Haryana में नई कॉलोनी विकसित करने के नियम बदले, जानें ए टू जेड प्रक्रिया
haryana new colony policy 2026 - हरियाणा में तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है और लोगों को बेहतर आवासीय सुविधा देने के लिए नई कालोनियां बसाई जा रही हैं। नई कॉलोनी में प्लाट और फ्लैट खरीदने वाले लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके। इसके लिए समय-समय पर नई कॉलोनी (New Colony) विकसित करने के नियमों में बदलाव किया जाता है। हरियाणा में अब नई कॉलोनी डेवलप करने के नियमों को अपडेट किया जाएगा। चलिए नीचे खबर में जानते हैं इसके बारे में ए टू जेड।
HR Breaking News - हरियाणा के किसी शहर की नई कॉलोनी में प्लाट या फ्लैट लेने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है। दरअसल हरियाणा के शहरी क्षेत्र में नई कालोनियां डेवलप करने के नियम (New Colony Rules) अब और ज्यादा कड़े होने वाले हैं। हाल ही में किए गए इन बदलाव से कॉलोनी डेवलप करने वालों की जवाबदेही बढ़ेगी। इसके साथ ही प्लाट और फ्लैट खरीदने वाले लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उनके साथ धोखाधड़ी होने के चांस काफी कम हो जाएंगे।
नियमों में बदलाव का प्रारूप जारी - (colony rules)
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास (haryana new colony policy 2026) तथा विनियमन नियमों में बदलाव का प्रारूप जारी कर दिया है और 30 दिन में आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित संसाधनों में कॉलोनी लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया कर्मियों को दूर करना, लेआउट प्लान तैयार करना, लाइसेंस अस्वीकार करने और पर्यावरण अनुकूल कॉलोनी के लिए कई नई शर्तें प्रस्तावित हो गई हैं। आपत्ति या सुझाव लिखित रूप में नगर तथा ग्राम योजना विभाग के निदेशक कार्यालय में प्राप्त किए जाएंगे।
6 में होंगे ये बदलाव -
प्रारूप के अनुसार, नियम - 6 में बदलाव करने की योजना है। इसके तहत भूमि मालिक आवेदन करते समय कुछ निर्धारित योजनाएं और डॉक्यूमेंट निर्देशक से तैयार करने का अनुरोध कर सकेंगे। इसके लिए 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से शुल्क देना होगा। इससे आवेदन के लिए जरूरी लेआउट प्लान एवं संबंधित डॉक्यूमेंट तैयार करने का विकल्प उपलब्ध होगा।
नियम -7 ये बदलाव प्रस्तावित - (Haryana News)
नियम -7 में प्रस्तावित बदलाव के मुताबिक, निर्धारित फार्म के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट और प्लान लगाए बिना आवेदन वैध नहीं माना जाएगा। हालांकी आवेदन में कमी पाए जाने पर उन्हें दूर कर 2 महीने के अंदर फिर से आवेदन जमा करने पर डॉक्यूमेंट जांच फीस जब्त नहीं होगी। विभाग को आवेदन मिलने के 3 महीने के अंदर अपनी टिप्पणीयां बतानी होंगी।
6 महीने के अंदर डॉक्यूमेंट जांच होने पर आवेदन किया जा सकता है कैंसिल -
अगर आवेदक 2 महीने के अंदर सभी कर्मियों को दूर कर देता है और नियमों का पालन (haryana new colony policy) करता है तो एलसी-1 फार्म में आवेदन कर डॉक्यूमेंट जांच की फीस जब्त करते हुए प्रोसेस आगे बढ़ाई जाएगी। अगर निर्देश आवेदक से संतुष्ट नहीं होते तो आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 6 महीने के अंदर उसे अस्वीकार किया जा सकेगा।
नियम 9 में बदलाव प्रस्तावित - (new colony policy)
नियम 9 में भी बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत निदेशक जांच करने और आवेदक को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद लिखित आदेश से लाइसेंस आवेदन ऐसे स्वीकार कर सकेंगे। आवेदन का निर्धारित नियमों के अनुरूप न होने पर विकास कार्यों के प्लान और डिजाइन का तकनीकी रूप से मजबूत एवं कार्य योग्य न होना या जलापूर्ति तथा बाहरी सीवर संबंधी अनुमानित खर्च का कॉलोनी के आकार के रूप में होने पर आवेदन कैंसिल किया जा सकेगा।
कॉलोनी विकसित करते समय पर्यावरण का रखना होगा पूरा ध्यान -
आबादी को देखते हुए कॉलोनी (haryana new colony rule Update) में ज्यादा से ज्यादा मकान बनाए जाने चाहिए और इसके साथ ही पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। कॉलोनी में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाने चाहिए। इसके साथ ही बारिश के पानी का भंडारण पानी का शुद्धिकरण और जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था भी होनी चाहिए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था, खेती, फ्लशिंग और घरेलू जरूरत को ध्यान में रखते हुए कॉलोनी में पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। कॉलोनी में जैविक कचरे के उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए कंपोस्ट प्लांट स्थापित होना चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था में आवासीय घनत्व को अधिकतम 25 व्यक्ति प्रति एकड़ तक सीमित करने का भी प्रावधान होना। चाहिए।
डॉक्यूमेंट के साथ देनी होगी ये जानकारी -
LC-1 Form में भूमि मालिक, डेवलपर, जमीन का क्षेत्रफल, राजस्व संपदा, तहसील, जिला, सेक्टर और विकास योजना समेत विस्तृत जानकारी मांगी गई है। भूमि से संबंधित रजिस्टर्ड बिक्री विलेख, mutation, जमाबंदी और सजरा प्लान जैसे दस्तावेज भी संलग्न करने होंगे। डेवलपर को अपने पूर्व लाइसेंसों और अन्य कानूनों के तहत मिली अनुमतियों की जानकारी भी देनी होगी।
जमीन पर किसी तरह का रहन/गिरवी, पट्टा या लीज है या नहीं।
जमीन से संबंधित कोई मुकदमा या न्यायालय का आदेश है या नहीं।
जमीन किसी अधिग्रहण में शामिल है या नहीं।
भूमि मालिक या सहयोगी डेवलपर के खिलाफ दिवालियापन की कार्रवाई चल रही है या नहीं।
कॉलोनी तक मौजूदा और प्रस्तावित सड़क संपर्क का विवरण।
डेवलपर की पूर्व कॉलोनियों, लाइसेंस और बकाया राशि का विवरण।
इंजीनियर, आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर जैसे तकनीकी विशेषज्ञों की जानकारी।
आवेदक को क्षतिपूर्ति बांड भी देना होगा। इसमें आवेदन में गलत जानकारी, तथ्यों को छिपाने, राजस्व डॉक्यूमेंटों में विसंगति या सरकारी एजेंसी द्वारा किए जाने वाले बाहरी विकास कार्यों में देरी से होने वाले नुकसान से विभाग को सुरक्षित रखने का प्रविधान है।
