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गन्ने की नई किस्म के बीज हरियाणा में रिलीज, 8 अक्टूबर से होगा वितरण, 700 क्विंटल तक होगा उत्पादन

new variety of sugarcane : हरियाणा के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दरअसल, अब जल्द ही प्रदेश में गन्ने की नई किस्म (new variety of sugarcane) के बीज को रिलीज किया जाने वाला है और इस बीज का वितरण 8 अक्टूबर से किया जाने वाला है। गन्ने के इस नए बीज से 700 क्विंटल तक उत्पादन की उम्मीद है। खबर में जानिए गन्ने की ये नई किस्म कौन सी है और इससे कैसे बंपर उत्पादन ले सकते हैं।
 
गन्ने की नई किस्म के बीज हरियाणा में रिलीज, 8 अक्टूबर से होगा वितरण, 700 क्विंटल तक होगा उत्पादन

HR Breaking News (new variety of sugarcane) गन्ने के बंपर उत्पादन के लिए नई किस्म का बीज काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। अब जल्द ही हरियाणा के किसानों को भी गन्ने की नई किस्म के बीज (ganne ki nai kism ke beej) दिया जाने वाला है। अब यह 8 अक्टूबर को हरियाणा में रिलीज किया गया है। इस किस्म के साथ किसान गन्ने के साथ अंतरफसल ले सकते हैं। खबर में जानिए इस किस्म के बारे में विस्तार से-

लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी है नई किस्म


दरअसल, आपको बता दें कि गन्ना किसानों के लिए सीओएच-191 किस्म का बीज (Seed of COH-191 variety) 8 अक्टूबर से वितरित किया जाना है। चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा यह बीज विकसित किया गया है और इस किस्म के बीच को हरियाणा के लिए रिलीज किया गया है। विवि के गन्ना वैज्ञानिक का कहना है कि नई किस्म लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी है, जिसमें कीटों की समस्या कम रहती है। ऐसे में पौधों में मूढ़ा फुटाव बढ़िया होता है।

 

कैसे लाभदायक है गन्ने की यह किस्म 


एक अच्छी बात यह है कि इसे 4 फीट (COH-191 Seed Ke Fayde) चौड़े खूड में भी लगाया जा सकता है और ऐसी स्थिति में अच्छा उत्पादन भी मिल सकता है। इसकी ऊंचाई तकरीबन 20 से 22 फीट तक होने की संभावना है और लंबाई के बाद भी सामान्य परिस्थितियों में इसके गिरने की समस्या नहीं रहती है। सिर्फ तेज तूफान जैसे स्थिति में ही फसल गिर सकती है। यह किस्म कम उर्वरक में भी अपनी उत्पादन क्षमता बनाए रखने में सक्षम है।

 

सितंबर-अक्टूबर में बिजाई पर उपज


सीओएच-191 से वैसे तो 1 एकड़ में 500 से 550 क्विंटल तक उत्पादन (Production from COH-191) मिल सकता है। सितंबर-अक्टूबर में इसकी बिजाई करने पर उपज 700 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचने की संभावना है। विवि के वीसी, अनुसंधान निदेशक के मार्गदर्शन में गन्ना वैज्ञानिकों डॉक्टर सुधीर शर्मा, डॉक्टर मेहर चंद और डॉक्टर रमेश कुमार के साथ ही वैज्ञानिकों की टीम की ओर से 12 साल के अनुसंधान से यह किस्म तैयार की गई है।

कई राज्यों में चल रहा coh-191 का अनुसंधान ट्रायल 


किसानों को इस किस्म का बीज लेने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा और उसके लिए अपने संबंधित शुगर मिल, कृषि विज्ञान केंद्र से कांटेक्ट कर सकते हैं। बीवी द्वारा ब्रीडर सीड (breeder seed) उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में coh-191 के अनुसंधान ट्रायल अभी चल रहे हैं। इन परीक्षणों के रिजल्ट के बेस पर संबंधित राज्यों के लिए किस्म को रिलीज करने का प्रोसेस आगे बढ़ेगा।

कहां से वितरित किया जाएगा यह बीज 


विवि द्वारा अगले वर्ष तक दूसरे राज्य में भी इसे जारी करने की कोशिश की जा रही है। बीवी के कैथल जिले के ढांड में मौजूद कॉल सेंटर से बीज को वितरित किया जाने वाला है। 3 क्विंटल गन्ने (kab milegi COH-191 variety) की आंख उपलब्ध कराई जाने वाली है। इतनी मात्रा से 1 कैनाल या फिर आधा एकड़ भूमि में बिजाई हो सकती है, जिससे शुरुआती फेज में किसानों को नई किस्म का सीमित इलाकों में परीक्षण करने का मौका मिलेगा।

गन्ने के साथ अंतरफसल लगा सकते हैं किसान 


सीओएच-191 की बिजाई (Sowing of COH-191) वाले खेत में किसान गन्ने के साथ ही ओर फसल ले सकते हैं। आलू, मटर, धनिया, सरसों और लहसुन के लिए उपलब्ध जगह का यूज हो सकता है। इससे गन्ने की फसल तैयार होने तक खेत से अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है।