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हरियाणा में सरकारी स्कूलों में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बजट का प्रावधान, विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से मिलेगी ग्रांट

Annual grant to government schools : सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए प्रशासन की ओर से तैयारी कर ली गई है। अब सरकारी स्कूलों को खर्च का पूरा हिसाब देना होगा। शैक्षणिक सेशन में स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब और जरूरत के हिसाब से बजट मिल सकेगा। स्कूलों (Annual grant to government schools) में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बजट का प्रावधान तय किया गया है।
 
हरियाणा में सरकारी स्कूलों में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बजट का प्रावधान, विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से मिलेगी ग्रांट

HR Breaking News (government schools Annual grant) हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं को बेहतर बनाने के लिए ओर बदहाली दूर करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से बजट का प्रावधान तय किया गया है। अब स्कूलों को विद्यार्थी की संख्या और के हिसाब से बजट मिल सकेगा, जिससे स्कूलों में बजट के उपयोग में पारदर्शिता आ सकेगी। खबर में जानिए इस बारे में विस्तार से-

तीन मदों में खर्च होगी ग्रांट की राशि 


शैक्षणिक सेशन 2026-27 (Academic session 2026-27) में स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के बेस पर 10 हजार से 1 लाख रुपये तक की वार्षिक ग्रांट देने का प्रोविजन तय किया गया है, जिससे सफाई ,शौचालय, पेयजल व्यवस्था, शिक्षण सामग्री, रसोईघर, भवन और प्रयोगशालाओं से जुड़े कार्य करवाए जा सकेंगे। ग्रांट का यूज तय नियमों के हिसाब से करना होगा।


स्कूलों को खर्च का हिसाब-किताब और बिल दिसंबर की शुरुआत में जमा कराना जरूरी होगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उसके अनुसार, ग्रांट की राशि (Grant amount to schools) तीन मदों में खर्च होगी। 

 

किन कामों में कितना बजट होगा यूज


जानकारी के लिए बता दें कि ग्रांट के कुल बजट (Total Grant Budget) का 10 प्रतिशत स्वच्छता व्यवस्था पर खर्च किया जाने वाला है और 20 प्रतिशत शिक्षण सामग्री की खरीद पर खर्च करना अनिवार्य होगा। बाकी की बची 70 प्रतिशत राशि अन्य जरूरी कामों के लिए यूज होगी, जिसमे पेयजल व्यवस्था में सुधार, शौचालयों की मरम्मत, रसोईघर आदि कार्य हो सकेंगे।


किन स्कूलों को कितना मिलेगा ग्रांट 


BEO का कहना है कि छात्रों की संख्या के मुताबिक स्कूलों को 5 कैटेगरी (Students ke hisab se kaise milega grant) में बांटा गया है। 1 से 30 विद्यार्थियों वाले स्कूल को 10 हजार ग्रांट दिया जाने वाला है। 31 से 100 छात्रों वाले स्कूल को 25 हजार, 101 से 250 विद्यार्थियों वाले स्कूल को 50 हजार ग्रांट दिया जाएगा और 251 से 1000 विद्यार्थियों वाले स्कूल को 75 हजार रुपये दिए जाने वाले हैं। 1000 से ज्यादा छात्रों की संख्या वाले स्कूल को 100000 रुपये की ग्रांट (Grant to schools with more than 1000 students) दी जाने वाली है।

 

कैसे तय की जाएंगी स्कूलों की प्राथमिकताएं 


ग्रांट से जो काम करवाएं जाएंगे, उनका चुनाव स्कूल प्रबंधन समिति (school management committee) की बैठक में किया जाने वाला है। समिति स्कूल की जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। उसके बाद ही तय नियमों के तहत मरम्मत का काम होगा।सामान की खरीदी के लिए जहां पर दर अनुबंध मौजूद होंगे, उनका पालन करना अनिवार्य होगा। उसके बाद अन्य मामलों में नियम के हिसाब से कोटेशन आमंत्रित किए जाने वाले हैं।

 

स्कूलों को देना होगा खर्च का पूरा ब्योरा 


जान लें कि ग्रांट खर्च करने के बाद स्कूलों को दिसंबर की शुरुआत में सभी बिल और खर्च का ब्योरा विभाग के पास जमा कराना अनिवार्य होगा। इस दौरान खरीदारी से जुड़े बिल, भुगतान और अन्य रिकॉर्ड को सेफ रखना होगा। बता दें कि विभाग की ओर से खर्च का ऑडिट भी किया जाएगा और हर एक खर्च का प्रमाण (government schools proof of grant expenditure) रखना और राशि का यूज तय मदों में करना अनिवार्य होगा।