CM Yogi के निर्देश जारी, जमीन खरीदने-बेचने व नाम कराने में यूपी वालों को होगी आसानी
HR Breaking News (land registration ) योगी सरकार की ओर से राज्य में रजिस्ट्री के नियम को आसान बनाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। इससे यूपी वालों को जमीन नाम कराने, खरीदने-बेचने में मुश्किलों से छुटकारा मिलेगा ओर साथ ही रियल एस्टेट मार्केट में पारदर्शिता आएगी। आइए खबर के माध्यम से जानते हैं कि योगी सरकार की ओर से जमीन (land registration Process) खरीदने-बेचने को लेकर क्या निर्देश जारी किए गए हैं।
जमीन रजिस्ट्रेशन कराने का प्रोसेस होगा सरल
यूपी के लोगों को अब जमीन खरीदने-बेचने के झंझटों से राहत दिलाने के लिए बड़ी सुविधा प्रदान की जा रही है। अब प्रदेश के लोगों को जमीन खरीदने और पुश्तैनी संपत्तियों (ancestral properties) को अपने नाम रजिस्टर कराने के लिए बार-बार चक्कर नहीं काटने होंगे और कागजों के लिए इधर-उधर भटकना भी नहीं होगा।
इन धाराओं को बनाया जाएगा आसान
योगी सरकार की ओर से अब जमीनों पर नाम रजिस्टर कराने के प्रोसेस को सरल बनाया जा रहा है। सीएम योगी ने इससे जुड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। जमीनों पर नाम रजिस्टर कराने वाले प्रोसेस के साथ ही धारा-34 और धारा-80 के प्रोसेस को आसान बनाने का प्लान बनाया गया है। बता दें कि NIC द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर की ओर से इसे एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया जा रहा है, जिसे आगामी महीने 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।
धारा-80 की कार्यवाही का होगा डिजिटलीकरण
बता दें कि कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक यूज में तब्दील करने के लिए धारा-80 (Section 80 proceedings digitized ) में जो कार्यवाही होने वाली है, उसे भी डिजिटलीकरण किया जाना है। इसमें पहले एप्लिकेशन, अप्रूवल और अभिलेख अपडेट के लिए लोगों को खूब भागा-दौड़ी करनी पड़ती थी, लेकिन अब इससे जुड़ी सभी जानकारियां ऑनलाइन अप्लाई फॉर्म में एक बार में ही ली जाएंगी। इन जरूरी जानकारियों में खसरा-खतौनी डिटेल, मौजूदा उपयोग की स्थिति और आस-पास के इलाकों की जानकारियां शामिल है। उसके बाद डिजिटली जांच होगी, जिससे अकाउंटेंट द्वारा बार-बार रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं होगी।
कैसा होगा आसानी से डिजिटली नामांतकरण
स्टांप एवं पंजीकरण विभाग (Stamp and Registration Department) व राजस्व परिषद भूमि से जुड़ी प्रशासनिक प्रोसेस को डिजिटलाइजेशन और आसान किया जा रहा है। रियल एस्टेट के ट्रांस्फर होते ही धारा-34 में डिजिटली नामांतकरण (digitally renamed) हो जाएगा। इसके साथ ही डिजिटलाइजेशन से जरूरी दस्तावेज जैसे- खसरा-खतौनी डिटेल, मालिकाना हक के प्रमाण और अन्य दस्तावेज ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से एक बार में ही उपलब्ध हो जाएंगे और ऑनलाइन होते ही इसकी जांच भी हो जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि इससे फॉर्म भरने, दस्तावेज सब्मिट करने और अकाउंटेंट की रिपोर्टिंग का झंझट खत्म हो जाएगा।
प्रोसेस से जुड़ी सूचना मिलेंगी ऑनलाइन
भूमि से जुड़ी प्रशासनिक प्रोसेस को डिजिटलाइजेशन बनाने से प्रोसेस से जुड़े सभी नोटिस अब ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या व्हाट्सएप से जाएंगे, जिससे आवेदक को तुरंत सुचना मिलेगी और अकाउंटेंट की रिपोर्ट भी कम लगेगी। ट्रांस्फर सर्टिफिकेट और भू-उपयोग बदलाव प्रमाण पत्र (Land Use Change Certificate) भी अब कुछ ही समय में ऑनलाइन मिलेगा। भू-प्रशासन में इस डिजिटल पहल से समय की बचत के साथ ही संपत्ति की खरीद बिक्री में होने वाले धोखाधड़ी कम होगी और साथ ही भू-उपयोग बदलाव में सुधार होगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश में बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
