Delhi के कश्मीरी गेट नाम के पीछे की ये है स्टोरी, यहां से लाए गए थे दरवाजे
Delhi news : दिल्ली का कश्मीरी गेट एक एतिहासिक जगह है। इस गेट के नाम के पीछे कई राज छिपे हुए हैं। बहुत से लोगों को इसके नाम को लेकर भी कन्फयूजन है। आइए जानें इसके पीछे की रहस्यमयी कहानी।
HR BREAKING NEWS (ब्यूरो) : दिल्ली घूमने की एक खास जगह बन चुकी है। यहां विदेश से भी लोग घूमने के लिए आते हैं। यहां कपड़ों की मार्केट भी लोगों को खूब आर्कषक करती है। दिल्ली को सस्ती कपड़ों के बाजारों (delhi cheapest market) के कारण भी जाना जाता है। दिल्ली (delhi news) में देखने के लिए बहुत सी पुरानी जगहें भी है जिनको देखने के बाद आपको देश का इतिहास याद आ जाएगा। यहां का कुतुब मीनार देख लें, लाल किला देख लें या फिर मशहूर इमारतें देख लें, ऐसा कुछ नहीं है, जो दिल्ली को एक बेहतर टूरिस्ट प्लेस की लिस्ट में पीछे कर दे। दिल्ली घूमने के लिए एक बेस्ट प्लेस बन चुका है।(delhi tourist place)
(famous place in delhi)आज हम आपको दिल्ली की एक फेम्स जगह के बारे में बताने वाले हैं जो हमेशा चर्चा में रहती है। इस जगह का नाम है दिल्ली का कश्मीरी गेट। यह जगह लोगों में हमेशा चर्चा का विषय रही है। इसको लेकर लोगों के दिमाग में हमेशा सवाल रहे कि इसका नाम कशमीरी गेट (kashmiri gate delhi) क्यों है। या इसका कोई कश्मीर से भी तालुकात है। अगर आपको दिमाग में भी ऐसे ही सवाल खटक रहे हैं तो चलिए आपको आज इसके पूरी कहानी बताते हें।
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दिल्ली के इस दरवाजे का नाम कश्मीरी गेट कैसे पड़ा
इस दरवाजे के पीछे कई कहानियां हैं। अनुसार, इस इलाके को शहानाबाद भी कहते हैं। दिल्ली का यह इलाका सबसे ऐतिहासिक दीवारों वाले शहर का उत्तर द्वार है। इस गेट को मुगल शाहजहां ने बनवाया था। इसका नाम कश्मीरी गेट (kashmiri gate) इसलिए रखा गया क्योंकि इस गेट के बाद एक सड़क की शुरूआत होती है जो कश्मीर की ओर जाती है। उनके अनुसार, यही कारण है कि इस जगह का नाम ये रखा गया। दिल्ली के इस शहर में 14 दरवाजे थे। इनमें से कश्मीरी गेट सबसे महत्वपूर्ण दरवाजा था, क्योंकि यह दिल्ली के लाल किले (red fort delhi) से सीधे जुड़ता था।
स्वतंत्रता सेनानी और अंग्रेजों के बीच का युद्ध। लाल किले में आने के लिए अंग्रेजों को इस गेट से गुजरना था इसलिए अग्रेजों ने इस किले को अपने कब्जे में ले लिया। इस गेट का निर्माण फिर से किया गया, उस समय सैन्य इंजीनियर राबर्ट स्मिथ ने इस गेट को 1835 में बनवाया था। जब आप इस किले की सैर करने जाएंगे तो आपको यहां कई बाजार भी देखने का मिल जाएंगे। बता दें, पुरानी दिल्ली का रेलवे स्टेशन भी इसी गेट पर स्थित है, इसे आसपास के एरिया को कश्मीरी गेट कहते हैं।
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दिल्ली के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आती है ये जगह
दिल्ली की ये जगह सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ मानी जाती है। यहाँ पर एक महत्वपूर्ण इंटरस्टेट बस अड्डा है, जहाँ से देशभर के कई शहरों के लिए बसें प्राप्त होती हैं। इस बस अड्डे का महत्व उन यात्रीगण के लिए है जो नगर और गाँवों से आकर्षित होते हैं और वह विभिन्न स्थलों की ओर यात्रा करते हैं। यह अड्डा एक महत्वपूर्ण परिवहन हब है और लोगों के लिए सुविधाजनक है, क्योंकि यहाँ से बसें और ट्रेनें उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा, दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन का स्थानक भी यहाँ पर है, जो कई अन्य मेट्रो लाइनों से संबद्ध है। यह मेट्रो लाइन शहर के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ती है और लोगों को आसानी से सारे शहर में यात्रा करने की सुविधा प्रदान करती है। यह इलाका येलो, वॉयलेट, और रेड मेट्रो लाइन के साथ एक क्यूनेक्टेड है, जिससे लोगों को शहर के विभिन्न हिस्सों में जाने के लिए विशेष सुविधा मिलती है।
कई घूमने लायक ऐतिहासिक जगह भी हैं यहां
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यहां आपको पुरानी हवेलियों के खूबसूरत नजारे, जटिल वास्तुकला के साथ अच्छी-अच्छी इमारतें देखने को मिलेंगी। दारा शिकोह पुस्तकालय गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय पार्क में स्थित है, जो मुगल वास्तुकला का दावा करती है। इसका निर्माण शाहजहां के सबसे बड़े बेटे शिकोह द्वारा बनवाया गया था, ये जगह अब एक पुरातात्विक संग्रहालय का घर है। ब्रिटिश मैगज़ीन लोथियन रोड पर स्थित एक अन्य ऐतिहासिक इमारत है जिसका उपयोग ब्रिटिश हथियारों और गोला-बारूद को संग्रहीत करने के लिए किया जाता था। ब्रिटिश मैगज़ीन के नार्थ में टेलीग्राफ मेमोरियल है, जो साइट पर बनी एक लंबी ग्रे स्तंभ वाली संरचना है, जहां से ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा अंबाला को टेलीग्राफिक संदेश भेजे जाते थे।
