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विदेशों तक फेमस है मुगल काल में बनें Delhi के ये बाजार, जान लें किसने रखी नींव, क्या है खासियत

Delhi Market : वैसे तो दिल्ली में ऐसे कई मार्केट है, जो शापिंग के लिहाज से बेस्ट माने जाते हैं। यहां हर एक मार्केट अपनी किसी न किसी विशेषता के चलते दुनियाभर में विख्यात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली का एक बाजार  (Delhi market Updates) ऐसा भी है, जो विदेशों तक फेमस है और ये बाजार मुगल काल में बना गया है। आइए खबर में जानते हैं दिल्ली के इस  मार्केट के बारे में ओर किसने इस मार्केट की नींव रखी है।
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विदेशों तक फेमस है मुगल काल में बनें Delhi के ये बाजार, जान लें किसने रखी नींव, क्या है खासियत

HR Breaking News : (Delhi Market) ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली दिलवालों की है और इसी दिलवालों की नगरी में कई पुराने बाजार मौजुद ह, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में पुराने बाजारों का एक अलग ही महत्व है। आज हम आपको दिल्ली की ऐसे ही पुराने बाजार (Delhi old market) के बारे में बताने वाले हैं, जिसका निर्माण मुगल काल में किया गया था और ये आज भी विदेशों तक काफी लोकप्रिय है। आइए खबर में जानते हैं इस मार्केट के बारे में और इस मार्केट की खासियत के बारे में।

 

 

कौन सा है ये बाजार
 

दिल्ली का ये बाजार (Delhi Old market) मुगल शासक ने सन 1650 में बनाया था। बता दें कि करीब चार सौ सालों में इस बाजार ने समय बीतने के साथ ही भले अपना रूप बदल लिया हो, लेकिन इसकी महत्तवता आज भी उतनी ही है। दरअसल, आपको बता दें कि इस बाजार की स्थापना आज से करीब चार सौ साल पहले हुए थी और ये बाजार चांदनी चौक के नाम से जाना जाता है। 

कैसे रखी गई थी इस बाजार की नींव


इतिहास को देखें तो चांदनी चौक बाजार (Delhi ka Chandni Chowk) को शाहजहां ने अपनी बेटी जहांआरा के लिए बनवाया था। ऐसा कहते हैं कि शाहजहां की बेटी जहांआरा को शॉपिंग करना बेहद पसंद था। वह कई मार्केट में में जाकर अपने लिए तरह-तरह की चीजें खरीदती थी। शाहजहां को इसकी जानकारी मिलते ही उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक खास बाजार बनाने की तैयारी की और फिर उनकी बेटी ने खुद इस बाजार का डिजाइन तैयार किया। इस तरीके से दिल्ली के सबसे पुराने बाजार की शुरुआत हुई। 

ऐसे पड़ा इस मार्केट का नाम चांदनी चौक


आपके मन में यह सवाल तो जरूर आया होगा कि आखिर चांदनी चौक बाजार (Delhi ka purana bajar) को ये नाम क्यों दिया गया है तो बता दें कि इस बाजार का नाम चांदनी चौक पड़ने के पीछे की कहानी काफी रूचिमय होने वाली है। दरअसल, जब इस बाजार का निर्माण किया जा रहा था तो इसका आकार आधे चांद जैसा था और इस बाजार (Delhi Chandi Chowk market) में नहर और तालाब भी थे, जिस पर चांद की रोशनी पड़ती थी तो ये पूरा का पूरा मार्केट बाजार चांदनी से जगमगा उठता था। इस वजह से इस बाजार का नाम चांदनी चौक रखा गया था। 


किन कारणों से मशहुर है चांदनी चौक 


चांदनी चौक बाजार (Chandni Chowk Market Updates) तो आज भी समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच खूब फेमस है। ये अपने किफायती दामों के चलते दुनियाभर में मशहुर है। आप इस बाजार से अलग-अलग सेगमेंट्स की चीजें सस्ती दरों पर खरीद सकते हैं। खासतौर पर ये बाजार चांदी के गहनों, इत्र, किताबों, स्टेशनरी, मसालों, लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के लिए खूब जाना जाता है।

हालांकि, अब चांदनी चौक बाजार (Chandni Chowk Market) के पास अलग-अलग बाजार भी बन गए हैं लेकिन पहले ये सभी बाजार चांदनी चौक बाजार का एक पार्ट हुआ करते थे।
बता दें कि चांदनी चौक बाजार (Chandni Chowk Market) एशिया और यूरोप के दूसरे देशों तक फैला हुआ है। जो व्यापारी विदेश से आते हैं, वो भी इस बाजार में आते रहे हैं। यहां कई तरह के सामान को एक्सपोर्ट किया जाता है। ये बाजार अपनी गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। 

चांदनी चौक की खासीयत भी जान लीजिए


बता दें कि चांदनी चौक (Chandni Chowk) के पास ही लाल किला मौजुद है, जो दिल्ली की ऐतिहासिक स्मारक है। इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया है। लाल किले में जो म्यूजिक और लाइट शो आयोजित किए जाते है, वो इसकी भव्यता को और बढ़ा देते हैं। वहीं, शाम के वक्त लाइट और म्यूजिक के बीच इतिहास की कई कहांनिया सुनाई जाती है।

शीशगंज गुरुद्वारा भी खूब आते हैं श्रद्धालु 


इसके साथ ही आपको बता दें कि चांदनी चौक के बीचों बीच बना गुरुद्वारा शीशगंज साहिब (Gurdwara Sheeshganj Sahib) भी दुनियाभर में मशहुर है। गुरुद्वारा शीशगंज साहिब एक पवित्र और एतिहासिक स्थान है। इसका निर्माण नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की याद में किया गया था। यहां जो भी श्रद्धालु आते हैं, वो यहां के मधुर कीर्तन जरूर सुनकर जाते हैं।