को लेकर सरकार ने मंत्री मूलचंद शर्मा के साथ कर्मचारियों की मीटिंग हरियाणा निवास में बुलाई। इसमें करीब 14 रोडवेज यूनियन शामिल थी। इस मीटिंग में एससी यूनियन के इम्प्लॉइज की मंत्री और रोडवेज महानिदेशक के साथ बहस हो गई। 


यूनियन का दावा है कि महानिदेशक ने उन्हें जाति सूचक शब्द बोले। इसकी शिकायत सेक्टर तीन के थाने में दी गई। राष्ट्रीय दलित आयोग को भी भेजी गई। दलित नेताओं के बयान दर्ज किए गए। रोडवेज की प्रधान सचिव ने भी इस पर जांच बैठाई और सभी यूनियन के बयान दर्ज किए।

रोडवेज की करीब 13 यूनियन ने इन आरोपों को झूठा बताया और अपने बयान डीजी के पक्ष में दर्ज करवाए, जिस कारण रोडवेज एससी इम्प्लॉइज यूनियन ने दूसरी यूनियन से किनारा कर लिया। इसलिए रोडवेज के अनुसूचित जाति के कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल नहीं होंगे।