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Parenting Tips : अगर आपके बच्चों को भी लग गई हैं मोबाइल की लत, तो ऐसे छुडाएं ये आदत

Parenting Tips : आज के समय में कम उम्र के बच्चें फोन का बेहद अधिक इस्तेमाल करते हैं। और इसमें कुछ गलति माता - पिता की भी होती हैं। अक्सर आपने देखा होगा की हम कुछ काम करते समय बच्चों को बहलाने के लिए उसको फोन दे देते हैं। और आपको बता दें कि ये हमारी सबसे बड़ी गलती हैं। क्योंकि बच्चें धीरे - धीरे इस आदत में शुमार हो सकता है। और फीर इस आदत से बच्चों की सेहत और दिमाग पर बुरा असर पड़ने लगता हैं। लेकिन बच्चों की गलत आदत को छुड़ाने के लिए पेरेंट्स को सभी कोशिशें करनी चाहिए। जानिए कैसे छुडाएं ये आदत....
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HR Breaking News, Digital Desk - आज के दौर में ज्यादातर बच्चे स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप समेत कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का खूब इस्तेमाल करते हैं। इससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर काफी (Impact on children's health) प्रभाव पड़ता है। स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चे इसके आदी हो जाते हैं और बिना मोबाइल के खाना भी नहीं खाते हैं। हालाँकि, ऐसा करना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। तो अब सवाल यह हैं कि बच्चों की (bacho ki phone ki aadat kese chuvaye) इस लत को कैसे छुडाएं...

आपको बता दें कि एक अध्ययन के मुताबिक, 2 साल से कम उम्र के 90 फीसदी बच्चे स्मार्टफोन देखकर खाना (bache phone dekhkar khana khate hai) खाते हैं। ज्यादातर मां अपने बच्चे को तब मोबाइल फोन देती हैं जब वह खाना नहीं खाता है और उन्हें लगता है कि उनका काम आसान हो गया है। 

जानकारी के लिए बता दें कि बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करने वाली निधी राज डेढ़ साल के बच्चे की मां हैं। वह बताती हैं कि वह पूरी कोशिश करती हैं कि वह खाना खिलाते वक्त अपने बच्चे को मोबाइल न दें। जब वह दो-चार दिन अपने बच्चे को मोबाइल नहीं देती हैं तो बच्चे में काफी बदलाव दिखते हैं। वह खुद ही काफी कुछ नया सीखता है। 

क्या पड़ता है असर:-
 
-बच्चा मोबाइल देखते-देखते जब खाना खाता है तो वह समझ नहीं पाता कि उसे कितनी भूख है और वह बस खाता जाता है, जिससे बच्चा कई बार ज्यादा खा लेता है और बीमार हो जाता है।

-मोबाइल देखकर खाने से बच्चा खाने का मजा नहीं लेता। वह नहीं समझ पाता कि खाना अच्छा बना है या नहीं। कई बार तो उसे यह तक याद नहीं रहता कि उसने क्या खाया था।

-मोबाइल से दोस्ती होने के बाद उसे माता-पिता नहीं चाहिए होते हैं। मां उसे खाना खिला रही है, वह उसकी तरफ देखता भी नहीं है, बल्कि मोबाइल को स्क्रॉल करता है, जो उसके मानसिक विकास के लिए घातक है।

-इसके अलावा बच्चे का मेटाबॉलिज्म भी कमजोर होता है, क्योंकि वह खाना चबाकर नहीं खाता, बल्कि मुंह में डालते ही निगल लेता है। इससे उसकी पाचन शक्ति कमजोर (weak digestion power) होती जाती है।
-यही नहीं, बच्चा जब करीब से फोन देखता है तो इससे उसकी आंखें कमजोर होती हैं और दिमाग पर भी इसका बुरा असर पड़ता है।

-इसके साथ ही बच्चे की रचनात्मकता में भी कमी आती है। मोबाइल देखने की वजह से (phone ki vajah se bahar na jana) वह बाहर की चीजों से कट जाता है। वह जो सीखता है, मोबाइल से ही सीखता है। सामाजिक बातें सीखने का उसे मौका ही नहीं मिलता है।
 


उपाय भी जान लें:-

अगर माता-पिता ही बच्चों के सामने हर वक्त मोबाइल का इस्तेमाल करेंगे या फिर खाते वक्त उनके हाथ में मोबाइल होगा तो बच्चे भी वही देखेंगे और सीखेंगे। इसलिए पहले खुद में सुधार लाएं।
खाने में हर वक्त कुछ नया ट्राई करें, ताकि बच्चों को भी उसमें मजा आए, वे भोजन का आनंद लें।
उन्हें खाने के साथ खेलने दें, ताकि वे खाने की चीजों को समझ भी सकें।
खाने के समय बच्चों के साथ बातचीत करें, उन्हें अलग-अलग रंग दिखाएं और उन से खाने के बारे में पूछें। इससे वे खाने का मजा लेंगे और खाने का स्वाद, रंग, खुशबू एवं खाने की पहचान करने में सक्षम होंगे।
इसके अलावा कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान (pregnancy ke doran phone dekhna) आप जो भी करती हैं, बच्चे पर उसका असर पड़ता है और वह वही चीजें ज्यादा करता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गैजेट या स्क्रीन का इस्तेमाल कम से कम करें।

विकास में बाधक:-

दिल्ली के जग प्रवेश चंद्र अस्पताल के बाल रोग विभाग (Pediatrics Department) में सीनियर रेजिडेंट डॉ. नौशीन सिद्दीकी (Dr. Nausheen Siddiqui) का कहना है कि आजकल स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चों में कई तरह की बीमारियाँ बढ़ रही हैं, जैसे ऑटिज्म और एडीएचडी यानी ध्यान की कमी जैसी समस्याएं। मोबाइल फोन दिखाकर खाना खिलाने पर अभिभावकों को भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

इससे बच्चे का विकास रुक जाएगा और वह मोबाइल देखने का आदी हो जाएगा। इतना कि उसे खाना खाने का यह तरीका सही लगने लगेगा और वह आभासी दुनिया को सामाजिक दुनिया से ज्यादा सच्चा मानने लगेगा। इसलिए, आप जितनी कम उम्र में उनका स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करेंगे, बच्चे के विकास के लिए उतना ही बेहतर होगा।