अब किराए पर मिल रहे संगी साथी, इन शहरों में चला नया ट्रेंड
pay for partner : हर किसी का सपना होता है कि उन्हें एक ऐसा जीवनसाथी मिले जो उनका जीवनभर साथ निभाए, सुख दुख में उनका साथ दें, उनकी केयर करें। आज तेजी से बदलती जीवनशैली में ये सभी गुण एक ही व्यक्ति में मिलें। इसी बीच एक ट्रेंड चल पड़ा है कि अब किराए पर संगी साथी मिल रही है। आइए जानते हैं कौन से शहर में ये ट्रेंड चल रहा है।
HR Breaking News (rental partner) लगातार बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती अकेलापन की भावना के बीच अब एक ट्रेंड लगातार तेजी से बना हुआ है। बता दें कि अब लोग संगी साथी भी किराए (Latetst Update on rental partner) पर लेने लग गए हैं। इसकी वजह से उन्हें इवेंट्स, घूमने या बातचीत के लिए साथ मिल जाता है। ऐसा खासतौर पर बड़े शहरों में हो रहा है। यहां पर लोग इस नई सुविधा को अपनाकर अपनी सामाजिक जरूरतों को पूरा कर लेते हैं।
अकेलेपन दूर करने के लिए लोग तलाश कर रहे हैं संगी साथी
लगाततार बदलती जीवनशैली और तेज रफ्तार से जिंदगी के बीच बन रहा अकेलापन सिर्फ व्यक्तिगत या मनोवैज्ञानिक समस्या नहीं रह गया है। बल्कि कई स्टार्ट-अप (rental partner start-up) ने इसे व्यवसायिक मौको में भी बदल दिया है। महानगरों में लोग अकेलेपन को दूर करने के लिए किराये पर संगी-साथी की तलाश रहे हैं।
लगातार बढ़ रहा है चयन
बता दें कि ये चलन ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ (Loneliness Economy) के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। यहां पर लोग वास्तविक बातचीत, साथ बैठने और सामाजिक जुड़ाव के लिए लोग ढूंढ रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने बताया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत लोगों को आपस में जुड़े रहने का भ्रम तो दिया है, हालांकि आमने-सामने की बातचीत की कमी ने भावनात्मक (Loneliness Economy Kya hoti h) दूरी को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। देखा जाता है लोग नौकरी की वजह से शहर बदलना, परिवार से दूर रहना और सीमित सामाजिक दायरे ने अकेलेपन को और गहरा किया जा रहा है।
सामाजिक एक्सपर्ट्स ने दी जानकारी
सामाजिक एक्सपर्ट्स ने बताया है कि ये रुझान इस बात की ओर संकेत कर रहा है कि अब लोग डिजिटल लाइक्स और चैट से आगे बढ़कर इंसानी संवाद (Loneliness Economy Latest Update) को प्राथमिकता देना पसंद कर रहे हैं। इसके साथ साथ दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और कोलकाता जैसे शहरों में ऐसे पेड सोशल मीटअपऔर संवाद सत्र भी काफी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। इन आयोजनाओं (Loneliness Economy) के तहत शामिल लोग डेटिंग की बजाय सम्मानजनक और सुरक्षित संगति की चाह रख रहे हैं। इस स्थिति में लोग खुलकर बात कर सकेंगे और उनकी बातों को भी सुन सकेंगे।
युवाओं में बढ़ रही है डिप्रेशन की परेशानी
इसके साथ साथ डिप्रेशन की वजह से लोग नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों की वजह से लोग कस्बों या गांवों से आकर महानगरों में शिफ्ट हो रहे हैं। इस स्थिति में लोग अकेलेपन (partner on rent) के कारण भी गंभीर मानसिक समस्या का सामना कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने बताया है कि ऐसे में लोग डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।
लोनलीनेस इकॉनमी इस बात की ओर कर रही है इशारा
इस उभरती ‘लोनलीनेस इकॉनमी’ से इस बात की ओर इशारा मिल रहा है कि अब सिर्फ डिजिटल जुड़ाव से संतुष्ट नहीं हैं। वे ऐसे ऑफलाइन आयोजन (Rental Partner) की भी चाह रहे हैं जहां पर वे जीवन, रिश्तों, डर और भावनाओं पर बिना किसी झिझक के बात की जा सकती है।
सुरक्षा और भरोसे को लेकर रहेगी प्राथमिकता
- इस स्थिति में आयोजनों में प्रतिभागियों की संख्या सीमित रहती है, इससे बातचीत करना काफी आसान हो रहा है।
- इसके साथ प्रवेश (Rental Partner Update) के लिए टिकट होता है, इसकी वजह से गंभीर लोगों को ही शामिल किया जाएगा।
- इन आयोजनों में सुरक्षा को खासतौर पर प्राथमिकता दी जा रही है।
- प्रतिभागियों का चयन स्क्रीनिंग कॉल (Rental Partner News) या सिफारिशों के माध्यम से किया जा सकता है।
- कई प्लेटफॉर्म डेटिंग को सख्ती से प्रतिबंधित भी कर रहे हैं।
- आईडी का सत्यापन और पृष्ठभूमि की भी जांच की जाती है।
