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Delhi-NCR : महंगी शराब पीने वाले हो जाएं सावधान, ऐसे चल रहा है खेल

Delhi-NCR : हाल ही में हुए एक मामले के मुताबिक आपको बता दें कि गुड़गांव में महंगी ब्रांड की शराब की बोतलें काफी सस्ती कीमत पर बेची जा रही थी। बाद में पता चला कि असली ब्रांड जैसी दिखने वाली इन बोतलों में सस्ती शराब होती है। ऐसे में आपको शराब खरीदते समय बेहद अलर्ट रहने की जरूरत है। 
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HR Breaking News, Digital Desk- देश के कई राज्यों में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली और मिलावटी शराब बनाने का धंधा जोरशोर से चल रहा है। कुछ महीने पहले गुड़गांव में नकली शराब बनाने का कारनामा उजागर हुआ था। वहां विदेशी शराब की खाली बोतलें, ढक्कन और रैपर आदि बरामद हुए थे। अब हापुड़ में पानी में केमिकल मिला कर नकली शराब बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड हुआ है।

उनके पास से 10 पेटी नकली शराब, नकली ढक्कन, सील, खाली पव्वे, फर्जी बार कोड, ब्रांडेड कंपनियों के खाली काटून और इक्विपमेंट मिले हैं। पुलिस ने इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग हापुड़ और मेरठ के ठेकों पर नकली शराब सप्लाई करके मोटी कमाई करते थे।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और आसपास के ठेकों के साथ सेटिंग थी। वे ठेकों को नकली शराब की सप्लाई करके मोटी रकम कमाते थे। वे पानी में केमिकल का इस्तेमाल कर नकली शराब बनाते थे। इसके बाद ब्रांडेड शराब कंपनियों की खाली बोतलें, रैपर, बार कोड आदि से पैकिंग कर सप्लाई करते थे।

इस तरह आप ठेके से जो बोतल खरीदते हैं, उसके लिए पूरे पैसे चुकाते हैं लेकिन आपकी असली बोतल में नकली शराब मिलती है। जानकारों की मानें तो देश के कई राज्यों में इस तरह का खेल चल रहा है। कुछ महीने पहले हरियाणा के गुड़गांव में भी एक मामला सामने आया था जहां ब्रांडेड कंपनियों की शराब सस्ती कीमत पर बेची जा रही थी।

कैसे होता था खेल-

गुड़गांव में महंगी ब्रांड की शराब की बोतलें काफी सस्ती कीमत पर बेची जा रही थी। बाद में पता चला कि असली ब्रांड जैसी दिखने वाली इन बोतलों में सस्ती शराब होती है। जालसाज हूबहू असली ब्रांड जैसी शक्ल देकर गुरुग्राम सहित कई शहरों में इनकी सप्लाई करते थे और कई गुना अधिक मुनाफा कमाकर शराब का रैकेट चला रहे थे।

वे शराब की खाली बोतलों को साफ करके उन पर ओरिजिनल लेबल की कॉपी लगवाई जाती थी जो देखने में बिल्कुल असली लगती है। इसके बाद इनमें सस्ती शराब भरी जाती थी। इस बोतलों को ऑनलाइन या स्थानीय दुकानों पर एजेंटों के जरिए बेचने के लिए भेज दिया जाता था। इस तरह फर्जी शराब की बोतल बेचकर जालसाज मोटी कमाई कर रहे थे।