हरियाणा के ‘मिड-डे-मील’ वर्करों के लिए खुशखबरी, सैलरी में हुआ बंपर इजाफा
HR Breaking News, चंडीगढ़ | हरियाणा के मिड-डे-मिल वर्करों (mid-day-mill workers) के लिए खुशखबरी है. हरियाणा सरकार ने मिड-डे-मिल वर्करों की सैलरी दोगुनी (salary doubled) कर दी है. यानी कि जितनी सैलरी इन वर्करों को मिल रही थी, अब उन्हें दोगुनी सैलरी हरियाणा सरकार (haryana sarkar) द्वारा दी जाएगी. हरियाणा सरकार ने एक आदेश जारी कर कहा है कि मिड-डे वर्करों को अब 3500 रूपये की बजाय अब 7 हजार रूपये दिए जाएंगे. प्रदेश सरकार ने सीधे 3500 रुपए का इजाफा किया है.
बताते चलें कि पिछले लंबे समय से मिड डे वर्करों द्वारा अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था. वर्करों की मांग थी कि सरकार उनके साथ नाइंसाफी कर रही है. सरकार ने वर्करों की मांगों को देखते हुए उनकी सैलरी में इजाफा कर बड़ी राहत प्रदान की है.क्या है मिड डे मील योजना
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यह योजना 15 अगस्त 1995 को शुरू की गई थी और सबसे पहले इस योजना को 2000 से अधिक ब्लॉक के स्कूलों में लागू किया गया था. इस योजना की सफलता के बाद वर्ष 2004 में यह योजना पूरे देश के सरकारी स्कूलों में लागू की गई थी और इस समय यह योजना हमारे देश के सभी सरकारी स्कूलों में चल रही है.
यह योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक योजना है, जिसके माध्यम से स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को खाने के लिए पौष्टिक भोजन दिया जाता है.यह योजना हमारे देश में कई वर्षों से चल रही है और यह योजना हर राज्य के सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही है. इस योजना के तहत प्रतिदिन करोड़ों बच्चों को स्कूल में भोजन उपलब्ध कराया जाता है.
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योजना का बजट
प्रत्येक पंचवर्षीय योजना में मिड डे मील योजना से संबंधित बजट सरकार द्वारा तय किया जाता है. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने योजना के लिए 9 अरब का बजट निर्धारित किया था.जबकि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने इस योजना के लिए 901.55 अरब का बजट रखा था.
इस योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं. इस योजना पर होने वाले खर्च में से 60 फीसदी केंद्र सरकार को और 40 फीसदी राज्यों को देना होता है. केंद्र सरकार खाद्यान्न और वित्तपोषण प्रदान करती है, जबकि संघीय और राज्य सरकारें सुविधाओं, परिवहन और श्रम की लागत वहन करती हैं.
