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1 अक्टूबर 2026 से होंगे बड़े बदलाव, एफडी से एलपीजी सब्सिडी तक के नियम होंगे चेंज

New Rules From October 1 : सितंबर माह खत्म होने में कुछ ही घंटे शेष है। जब भी नए माह की शुरआत होती है तो कई नियमों में बदलाव होता है। नए नियमों का असर आम लोगों की जेब और कार्य पर पड़ता है। अब इस बार 1 अक्टूबर 2026 से देशभर में बड़े बदलाव होने वाले हैं, जिसके तहत एफडी से एलपीजी सब्सिडी के नियमों (October New Rules) में बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। 
 
1 अक्टूबर 2026 से होंगे बड़े बदलाव, एफडी से एलपीजी सब्सिडी तक के नियम होंगे चेंज

HR Breaking News (New Rules) नए माह की शुरुआत के साथ ही लोगों में यह चिंता सताती है कि अब किन नियमों में बदलाव होने वाला है। सरकार की ओर से हर महीने की पहली तारीख (New Rules From October 1 2026) को कई नियमों में बदलाव किया जाता है। अब कुछ ही समय में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही कई नए नियम लागू होने वाला है। ऐसे में आइए खबर मे जानते हैं कि 1 तारीख से किन नियमों में बदलाव होने वाला है।

 

गैस सब्सिडी के लिए क्या है नए नियम (LPG Subsidy Ke Niyam)


कुछ ही समय में 1 अक्तूबर 2026 से LPG सब्सिडी को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियमों के हिसाब से अब सब्सिडी (LPG Subsidy) वाले सिलिंडर के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा। अभी तक जिन ग्राहकों ने BAA नहीं कराया है, उन्हें यह प्रोसेस पूरा करना जरूरी होगा। 


हालांकि बिना ऑथेंटिकेशन के भी LPG सिलिंडर की सप्लाई बंद नहीं की जाएगी। यानी केवाईसी नहीं करवाने पर भी गैस का सिलिंडर मिलता रहेगा, लेकिन ऐसे ग्राहकों को सिलिंडर मौजूदा बाजार भाव पर खरीदना पड़ सकता है। उन्हें सब्सिडी (LPG Subsidy New Rules) का लाभ नहीं मिलेगा।


सरकार के अनुसार इससे सही परिवारों तक सब्सिडी (LPG Subsidy ka Benefits) का फायदा पहुंच सकेगा। इसके अलावा घरेलू LPG के गलत यूज पर रोक लगेगी। 19 सितंबर 2026 तक लगभग 89.9 प्रतिशत एक्टिव LPG ग्राहकों की ओर से BAA पूरा कर लिया गया था। आप भी समय रहते आधार ऑथेंटिकेशन करा लें ताकि आपको भी सब्सिडी वाले रेट पर गैस सिलिंडर मिलता रहे।


बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियम (New rules regarding bulk deposits)


सिर्फ गैस की सब्सिडी ही नहीं, बल्कि आरबीआई ने बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियमों (New rules regarding bulk deposits) को जारी किया हैं, जिसके चलते अब 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की FD बल्क डिपॉजिट (FD Bulk Deposit) मानी जाएगी। जबकि, इससे पहले इसकी लिमिट 2 करोड़ रुपये थी।


नए नियमों के अनुसार बैंक बल्क एफडी पर अपनी जरूरत के अनुसार अलग से ब्याज दरों को तय कर सकेंगे। ब्याज दरों को लेकर नया नियम भी 1 अक्तूबर से लागू होने वाला है। 
इसके साथ ही बैंकों को हर वर्किंग डे सुबह 10 बजे तक दरें वेबसाइट पर अपडेट करना अनिवार्य होगा, जिसके लिए आरबीआई (Reserve Bank Of India) ने 10 मिनट का ग्रेस पीरियड भी दे दिया है। यानी अब सुबह 10 बजकर 10 मिनट तक नई दर वेबसाइट पर दिखनी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही एक ही तारीख की समान राशि और अवधि वाली एफडी पर सभी ब्रांच में एक जैसी दर होगी।


जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के नए नियम 


इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रोविजन (Provisions of the Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026) लागू होंगे। अब जन्म या मृत्यु के देर से रजिस्ट्रेशन का प्रोसेस पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए है।

2 साल से अधिक देरी से रजिस्ट्रेशन कराने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। भारत के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से गजट अधिसूचना के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की गई है।

यह संशोधन कानून संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बना है।

क्यों किया गया जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमों में बदलाव 


नियमों में बदलाव का मकसद जन्म व मृत्यु की घटनाओं की समय (Birth-Death Registration Rules to Change) पर रिपोर्टिंग और रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा देना है। यह बदलाव जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करता है। 1 से 2 साल के अंदर रजिस्ट्रेशन के लिए जिलाधिकारी, उप-जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की परमिशन लेना अनिवार्य होगा।


अधिकारी जानकारी के वैरिफिकेशन जांचने के बाद तय शुल्क जमा होने पर रजिस्ट्रेशन की परमिशन देंगे। इससे पहले 2023 में भी कानून में बदलाव किया गया था, जिसके प्रोविजन 1 अक्तूबर 2023 से लागू हुए थे।